Gold Price Today: सोने की कीमतों में बीते काफी वक्त से लगातार उतार-चढ़ाव का दौर जारी है. इस साल जनवरी महीने में सोना अपने ऑल-टाइम हाई लेवल पर पहुंचा था, लेकिन इसके बाद से इसमें बड़ी गिरावट देखी जा चुकी है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की हालिया रिपोर्ट ने सोने के निवेशकों को हैरत में डाल दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, मई महीने में जहां वैश्विक स्तर पर सोने के दाम गिरे हैं, वहीं भारतीय बाजारों में इसमें तेजी दर्ज की गई है. लेकिन दूसरी ओर, सोने का इतिहास एक डराने वाला इशारा कर रहा है, जिससे निवेशकों को सावधान रहने की जरूरत है.
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आज का सोना-चांदी का भाव: MCX पर गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर आज यानी 9 जून 2026 को सोने की कीमतों में नरमी देखी गई. दोपहर डेढ़ बजे के करीब, 5 अगस्त 2026 की डिलीवरी वाला सोना गिरावट के साथ 1,54,396 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था. वहीं दूसरी ओर, चांदी की कीमतों में मामूली बढ़त दर्ज की गई. 3 जुलाई 2026 की डिलीवरी वाली चांदी 301 रुपये की तेजी के साथ 2,46,588 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी.
वैश्विक बाजार में मंदी, लेकिन भारत में रिकॉर्ड उछाल
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिपोर्ट के अनुसार, मई महीने में वैश्विक स्तर पर सोने के दाम में 1.4 प्रतिशत की गिरावट आई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,546 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ. इसके विपरीत, भारतीय घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में 4.1 प्रतिशत की जोरदार तेजी दर्ज की गई. अगर इस साल की बात करें, तो भारतीय बाजार में सोने ने अब तक अपने निवेशकों को करीब 20 प्रतिशत का शानदार रिटर्न दिया है.
पीएम मोदी की अपील और इंपोट ड्यूटी का असर
भारत में सोने की कीमतों में आई इस हालिया तेजी के पीछे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और सर्राफा बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव मुख्य वजह हैं. इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए नागरिकों से अपील की थी कि वे फिलहाल कुछ समय के लिए सोने की खरीदारी को टाल दें. इस अपील के बाद देश के भुगतान संतुलन पर दबाव कम करने और अंधाधुंध आयात को रोकने के लिए सरकार ने सोने पर इंपोट ड्यूटी बढ़ा दी, जिससे घरेलू बाजार में इसके दाम और बढ़ गए. हालांकि, ऊंची कीमतों और पीएम की अपील के कारण भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में सोने की फिजिकल मांग में कुछ नरमी जरूर आई है.
पूर्व की घटनाएं क्या करती हैं इशारा?
बाजार विशेषज्ञों ने सोने की कीमतों को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की है. पिछले दो दशकों का मूल्य इतिहास बताता है कि जब भी सोने में कोई ऐतिहासिक तेजी आती है तो उसके ठीक बाद एक बड़ी गिरावट भी देखने को मिलती है. सितंबर 2022 से शुरू हुई सोने की रिकॉर्ड तोड़ रैली ने इस साल 29 जनवरी को अपने उच्चतम शिखर को छुआ था. इस पूरी अवधि के दौरान सोने ने करीब 245 प्रतिशत का बंपर रिटर्न दिया, लेकिन इतिहास गवाह है कि इस तरह के शिखर के बाद बाजार हमेशा नीचे गिरता है.
सोने के क्रैश होने का पुराना रिकॉर्ड
इतिहास के पन्नों को पलटें तो सोने की कीमतों में पहली बार भारी गिरावट 1974 से 1976 के बीच देखी गई थी. अगस्त 1971 से नवंबर 1974 के बीच सोने की कीमतों में 353% का इजाफा हुआ था, जिसके बाद यह 43% तक टूट गया. इसके बाद 1980 के दशक में दूसरी बड़ी मंदी आई; जब अगस्त 1976 से सितंबर 1980 के बीच 541% की भारी तेजी के बाद सोना अचानक 52% तक क्रैश हो गया. यह सिलसिला यहीं नहीं थमा, जून 1982 के बाद सोने में फिर 57% की वृद्धि हुई, लेकिन जनवरी 1983 से फरवरी 1985 के बीच इसमें फिर से 42% की भारी गिरावट दर्ज की गई.
क्या 2026 में 85,300 रुपये तक आ सकता है सोना?
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, अगस्त 1999 से अगस्त 2011 के बीच सोने की कीमत में 612% की बढ़ोतरी हुई थी, जो 1971 के बाद से सबसे लंबी तेजी थी. लेकिन इसके बाद अगस्त 2011 के अंत से दिसंबर 2015 तक इसमें 42% की गिरावट आई. अब एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि इतिहास खुद को दोहराता है और साल 2026 में सोने की कीमत अपने रिकॉर्ड हाई से औसतन 50% तक गिरती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह लगभग 2,800 से 3,000 डॉलर प्रति औंस तक आ सकती है. इस लिहाज से भारतीय रुपयों में सोने की कीमत गिरकर 85,300 से 91,400 रुपये प्रति दस ग्राम तक आ सकती है.
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