Rahul Akhilesh on PM Modi Petrol Diesel Gold Appeal:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को हैदराबाद में एक रैली से 7 बड़ी अपील की. उन्होंने देशवासियों को कम फ्यूल उपयोग, वर्क फ्रॉम होम, विदेश की जगह देश में ही घूमने और सोने की खरीद को लेकर बड़ा बयान दिया, जिसके बाद विपक्ष ने उन्हें घेर लिया है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे सरकार की नाकामी बताया तो वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा को ही देश का एकमात्र संकट बता दिया. आइए विस्तार से जानते है पूरी कहानी.
ADVERTISEMENT
'ये उपदेश नहीं...'- राहुल गांधी का तंज
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट करते हुए पीएम मोदी पर तंज कसा है. उन्होंने पोस्ट में लिखा कि, 'मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे- सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो. ये उपदेश नहीं- ये नाकामी के सबूत हैं.'
उन्होंने आगे लिखा कि, '12 साल में देश को इस मुकाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है- क्या खरीदे, क्या न खरीदे, कहां जाए, कहां न जाए. हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि खुद जवाबदेही से बच निकलें. देश चलाना अब Compromised PM के बस की बात नहीं.'
'चुनाव खत्म होते ही, 'संकट' याद आ गया'
वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी पीएम के अपील पर कटाक्ष किया है. उन्होंने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X एक लंबी-चौड़ी पोस्ट कर लिखा कि, चुनाव खत्म होते ही, 'संकट' याद आ गया. दरअसल देश के लिए 'संकट' सिर्फ एक है और उसका नाम है : 'भाजपा'. इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ीं तो 'पंच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था' कैसे बनेगी? लगता है भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह छूट गयी है. डॉलर आसमान छू रहा है और देश का रुपया पातालोन्मुखी हो गया है.
उन्होंने आगे लिखा कि, सोना न खरीदने की अपील जनता से नहीं, भाजपाइयों को अपने भ्रष्ट लोगों से करनी चाहिए क्योंकि जनता तो वैसे भी 1.5 लाख तोले का सोना नहीं खरीद पा रही है. भाजपाई ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं. हमारी बात गलत लग रही हो तो 'लखनऊ से लेकर गोरखपुर' तक पता कर लीजिए या 'अहमदाबाद से लेकर गुवाहाटी' तक. वैसे सारी पाबंदियां चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं है? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हजारों चार्टर हवाई यात्राएं करीं वो क्या पानी से उड़ रहीं थीं? वो क्या होटलों में नहीं ठहर रहे थे या सिलेंडर की फोटो लगाकर खाना बनाकर खा रहे थे? भाजपाइयों ने चुनाव में ही वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से ही प्रचार क्यों नहीं किया? सारी पाबंदियाँ जनता के लिए ही हैं क्या?
अखिलेश यादव यहीं नहीं रुके और उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि, अगर सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो भाजपाई अपनी नाकामी स्वीकार करें, देश को बर्बाद न करें. वैसे भी इन हालातों की असली वजह विदेश नीति के मामले में देश की परंपरागत 'गुट निरपेक्षता' की नीति से भाजपा सरकार का हटकर कुछ गुटों के पीछे, कुछ खास वजहों और दबावों की वजह से चलना है. इसका खामियाजा देश की जनता को महंगाई, बेरोजगारी, बेकारी और मंदी की मार के रूप में भुगतना पड़ रहा है. किसान-मज़दूर से लेकर हर युवा, हर गृहिणी, नौकरीपेशा, पेशेवर, कारोबारी मतलब हर कोई इसकी चपेट में आ गया है. सच तो ये है कि भाजपा विदेश नीति और गृह नीति दोनों में फेल हो गयी है. ये अपील भाजपा सरकार की अपनी असफलता की स्वीकारोक्ति है. दरअसल वोट मिलते ही भाजपा का खोट सामने आ गया.
वो आगे लिखते है कि, भाजपाइयों ने चुनावी घपलों से राजनीति को प्रदूषित कर दिया है. नफरत फैला कर समाज के सौहार्द को बर्बाद कर दिया है. अपने चाल-चलन से भाजपाइयों ने संस्कृति-संस्कार को कलुषित कर दिया है. साधु-संतो पर प्रहार और आरोप लगाकर धर्म तक को नहीं छोड़ा है और अब अर्थव्यवस्था का रोना रो रहे हैं. इस तरह तो सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक हर क्षेत्र में भाजपा ने देश का बंटाधार कर दिया है. इस अपील के बाद देश की जनता में अचानक आक्रोश का जो उबाल आया है, उसका प्रबंधन भाजपा किसी चुनावी-जुगाड़ की तरह नहीं कर पाएगी, अब भाजपा हमेशा के लिए जाएगी.
पीएम मोदी ने क्या कुछ की थी अपील?
पीएम मोदी ने हैदराबाद के तेलंगाना में रैली को संबोधित करते हुए 7 बड़ी अपील की पीएम ने कहा कि पड़ोस में चल रहे युद्ध के कारण पेट्रोल और खाद की कीमतों में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है. जब सप्लाई चेन पर दबाव पड़ता है तो मुश्किलें बढ़ जाती है, भले ही संकट से निपटने के लिए सरकार कई कदम उठा रही हो. इसलिए देश को ध्यान में रखते हुए हमें कुछ संकल्प लेने होंगे.
पीएम ने आगे कहा कि, जिन शहरों में मेट्रो रेल सेवाएं उपलब्ध है वहां पर खुद की गाड़ी से जाने के बजाय मेट्रो का उपयोग करें. और अगर गाड़ी से ही संभव है तो कारपूलिंग करें ताकि इससे लोगों को भी फायदा हो. उन्होंने कहा कि कोरोना के वक्त हमने घर से काम करना, वर्चुअल मीटिंग करना, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और कई अन्य तरीके इजात किए थे. आज की जरूरत है कि हम उन तरीकों को फिर से अपनाएं.
इसके अलावा पीएम मोदी ने सोने की खरीद को लेकर भी बड़ी अपील की है. उन्होंने कहा कि सोने की आयात में विदेशी मुद्रा ज्यादा खर्च होती है. इसलिए हमें संकल्प लेना चाहिए की अगले एक साल तक कोई भी कार्यक्रम हो या आयोजन उसमें हम सोना नहीं खरीदेंगे.
ADVERTISEMENT


