सरकारी विभागों में लापरवाही और ढुलमुल रवैये के किस्से तो अक्सर सामने आते रहते हैं, लेकिन दिल्ली नगर निगम (MCD) ने एक ऐसा हैरतअंगेज कारनामा कर दिखाया है जिसे सुनकर कोई भी अपना सिर पकड़ लेगा. एमसीडी के प्रशासनिक अमले ने एक ऐसी तबादला सूची जारी कर दी है, जिसने पूरी दिल्ली के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है. एमसीडी ने अपनी आधिकारिक ट्रांसफर लिस्ट में उन इंजीनियर्स का भी तबादला कर दिया, जो अब इस दुनिया में ही नहीं हैं. इसके अलावा लंबे समय से सस्पेंड चल रहे अधिकारी को भी नई जिम्मेदारी सौंप दी गई. इस महालापरवाही के उजागर होने के बाद जब चौतरफा बवाल बढ़ा, तब कहीं जाकर एमसीडी प्रशासन की नींद टूटी.
ADVERTISEMENT
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली नगर निगम के इंजीनियरिंग विभाग की तरफ से बीते शुक्रवार (5 जून) को 12 इंजीनियरों के तबादले की एक सूची जारी की गई थी. इस लिस्ट के सामने आते ही मीडिया और राजनीतिक हलकों में एक बड़ा खुलासा हुआ. पता चला कि इस आधिकारिक ट्रांसफर लिस्ट में दो ऐसे इंजीनियरों के नाम शामिल थे, जिनका कई महीने पहले ही निधन हो चुका है. मृतकों की सूची में शामिल इन इंजीनियरों के नाम प्रतीक और अपूर्व भटनागर हैं. हद तो तब हो गई जब इस लिस्ट में एक तीसरे इंजीनियर गौरव गर्ग का भी नाम शामिल पाया गया, जो पिछले करीब 9 महीने से विभाग से निलंबित यानी सस्पेंड चल रहे हैं. जो लोग दुनिया में नहीं हैं और जो सस्पेंड हैं, अफसर कुर्सियों पर बैठकर उन्हीं का ट्रांसफर करने में व्यस्त थे.
गलती सुधारने में भी की दोबारा लापरवाही
इस अजीबोगरीब मामले पर जब विभाग की किरकिरी होनी शुरू हुई, तो एमसीडी ने आनन-फानन में एक सुधार (अमेंडमेंट) आदेश निकालकर अपनी गलती को ढकने की कोशिश की. लेकिन लापरवाही का आलम इस कदर हावी था कि उस नए संशोधन आदेश में भी दो मृत इंजीनियरों में से सिर्फ एक का ही नाम हटाया गया. दूसरे मृत इंजीनियर और निलंबित चल रहे गौरव गर्ग का नाम उस लिस्ट में वैसा का वैसा ही छोड़ दिया गया. जब मामला पूरी तरह से हाथ से निकलता दिखा और हर तरफ थू-थू होने लगी, तो एमसीडी प्रशासन ने घबराकर शुक्रवार को जारी किए गए तबादले के इस पूरे आदेश को ही पूरी तरह से कैंसिल यानी रद्द कर दिया.
तबादला सूची रद्द होने से अन्य इंजीनियरों की खुली लॉटरी
एमसीडी द्वारा इस पूरी ट्रांसफर लिस्ट को रद्द कर दिए जाने से निगम के कई दूसरे इंजीनियरों की चांदी हो गई है और उन्हें बैठे-बिठाए बड़ा फायदा मिल गया है. दरअसल, इस सूची के तहत कई लोगों का जोन बदला गया था, तो कुछ अधिकारियों को मलाईदार समझे जाने वाले बिल्डिंग विभाग से हटाकर मेंटेनेंस विभाग में भेज दिया गया था. लेकिन अब पूरा आदेश ही खारिज हो जाने की वजह से फिलहाल सभी अधिकारी अपनी पुरानी कुर्सियों पर सुरक्षित बने रहेंगे और उन पर ट्रांसफर की गाज गिरने से बच गई है.
विपक्ष हमलावर, बीजेपी और अफसरों की मिलीभगत का लगाया आरोप
एमसीडी के इस बड़े ब्लंडर पर दिल्ली की सियासत पूरी तरह से गरमा गई है. एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने इस विभागीय लापरवाही को लेकर अधिकारियों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने बकायदा 5 जून को जारी हुई चिट्ठी संख्या 165 का हवाला देते हुए कहा कि इस पर एडिशनल डिप्टी कमिश्नर के हस्ताक्षर हैं. अंकुश नारंग ने आरोप लगाया कि जब से एमसीडी के अंदर बीजेपी की सरकार आई है, तब से यह सारा फर्जीवाड़ा चल रहा है और पैसे लेकर ट्रांसफर लिस्ट बनाई जाती है.
उन्होंने सवाल उठाया कि 7 महीने पहले मर चुके अपूर्व भटनागर और मृत जेई प्रतीक के साथ-साथ 9 महीने से सस्पेंड गौरव गर्ग का ट्रांसफर कैसे कर दिया गया. उन्होंने यह भी तंज कसा कि मृत प्रतीक जी को तो बिल्डिंग डिपार्टमेंट का एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) बना दिया गया था, जबकि दिल्ली में पहले ही इमारतें गिरने और आग लगने की घटनाएं हो रही हैं. विपक्ष ने इस पूरे मामले की तत्काल जांच, दोषी अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और भविष्य के लिए डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम लागू करने की मांग की है.
ADVERTISEMENT


