दिल्ली की लाइफ लाइन कही जाने वाली यमुना नदी को साफ और स्वच्छ बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बहुत बड़े महा अभियान का ऐलान किया है. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक विशेष वीडियो संदेश जारी कर इस रविवार यानी 14 जून को सभी दिल्ली वासियों, गैर सरकारी संगठनों (NGOs) और स्वयं सहायता समूहों को सीधे यमुना किनारे आने का खुला इनविटेशन दिया है. सरकार का उद्देश्य जनता की भागीदारी से यमुना के घाटों की सूरत बदलना है.
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वीडियो शेयर कर की अपील
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने ऑफिशियल X अकाउंट पर एक वीडियो शेयर करते हुए दिल्ली की जनता के नाम एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है. उन्होंने आम जनता, सामाजिक संस्थाओं और स्वयं सहायता समूहों से अपील की है कि वे आने वाले रविवार, 14 जून को सुबह से ही इस बड़े सफाई अभियान का हिस्सा बनने के लिए यमुना के अलग-अलग घाटों पर पहुंचें. मुख्यमंत्री ने दिल्ली के नागरिकों से सीधे जुड़कर इस अभियान को एक जन आंदोलन बनाने की रूपरेखा तैयार की है.
500 से ज्यादा एनजीओ इस मिशन से जुड़े
सरकार के इस यमुना सफाई प्लान को सामाजिक स्तर पर भी भारी समर्थन मिल रहा है. मुख्यमंत्री ने जानकारी दी है कि इस पूरे मिशन को लेकर अब तक 500 से ज्यादा एनजीओ (NGOs) से संपर्क किया जा चुका है और वे इस मुहिम से जुड़ चुके हैं. 14 जून को होने वाले इस मेगा ड्राइव के तहत दिल्ली के सभी प्रमुख घाटों पर बड़े पैमाने पर सफाई का काम किया जाएगा, जिसमें सामाजिक संस्थाओं के कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मिलकर श्रमदान करेंगे.
मशीनों के साथ-साथ नागरिकों की जिम्मेदारी भी जरूरी
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने संदेश में साफ किया कि यमुना नदी के अंदर की गंदगी को साफ करने के लिए दिल्ली सरकार लगातार आधुनिक मशीनों और एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) के जरिए काम कर रही है. हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नदी के घाटों के आसपास जो गंदगी फैलती है, वह कहीं न कहीं हमारे जैसे लोगों की वजह से ही होती है. इसलिए इन घाटों को साफ रखना और सुधारना दिल्ली के हर एक नागरिक की जिम्मेदारी है.
रविवार सुबह शुरू होगी मेगा ड्राइव
मुख्यमंत्री ने दिल्लीवासियों से आह्वान किया है कि 14 जून को रविवार की सुबह सभी लोग इस काम में जुट जाएं. जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिसके घर के पास जो भी यमुना का नियरेस्ट घाट लगता हो, वह वहां जाकर सफाई अभियान में अपना योगदान दे सकता है. सरकार का मानना है कि जब तक इस अभियान में जनता की भागीदारी सबसे अहम नहीं होगी, तब तक यमुना को पूरी तरह स्वच्छ रखने का लक्ष्य हासिल करना मुमकिन नहीं है.
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