NEET Paper Leak: 'इस्तीफा दो नहीं तो दिल्ली ठप करेंगे', विनोद जाखड़ का शिक्षा मंत्री को 10 दिन का अल्टीमेटम

NEET पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर है. राजस्थान के सीकर में हुए एक बड़े विरोध मार्च के दौरान छात्र नेता विनोद जाखड़ ने सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने मांग की है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, नहीं तो हजारों छात्रों के साथ दिल्ली कूच किया जाएगा.

vinod jakhar
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न्यूज तक डेस्क

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NEET पेपर लीक विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है और अब यह आंदोलन एक बड़े संग्राम का रूप लेता जा रहा है. राजस्थान के सीकर में पेपर लीक के खिलाफ और पीड़ित छात्रों को न्याय दिलाने के लिए युवाओं ने एक विशाल आक्रोश मार्च निकाला. इस प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे छात्र नेता विनोद जाखड़ ने केंद्र सरकार और एनटीए (NTA) के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक बेहद कड़ा अल्टीमेटम दे दिया है.

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10 दिन में इस्तीफा नहीं तो दिल्ली कूच

विनोद जाखड़ ने मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तुरंत इस्तीफे की मांग की है. उन्होंने दो टूक शब्दों में सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, "मैं सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम देता हूं. अगर 10 दिनों के भीतर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं लिया गया, तो हम हजारों छात्र-छात्राओं की फौज लेकर दिल्ली की तरफ कूच करेंगे, आंदोलन करेंगे और शिक्षा मंत्री के घर का घेराव करेंगे."

"छात्रों की मौत नहीं, यह सरकारी हत्याएं हैं"

पेपर लीक के मानसिक तनाव के कारण सुसाइड करने वाले छात्रों का मुद्दा उठाते हुए जाखड़ ने भावुक और तीखे शब्दों में कहा कि देश का नौजवान आज सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर है. उन्होंने कहा, "यह सिर्फ मौतें नहीं हैं, बल्कि आत्महत्याएं हैं जिसके लिए यह पेपर लीक जिम्मेदार है. पिछले 10 सालों में 89 बार पेपर लीक हुए हैं और 4 बार नीट का पेपर लीक होना यह साबित करता है कि सरकारी तंत्र पूरी तरह विफल हो चुका है." उन्होंने मांग की कि पीड़ित छात्र प्रदीप मेघवाल और अन्य मृतक छात्रों के परिवारों को 5-5 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि दी जाए और उनके भाई-बहनों को मुफ्त शिक्षा मुहैया कराई जाए.

NTA को बताया भ्रष्टाचार का अड्डा

छात्र नेता ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर भी तीखा हमला बोला और इसे पूरी तरह से असफल करार दिया. उन्होंने कहा कि NTA अब पूरी तरह भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुकी है. छात्रों की मांग है कि पेपर लीक को रोकने के लिए देश में सख्त कानून बने और किसी प्राइवेट एजेंसी के बजाय एक जिम्मेदार और पारदर्शी सरकारी एजेंसी के माध्यम से परीक्षाएं आयोजित करवाई जाएं.

 

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