36 साल की सबीना खातून पश्चिम बंगाल के हकीमपुर बॉर्डर के चेकपॉइंट के पास मायूस होकर, आंखों में लबालब आंसू लिए अपने दो बच्चों को कसकर पकड़े हुए बैठी हुई है. सालों पहले भारत आई सबीना को भारत इतना पसंद आया है कि उन्होंने यहां के ही रहने वाले शख्स से निकाह किया, फिर बाल-बच्चे भी हुए और काफी अच्छे से दिन कट रहे थे. लेकिन उन्होंने ऐसा सपने में भी नहीं सोचा था कि यह दिन देखना होगा. अब सबीना खातून बस दुआं कर रही है कि उन्हें बांग्लादेश सरकार अपना ले, क्योंकि अब भारत ने उन्हें पूरी तरह रिजेक्ट कर दिया....
ADVERTISEMENT
यह पश्चिम बंगाल के हकीमपुर बॉर्डर पर जमा हुए एक परिवार की कहानी है और ऐसे ही कई परिवार अभी भी वहां मौजूद है. दरअसल, पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद सुभेंदु अधिकारी लगातार एक्शन में दिखाई दे रहे है. सुभेंदु अधिकारी के 3D नीति यानी Detect, Delete और Deport अपनाने के बाद अब बांग्लादेश बॉर्डरों के चेकपोस्ट पर भीड़ जमा होने लगी है. घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने के लिए बनाई गई इस स्थिति के तहत राज्य के हर जिले में होल्डिंग सेंटर भी बनाए जा रहे है, जहां इन्हें रखा जा रहा है और फिर सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें वापस अपने देश में भेज दिया जाएगा. ग्राउंड रिपोर्ट में विस्तार से जानिए सबीना की दर्दनाक कहानी.
'पिता भारत में, मां बच्चों संग चली बांग्लादेश'
बांग्लादेश के सतखीरा की रहने वाली सबीना खातून(36) कई साल पहले भारत में दाखिल हुई थी. कोई रास्ता ना मिलता देख उसने गैर-कानूनी तरीका अपनाया और फिर दलाल की मदद से वह भारत चली आई. सबीना को भारत काफी पसंद आया और वह यहां रहकर जिंदगी जीने लगी. इसी बीच सबीना को एक भारतीय युवक से प्यार हो गया, जिसके बाद दोनों में शादी कर ली. धीरे-धीरे सबीना का परिवार बढ़ा और अपने पति के पहचान पत्र की मदद से उसने कोलकाता के RG KAR अस्पताल में अपने बच्चों को जन्म दिया.
परिवार काफी खुशी से अपना दिन बीता रहे थे और सबीना भी पति और बच्चों का प्यार पाकर हंसी-खुशी जिंदगी जी रही थी. लेकिन इसी बीच सुभेंदु सरकार के आदेश ने उनकी जिंदगी में मानो भूचाल ला दिया है, क्योंकि सबीना के पास कोई भी दस्तावेज मौजूद नहीं है जिससे वह खुद को भारतीय साबित कर सकें. अब सरकार के होल्डिंग सेंटर के डर से वह अपने बच्चों के साथ हकीमपुर बॉर्डर पहुंच गई है. सबीना का पति भारतीय है इसलिए वह तो उनके साथ नहीं जा सकता. फिलहाल सबीना अपने बच्चों के साथ मायूस होकर इंतजार कर रही है.
'क्या मेरे बच्चे पिता से मिल पाएंगे दोबारा'
जब हमारे संवाददाता ने सबीना से बातचीत की, तब वह काफी उदास थी और अपने बच्चों को कसकर पकड़ रखा था. सबीना ने कहा कि, सतखीरा में मेरा परिवार है, लेकिन मुझे नहीं पता कि हम दोबारा कैसे और कब मिल पाएंगे. वहीं अपने पति को याद करते हुए सबीना और दर्दभरी लफ्जों में कहती है कि, काश हम फिर मिलते. सबीना अपने बच्चों की ओर देखती है और आंखों में आंसू भर जाते हैं और तब वह सवाल करती है कि, क्या मेरे बच्चे अपने पिता से दोबारा कभी मिल पाएंगे?
सबीना की तरह ही लोगों में भरा है गम
सबीना की तरह ही वहां कई परिवार मौजूद है जो किसी ना किसी वजह से भारत तो आए थे, लेकिन अब उनकी दुनिया पूरी तरह उजड़ गई है. जैसे ही शाम होती है वहां का माहौल काफी गमगीन होने लगता है और परिवार के लोग एक-दूसरे को देखते रहते है.
क्या है बांग्लादेश वापसी की प्रक्रिया?
सरकार के ऐलान के बाद अचानक भारी संख्या में लोग हकीमपुर बॉर्डर की ओर पहुंचने लगे. इस भीड़ को देखते हुए BSF ने व्यवस्था बनाई और लोगों को समूह में बांटकर उनके पहचान पत्रों की जांच कर रहे है. शुरुआती जांच के बाद उनलोगों के बायोमेट्रिक भी लिए जा रहे है ताकि डिजिटल रिकॉर्ड में उनकी सारी जानकारी मौजूद रहें.
साथ ही जैसे ही भारत की ओर से जांच कर ली जा रही है तो उन्हें बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) को भेज दिया जा रहा है. यहां सारी जानकारियों की बारीकी से जांच और मिलान होती है और सब सही पाने के बाद ही लोगों को बांग्लादेश की धरती पर कदम रखने को मिलता है. सोमवार को लगभग 50 लोगों का पहला जत्था बांग्लादेश भेज दिया गया है और वहीं और लोगों को भेजने की तैयारी अपने अंतिम चरण में है.
ADVERTISEMENT


