राजस्थान के पाली जिले के खिवाड़ा इलाके से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां आस्था और अंधविश्वास की आड़ में एक परिवार को न केवल आर्थिक रूप से कंगाल कर दिया गया, बल्कि उनकी मासूम बेटी का भी अपहरण कर लिया गया. आरोप है कि एक तांत्रिक (भोपा) और उसकी महिला सहयोगी ने मिलकर एक सोची-समझी साजिश रची और तंत्र-मंत्र के बहाने घर में घुसकर जेवरात, नकदी और घर की जवान बेटी को लेकर रफूचक्कर हो गए.
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तांत्रिक गिरोह की साजिश और आधी रात का कांड
खिवाड़ा इलाके में रहने वाले एक परिवार के लिए 27 अप्रैल की रात किसी बुरे सपने जैसी साबित हुई. पीड़ित परिवार का आरोप है कि रात के करीब 1:00 बजे एक कथित तांत्रिक उनके घर में दाखिल हुआ. उसने परिवार के सदस्यों को अपनी बातों के जाल में फंसाया और कुछ ही देर बाद वह घर की 8वीं कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिग बेटी को अपने साथ लेकर फरार हो गया. सुबह जब घर वालों की आंख खुली, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. घर से न केवल बेटी गायब थी, बल्कि अलमारी में रखे 8 तोला सोना, करीब ढाई किलो चांदी के जेवरात और डेढ़ लाख रुपये की नकदी भी गायब थी.
ऐसे बनाया जाता था आसान शिकार
इस पूरे खेल के पीछे एक महिला सहयोगी (भोपी) का हाथ बताया जा रहा है, जो गांव में ऐसे घरों की रेकी करती थी जहां पुरुष सदस्य बाहर नौकरी के सिलसिले में रहते थे. पीड़ित परिवार के मुताबिक, अयोध्या देवी नाम की यह महिला पहले घर आती थी और महिलाओं को डराती थी कि उनके घर पर भूत-प्रेत या किसी डाकन का साया है. जब डरी हुई महिलाएं इससे बचने का उपाय पूछती, तो वह अपने साथी तांत्रिक को बुलाने की सलाह देती थी. इस मामले में भी बीमार पत्नी का इलाज कराने के नाम पर तांत्रिक को घर बुलाया गया था, जिसने पहले बच्ची का माइंड वॉश किया और फिर मौका पाकर पूरी वारदात को अंजाम दिया.
'पांच बेटियां पहले भी हो चुकी हैं गायब'
पीड़ित पिता शैतान राम देवासी ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है. उनके अनुसार, यह गिरोह अब तक गांव की 5-6 लड़कियों को इसी तरह अगवा कर चुका है. गिरोह का मुख्य निशाना वे परिवार होते हैं जिनके पुरुष सदस्य गुजरात या मुंबई जैसे शहरों में काम करते हैं और घर में केवल महिलाएं और बच्चे रहते हैं. आरोप है कि यह गिरोह लड़कियों को बहला-फुसलाकर ले जाता है और उन्हें गलत गतिविधियों में धकेलता है. ग्रामीणों में इस तांत्रिक गिरोह का इतना खौफ है कि कई लोग डर के मारे पुलिस के पास जाने से भी कतराते हैं.
पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
हैरानी की बात यह है कि जब पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लेकर स्थानीय थाने पहुंचा, तो उन्हें राहत मिलने के बजाय दुत्कार मिली. परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उनकी एफआईआर दर्ज करने के बजाय उन्हें डांटकर भगा दिया और केवल गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने का दबाव बनाया. पुलिस की इस कथित लापरवाही और सुस्ती से नाराज होकर अब पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने एसपी कार्यालय के बाहर डेरा डाल दिया है. वे मांग कर रहे हैं कि उनकी बेटी को जल्द से जल्द बरामद किया जाए और इस तांत्रिक गैंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो.
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