मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Elections) को लेकर सियासी गहमागहमी चरम पर पहुंच गई है. बीजेपी की ओर से तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारने के बाद से मुकाबला बेहद रोचक हो गया है. इस बीच, कांग्रेस को अपने खेमे में क्रॉस वोटिंग (Cross Voting) का डर सताने लगा है. यही वजह है कि कांग्रेस ने अपने सभी 62 विधायकों की 'बाड़ाबंदी' शुरू कर दी है और उन्हें मध्य प्रदेश से बाहर कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक भेजने की तैयारी कर ली है.
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बीजेपी के दांव से दिलचस्प हुआ राज्यसभा चुनाव
मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सोमवार को कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन और बीजेपी के महेश केवट ने अपना नामांकन दाखिल किया. बीजेपी ने पहले तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को अपना प्रत्याशी घोषित किया था, लेकिन तीसरी सीट जो कांग्रेस के खाते की मानी जा रही थी, उस पर बीजेपी ने महेश केवट को तीसरे उम्मीदवार के तौर पर उतारकर मुकाबला दिलचस्प और त्रिकोणीय बना दिया है. इसी के बाद से कांग्रेस में खलबली मची हुई है.
जहां कांग्रेस का राज्य, वहीं विधायक सुरक्षित: उमंग सिंघार
इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बीच मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा, "निश्चित तौर से जहां कांग्रेस का राज्य है, हम विधायकों को वहां ले जाएंगे, वहीं वे सुरक्षित रहेंगे". उमंग सिंघार के बंगले पर देर रात बैठकों का दौर चला, जिसके बाद सभी विधायक अपनी-अपनी गाड़ियों से एयरपोर्ट के लिए रवाना होने की तैयारी में जुट गए.
नेता प्रतिपक्ष ने बीजेपी पर हॉर्स ट्रेडिंग (खरीद-फरोख्त) का आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी की आदत लोकतंत्र की हत्या करने की है. उन्होंने दावा किया कि हमारे सभी 62 विधायक एकजुट हैं और कांग्रेस उम्मीदवार को ही वोट करेंगे.
कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने क्या कहा
कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक बाबू जंडेल ने भी बीजेपी पर करारा हमला बोला. उन्होंने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा, "मैं 2018 में भी विधायक था तब मुझे 40 करोड़ रुपये और मंत्री पद का ऑफर आया था, लेकिन मेरा जमीर जिंदा है और मैं नहीं गया. आज ये 10 करोड़ का ऑफर दे रहे हैं तो मैं क्यों जाऊंगा?". उन्होंने यह भी कहा कि फोन आ रहे हैं और रिश्तेदारों के माध्यम से भी संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है. जंडेल ने बताया कि वे शांति के लिए 8 दिनों तक अपना मोबाइल फोन भी बंद रखेंगे.
सिर्फ परिवार को साथ जाने की इजाजत
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार एक बार फिर कांग्रेस के लिए संकटमोचन की भूमिका निभा सकते हैं. कांग्रेस विधायकों को कर्नाटक के एक रिसॉर्ट में रखा जाएगा, जहां उनके साथ आलाकमान द्वारा नियुक्त दो ऑब्जर्वर भी मौजूद रहेंगे.
पार्टी ने कड़े नियम लागू किए हैं, जिसके तहत विधायकों को केवल अपने परिवार के सदस्यों को साथ ले जाने की अनुमति दी गई है, उनके स्टाफ (PA या सुरक्षाकर्मी) को साथ जाने की इजाजत नहीं है. बताया जा रहा है कि 17 जून को होने वाली वोटिंग से ठीक एक दिन पहले यानी 16 जून को सभी विधायकों को वापस भोपाल लाया जाएगा. वहीं दूसरी तरफ, बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं है.
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