राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में इन दिनों बुलडोजर एक्शन की चर्चाएं जोरों पर हैं. दिल्ली के बदरपुर क्षेत्र के तीन प्रमुख वार्डों- जैतपुर, मीठापुर और हरि नगर में हाल ही में कुछ सरकारी बोर्ड लगाए गए हैं. इन बोर्ड्स में इस पूरे क्षेत्र को O Zone घोषित किया गया है और साथ ही यह साफ तौर पर लिखा गया है कि यहां किसी भी प्रकार के नए निर्माण की अनुमति नहीं है. इस कदम के बाद स्थानीय निवासियों में भारी डर और पैनिक (अफरा-तफरी) की स्थिति देखी जा रही है. जगह-जगह लोग इस फैसले को लेकर बैठकें और प्रदर्शन भी कर रहे हैं. इस पूरे मामले पर क्षेत्र के नवनिर्वाचित सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए आम जनता को बड़ा आश्वासन दिया है.
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क्यों लगे ओ-जोन के बोर्ड और क्या है लोगों में डर की वजह?
सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने बताया कि साल 2014 में एक व्यक्ति दिल्ली हाई कोर्ट गया था, जिसमें ओ-जोन के भीतर अवैध निर्माण का मुद्दा उठाया गया था. इस मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने अप्रैल 2026 में दिल्ली सरकार, नगर निगम (MCD) और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को यह आदेश दिया था कि ओ-जोन क्षेत्रों में किसी भी नए निर्माण को तुरंत रोका जाए. इसके साथ ही अदालत ने लोगों को जागरूक करने के लिए वहां बोर्ड लगाने के निर्देश भी दिए थे. इसी अदालती आदेश के अनुपालन में ये बोर्ड लगाए गए हैं, जिन्हें देखकर स्थानीय जनता में यह भ्रम फैल गया कि भाजपा सरकार अब इन इलाकों में हर जगह बुलडोजर चलाने और तोड़फोड़ करने की तैयारी कर रही है.
अक्षरधाम और दिल्ली सचिवालय भी ओ-जोन में शामिल!
पूरे मामले के इतिहास पर रोशनी डालते हुए सांसद बिधूड़ी ने बताया कि 8 मार्च 2010 को जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब दिल्ली के पांच लोकसभा क्षेत्रों के कई हिस्सों को ओ-जोन के दायरे में लाने का फैसला किया गया, जो 10 अगस्त 2010 से लागू हो गया. इस ओ-जोन के तहत दिल्ली की 92 अनअथराइज्ड कॉलोनियां और दर्जनों प्राचीन गांव आ गए, जिन्हें दरअसल 24 मार्च 2008 को ही नियमित (रेगुलराइज) कर उनके आरडब्ल्यूए (RWA) को सर्टिफिकेट सौंप दिए गए थे.
सांसद ने अधिकारियों पर निशाना साधते हुए कहा कि डीडीए के अफसरों ने एयर कंडीशन कमरों में बैठकर यह गलत फैसला लिया. डीडीए की इस लापरवाही का आलम यह है कि उन्होंने मदनपुर खादर की डीडीए कॉलोनी, जसोला के डीडीए प्लॉट्स, दिल्ली का सेक्रेटेरिएट (सचिवालय), कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज (खेल गांव) और यहां तक कि ऐतिहासिक अक्षरधाम मंदिर को भी ओ-जोन में दर्शा रखा है.
साल 2013 का डीडीए का वो फैसला जिसे लागू कराने की है मांग
बिधूड़ी के अनुसार, जब साल 2010 में ओ-जोन लागू हुआ तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आरडब्ल्यूए ने इसका कड़ा विरोध किया. अपनी गलती का एहसास होने पर साल 2013 में डीडीए ने खुद एक बड़ा फैसला लिया. डीडीए ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर कहा कि ओ-जोन में शामिल किए गए इन रिहायशी क्षेत्रों को अब 'एफ-जोन' (F Zone यानी रेजिडेंशियल जोन) में तब्दील या ट्रांसफर किया जाएगा.
हालांकि, इस नोटिस के खिलाफ कुछ लोग एनजीटी (NGT) कोर्ट चले गए, जिसने इस पर स्टे लगा दिया था. लेकिन साल 2015 में एनजीटी ने इस मामले को निपटाते हुए भारत सरकार की एक्सपर्ट कमेटी को जांच सौंपी. एक्सपर्ट कमेटी और डीडीए के डिमार्केशन (सीमांकन) में यह साफ हो गया कि इन 92 कॉलोनियों और प्राचीन गांवों से यमुना के बहाव या पानी की गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ता है, इसलिए इन्हें रेजिडेंशियल यानी एफ-जोन की तरह ही ट्रीट किया जाना चाहिए.
जल्द समाधान की उम्मीद
सांसद बिधूड़ी ने जानकारी दी कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए उन्होंने और सांसद मनोज तिवारी ने दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल (LG) से मुलाकात की है और उन्हें सभी तथ्यों से अवगत कराया है, जिस पर एलजी ने आवश्यक कार्रवाई का पूरा आश्वासन दिया है. इसके साथ ही, तीन दिन पहले बिधूड़ी ने दिल्ली की माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता से भी मुलाकात कर सारे दस्तावेज सौंपे हैं.
उनकी जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस विषय पर अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है और दिल्ली सरकार ने अपने बजट में इन अनअथराइज्ड कॉलोनियों के विकास कार्यों के लिए एक बड़ी धनराशि भी आवंटित की है. उन्होंने कहा कि ट्रिपल इंजन (केंद्र, दिल्ली और नगर निगम में भाजपा) की सरकार 15 लाख लोगों के साथ न्याय करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
संसद सदस्य के नाते गारंटी और जनता से विशेष अपील
स्थानीय निवासियों और प्राचीन गांवों के लोगों को पूरी तरह आश्वस्त करते हुए सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि देश की संसद के कानून के मुताबिक, 31 दिसंबर 2026 तक किसी भी अनअथराइज्ड कॉलोनी या गांव में किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ पर पूरी तरह से कानूनी रोक लगी हुई है. उन्होंने पार्लियामेंट मेंबर के नाते गारंटी दी कि वो पुरानी आबादी के एक भी मकान या सिंगल हाउस को टूटने नहीं देंगे.इसके साथ ही उन्होंने बदरपुर, ओखला, बुराड़ी, घोंडा समेत दिल्ली की सात विधानसभाओं के लोगों से अपील की कि वे किसी के बहकावे या राजनीतिक भ्रम में न आएं.
मास्टर प्लान के मुताबिक, प्राचीन गांवों के लोग अपने घरों की मरम्मत या पुनर्निर्माण कर सकते हैं, लेकिन सांसद ने सभी से हाथ जोड़कर आग्रह किया कि जब तक सरकार इस पर अंतिम फैसला लेकर इन कॉलोनियों को ओ-जोन से पूरी तरह बाहर नहीं कर देती (जो कि मार्च 2026 से पहले करने का लक्ष्य है), तब तक लोग वहां किसी भी प्रकार का नया निर्माण कार्य न करें, ताकि कानूनी अड़चनों से बचा जा सके.
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