पश्चिम बंगाल में जब से टीएमसी की विदाई और सत्ता परिवर्तन हुआ है, तब से ही वहां कि सियासी गलियारों में भूचाल आया हुआ है. पहले विधायकों का बागी होना और फिर अब सांसदों ने ममता बनर्जी के अभेद्य किले की दीवारों पर ऐसा चोट किया है, जिससे TMC और ममता बनर्जी दोनों ही पूरी तरह हिल गए है. कलकत्ता से लेकर दिल्ली तक बस एक ही बात की चर्चा है कि कौन-कौन ममता बनर्जी को झटका देने वाला है.
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इसी बीच बागी सांसद गुट की अगुवाई कर रही काकोली घोष दस्तीदार के दावे और TMC नेता महुआ मोइत्रा के पलटवार ने पश्चिम बंगाल की सियासी गलियारों को गरमा दिया है. इन दोनों के बीच में कोई और नहीं बल्कि बहरामपुर से TMC सांसद यूसुफ पठान है. एक ओर काकोली घोष ने यूसुफ पठान का नाम बागी लिस्ट में शामिल होने की बात कही तो महुआ मोइत्रा ने जमकर तीखे हमले कर दिए. अब इन्हीं हालात के बीच सवाल खड़े होने लगा है कि आखिर युसूफ पठान किसके साथ खड़े है? आइए विस्तार से जानिए पूरी कहानी.
'युसूफ पठान हमारे साथ'- काकोली
दरअसल यह राजनीतिक पारा तब हाई हुआ जब ममता बनर्जी इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंची और इसी बीच सांसदों के बागी होने की खबरें सामने आने लगी. ममता बनर्जी की पुरानी साथी और करीबी काकोली घोष दस्तीदार ने कुछ दिन पहले ही संगठन के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था और अब वह खुलकर बागी टीम का नेतृत्व कर रही है. काकोली घोष ने सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा जिसमें उन्होंने सदन में अलग बैठने और NDA को समर्थन देने की बात कही.
काकोली घोष ने दावा किया है कि TMC के 28 में से 20 सांसद उनके साथ है और जरूरत पड़ने पर वह नाम तक बता देंगी. इसी कड़ी में उन्होंने कहा कि पूर्व क्रिकेटर और TMC सांसद युसूफ पठान भी उनके बागी गुट में शामिल हैं और NDA को समर्थन दे रहे है. काकोली घोष ने जैसे यह बयान दिया कि TMC में उथल-पुथल शुरू हो गई और राजनीतिक पारा काफी हाई हो गया.
'थोड़ी हिम्मत तो रखो...'- महुआ
इस बात को लेकर TMC की फायर ब्रांड नेता और सांसद महुआ मोइत्रा ने युसूफ पठान पर जमकर हमला बोला. महुआ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यूसुफ पठान और अमित शाह को टैग करते हुए लिखा कि, युसूफ पठान आज दिल्ली जा रहे है, क्योंकि अमित शाह ने कॉल किया है? थोड़ी हिम्मत तो रखो. आपने भारत के लिए खेला है. हमारे जिले ने आपको बड़े मार्जिन से जिताया है. थोड़ी शर्म करो और रीढ़ की हड्डी(आत्मसम्मान) मजबूत रखो.
महुआ मोइत्रा ने अपने दूसरे पोस्ट में तंज भरे शब्दों में लिखा कि, 2024 लोकसभा चुनाव में सभी सांसदों ने TMC के टिकट पर चुनाव जीता था. जनादेश NDA के लिए नहीं था. वे सभी लालची, मतलबी और डरपोक गद्दार बीजेपी जॉइन कर सकते है लेकिन उससे पहले अपनी सीट से इस्तीफा दे और फिर बीजेपी के टिकट से चुनाव लड़े. देखते है कितने बड़े हीरो है आप. महुआ मोइत्रा के युसूफ पठान पर तंज कसने के बाद सियासी सस्पेंस और बढ़ गया है.
आखिर किसके साथ है युसूफ पठान?
यूसुफ पठान के राजनीतिक एंट्री की बात करें तो साल 2024 में ममता बनर्जी ही उन्हें राजनीति में लेकर आई थी. ममता बनर्जी ने बहरामपुर सीट से कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ उन्हें मैदान में उतारा था. अब जब ममता बनर्जी और TMC दोनों ही संकट में दिख रहे तो यह सवाल उठने लगा है कि आखिर युसूफ पठान किसके साथ है.
चुनाव हारने के बाद से ही TMC की अंदरूनी कलह सामने आने लगी है, जहां पहले विधायक और फिर सांसद बागी हो गए है. लेकिन युसूफ पठान ने चुप्पी साध रखी है, जिसने की TMC खेमे की धड़कने बढ़ा रखी है. एक बात तो तय है कि युसूफ जानते है कि कांग्रेस के कद्दावर नेता अधीर रंजन चौधरी को हराने के लिए ममता ने उनकी काफी मदद की थी, लेकिन उनकी चुप्पी सवाल खड़े कर रही है.
हालांकि चुनाव हारने के बाद यह खबरें आई थी कि ममता बनर्जी को सांसद बनाने के लिए यूसुफ पठान को अपनी सीट से इस्तीफा देने के लिए मनाने की कोशिश की गई थी और इसके लिए सौरव गांगुली की भी मदद ली गई. लेकिन उन्होंने इस्तीफा देने से मना कर दिया और तब राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई थी. तब युसूफ पठान ने खुद वीडियो जारी कर कहा था कि उनसे इस्तीफा देने की बात नहीं कही गई है. वहीं सौरव गांगुली ने भी तमाम दावों को खारिज कर दिया था.
युसूफ पठान क्यों दे सकते हैं बीजेपी का साथ?
अब जब मामला इतना चर्चा में है तो राजनीतिक गलियारों में एक सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर ऐसा क्या है कि युसूफ पठान बीजेपी का साथ दे सकते हैं? तो इसके जवाब में कहा जा रहा है कि युसूफ गुजरात से ताल्लुक रखते है और इसलिए वे बागी गुट के साथ बीजेपी का समर्थन कर सकते है. हालांकि अभी तक किसी भी बात की पुष्टि नहीं है लेकिन जिस तरह काकोली घोष ने दावा किया, अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हुई है कि युसूफ पठान किसके साथ रहते है.
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