कुरुक्षेत्र अस्पताल में आखिर ऐसा क्या हुआ... रेनू भाटिया के बयान के बाद नर्सों ने ठप कर दिया काम, जानें क्या है पूरा मामला

कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में नाबालिग से कथित दुष्कर्म के मामले के बाद विवाद और गहरा गया है. जांच के लिए पहुंचीं महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया के बयान के बाद नर्सिंग स्टाफ ने काम बंद कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. जानिए आखिर ऐसा क्या हुआ कि अस्पताल में हंगामा मच गया.

रेनू भाटिया के बयान से भड़कीं नर्सें
रेनू भाटिया के बयान से भड़कीं नर्सें

पवन राठी

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Kurukshetra Nurse Protest: कुरुक्षेत्र के लोकनायक जयप्रकाश (LNJP) सिविल अस्पताल में 15 वर्षीय लड़की से रेप के मामले बवाल हो गया है. यहां एक रिटायर्ड डॉक्टर की शर्मनाक करतूत के बाद शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े सियासी और प्रशासनिक संग्राम में बदल गया है. अस्पताल में घटी इस खौफनाक वारदात के बाद सोमवार को राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया अस्पताल में पहुंची थी. उन्होंने अस्पताल के स्टाफ से पूछताछ की.  इस दौरान वे अस्पताल प्रशासन के ढीले रवैये औरस्टाफ नर्सें की कथित लापरवाही को देखकर भड़क उठीं. अब रेनू भाटिया के बर्ताव और भाषा को लेकर अस्पताल की स्टाफ नर्सें खुलकर मैदान में उतर आई हैं. इसे नर्सों  ने अस्पताल में भारी हंगामा और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है.

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नर्सिंग स्टाफ ने ठप किया काम, मांगी माफी

नर्सों का आरोप है कि रेनू भाटिया ने उनके साथ बेहद अभद्र व्यवहार किया और बिना किसी जांच के पूरी नर्सिंग टीम पर लापरवाही और आरोपी डॉक्टर के साथ मिलीभगत का लांछन लगा दिया. ऐसे में नर्सों ने अस्पताल में दो घंटे की 'पेन-डाउन' यानी काम बंद कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया और चेतावनी दी है कि जब तक रेनू भाटिया अपने शब्दों के लिए माफी नहीं मांगतीं, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा. सीनियर नर्सिंग ऑफिसर गुरमीत कौर का कहना है, "बिना किसी निष्पक्ष जांच के हमारी आत्मा को ठेस पहुंचाई गई है. हम दिन-रात मरीजों की सेवा करते हैं और कोई भी घटना होने पर सीधे नर्सों को बलि का बकरा बना दिया जाता है."

रेनू भाटिया ऐसा क्या कहा था?

इस पूरे विवाद की शुरुआत सोमवार के घटनाक्रम से हुई. रेप की घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया खुद पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए एलएनजेपी अस्पताल पहुंची थीं. जब रेनू भाटिया ने वहां मौजूद स्टाफ से पूछताछ की तो वे अस्पताल प्रशासन के ढीले रवैये और लापरवाही को देखकर भड़क उठीं. रेनू भाटिया ने मौके पर ही बड़ी कार्रवाई के आदेश देते हुए तीन महिला स्टाफ नर्सों को तुरंत सस्पेंड करने और अस्पताल के प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर (PMO) को उनके पद से हटाने की सिफारिश उच्च अधिकारियों से कर दी.

भाटिया ने कहा था,''आप कैसे छोड़ सकते हो एक डॉक्टर को यंग लड़की के साथ. कैसे छोड़ सकते हो? आपकी बेटी है. उसे 15 मिनट के लिए छोड़ोंगे एक कमने में किसी साथ. इसके बाद उन्होंने कहा सरकारी नौकरी का मजाक बनाया आप लोगों ने. मौका दिया आपने उस डॉ. को इसका मतलब आप लोगों की मिलीभगत है. सब नर्स की मिलीभगत है. उन्हाेंने कहा कि अस्पताल के अंदर इतनी बड़ी वारदात हो जाती है और वहां ड्यूटी पर तैनात स्टाफ को भनक तक नहीं लगती? यह सीधे तौर पर लापरवाही और मिलीभगत का मामला है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

अखिर क्या है वो घिनौना कांड, जिससे दहला कुरुक्षेत्र?

आपको बता दें कि इस पूरे भारी बवाल के पीछे की वजह अस्पताल के ही एक 62 वर्षीय कंसलटेंट (रिटायर्ड एसएमओ) डॉक्टर शैलेंद्र कुमार शैली की घिनौनी करतूत है. पुलिस के मुताबिक, बीते दिनों एक शख्स अपनी 15 साल की नाबालिग बेटी के इलाज के लिए एलएनजेपी अस्पताल आया था. आरोप है कि डॉक्टर शैली ने मौका पाकर नाबालिग बच्ची का रेप किया था. इसके बाद पिता की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए कुरुक्षेत्र पुलिस ने आरोपी डॉक्टर के खिलाफ पोक्सो (POCSO) एक्ट और एससी/एसटी एक्ट के तहत संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है. सरकार ने भी आरोपी डॉक्टर की सेवाओं को तुरंत प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है.

कौन हैं रेणु भाटिया?

रेणु भाटिया हरियाणा की वरिष्ठ भाजपा नेता और वर्तमान में हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष हैं. उनका परिवार लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और बीजेपी से जुड़ा रहा है. उन्होंने वर्ष 2000 में फरीदाबाद से भाजपा के टिकट पर पार्षद का चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की. इसके बाद भाजपा के समर्थन से डिप्टी मेयर भी रहीं. वर्ष 2010 में पार्षद का चुनाव हारने के बावजूद उन्होंने संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई और हरियाणा भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता भी बनीं. साल 2017 में तत्कालीन मनोहर लाल खट्टर सरकार ने उन्हें हरियाणा राज्य महिला आयोग का सदस्य नियुक्त किया, जबकि 17 नवंबर 2022 को उन्हें आयोग का अध्यक्ष बनाया गया. 2024 में सरकार बदलने के बाद भी वे अपने पद पर बनी रहीं और बाद में राज्यपाल की मंजूरी से उनके कार्यकाल का विस्तार भी किया गया. महिला सुरक्षा, अधिकारों और उत्पीड़न से जुड़े मामलों में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण वे अक्सर चर्चा में रहती हैं.

 

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