कहते हैं कि अगर मौत और जिंदगी के बीच खुदा खड़ा हो जाए, तो मौत भी हार मान लेती है. हरियाणा के फरीदाबाद और पलवल के बीच से गुजरने वाली आगरा कैनाल (नहर) में एक ऐसा ही चमत्कार देखने को मिला है. यहां एक 8 साल का मासूम बच्चा जिसे तैरना तक नहीं आता था, उफनती नहर में 5 किलोमीटर तक बह गया. इसके बाद वह करीब 12-14 फीट गहरी नहर के बीचों-बीच एक पेड़ की पतली सी टहनी के सहारे 12 घंटे तक लटका रहा और मौत को मात देकर सुरक्षित बाहर निकल आया.
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संडे बाजार के बहाने मौत के मुहाने तक ले गया पिता
पूरी घटना रविवार शाम की है. पलवल के असावटी गांव का रहने वाला भगवत दयाल गुजरात की एक कंपनी में काम करता है, वह कुछ दिन पहले ही घर आया था. रविवार को उसने अपनी पत्नी से कहा कि वह अपने दोनों बेटों 8 साल के सम्राट और 5 साल के युग को पलवल का संडे बाजार घुमाने ले जा रहा है. लेकिन पिता के मन में कुछ और ही चल रहा था. वह बच्चों को बाजार ले जाने के बजाय फतेहपुर बिलौज गांव के पास नहर पर ले गया. आरोप है कि वहां उसने सबसे पहले अपने बड़े बेटे सम्राट को नहर में धक्का दिया और फिर छोटे बेटे युग को गोद में लेकर खुद भी मौत की छलांग लगा दी.
5 किलोमीटर का सफर और 12 घंटे का संघर्ष
नहर का बहाव तेज था और गहराई भी 12 से 14 फीट के करीब थी. सम्राट को तैराकी नहीं आती थी, लेकिन कुदरत उसे बचाना चाहती थी. पानी की लहरों के साथ वह करीब 5 किलोमीटर दूर तक बहता चला गया. पलवल के मांदकल गांव के पास नहर के बीचों-बीच एक कटे हुए पेड़ की कुछ डालियां पानी में डूबी हुई थीं. बहते हुए सम्राट ने उन डालियों को मजबूती से पकड़ लिया. वह पूरी रात ठंड और अंधेरे के बीच उसी डाल के सहारे लटका रहा. रात भर वह पानी के बीच मौत से लड़ता रहा, लेकिन उसने हार नहीं मानी.
फरिश्ता बनकर आए गांव के दो युवक
सोमवार सुबह करीब सवा पांच बजे जब मांदकल गांव के दो युवक राजेंद्र और उसका भाई नहर के किनारे टहलने निकले तो उन्हें पानी के बीच से किसी की हल्की आवाज सुनाई दी. जब उन्होंने गौर से देखा तो उनके होश उड़ गए. नहर के बीचों-बीच एक छोटा बच्चा पेड़ की टहनी से चिपका हुआ था. राजेंद्र ने बिना वक्त गंवाए नहर में छलांग लगा दी और बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला. राजेंद्र के मुताबिक, जब सम्राट को बाहर निकाला गया तो वह बुरी तरह कांप रहा था और ठंड के मारे बोल भी नहीं पा रहा था.
सुरक्षित है सम्राट, पिता और छोटे भाई की तलाश जारी
बच्चे को बचाने के बाद उसे घर ले जाया गया जहां उसे सूखे कपड़े पहनाए गए, कंबल में लपेटा गया और चाय-बिस्कुट खिलाकर सामान्य किया गया. थोड़ा रिलैक्स होने के बाद सम्राट ने अपने घर वालों का नंबर दिया जिसके बाद पुलिस और परिजनों को सूचित किया गया. फिलहाल सम्राट पूरी तरह सुरक्षित है और अपने परिवार के पास है. हालांकि, इस दर्दनाक घटना का दूसरा पहलू अभी भी अंधेरे में है. सम्राट के पिता भगवत दयाल और उसका 5 साल का छोटा भाई युग अभी भी लापता हैं. पुलिस और SDRF की टीमें गोताखोरों की मदद से नहर में सघन सर्च ऑपरेशन चला रही हैं, लेकिन अभी तक उनका कोई सुराग नहीं मिल सका है.
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