'झाड़ू-पोछा किया, खाना बनाया पर...' सालों बाद आलोक मौर्या ने पत्नी ADM ज्योति मौर्या के साथ रिश्तों पर कई राज खोले !

सफाई कर्मी से लेकर पत्नी को एसडीएम बनाने और फिर सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले आलोक मौर्य ने सालों बाद तोड़ी चुप्पी. बताया- कोर्ट में क्या चल रहा है और आगे का क्या है प्लान है?

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आलोक मौर्या से यूपी तक ने खास बातचीत की.

गौरांशी श्रीवास्तव

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न्यूज़ हाइलाइट्स

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आलोक मौर्या ने कहा- विवाद अपनी जगह है, लेकिन ज्योति मौर्य के साथ बिताए पल अपनी जगह.

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प्रयागराज के जनपद न्यायालय में चल रही 'मीडिएशन' की प्रक्रिया.

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पिछले 28 दिनों में आलोक मौर्या के चैनल को 80 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिले हैं.

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आलोक मौर्या ने UP तक से खास बातचीत में भविष्य की योजनाएं भी बताई.

साल 2023 में देश की सबसे चर्चित खबरों में से एक 'आलोक मौर्य और एसडीएम ज्योति मौर्य विवाद' के मुख्य किरदार आलोक मौर्य एक बार फिर सुर्खियों में हैं. लंबे समय की खामोशी और सोशल मीडिया से दूरी बनाने के बाद आलोक मौर्य ने कैमरे पर आकर अपने दिल के सारे राज खोल दिए हैं. 'यूपी तक' को दिए एक बेहद विस्तृत इंटरव्यू में आलोक ने अपने अतीत के संघर्ष, वर्तमान की कानूनी स्थिति और भविष्य की राजनीतिक व सामाजिक योजनाओं पर खुलकर बात की है.

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2010 की वो शादी और इलाहाबाद का स्ट्रगल

अपनी शादी के शुरुआती दिनों को याद करते हुए आलोक ने बताया कि साल 2009 में उनकी पंचायती राज विभाग में सफाई कर्मचारी के रूप में सरकारी नौकरी लगी थी और 2010 में उनकी शादी ज्योति मौर्य से हुई. आलोक एक सामान्य ग्रामीण पृष्ठभूमि (बछल गांव, आजमगढ़) से आते हैं. उन्होंने बताया, "हमारे समाज में माना जाता है कि छोटी बहू घर आकर खाना बनाएगी और सास-ससुर की सेवा करेगी. लेकिन जब मेरे पिता ने ज्योति से पूछा कि आगे क्या करना चाहती हो, तो उसने कहा कि पढ़ना चाहती है. मेरे माता-पिता ने उसका साथ दिया और अगले ही दिन मुझे ज्योति को लेकर इलाहाबाद भेजने का फैसला किया."

पढ़ाई के दौरान के संघर्ष पर आलोक ने कहा कि पैसे से ज्यादा सही समय पर सही मार्गदर्शन और मानसिक सहयोग देना बड़ी बात होती है. उन्होंने कहा, "मैंने प्रयागराज में साथ रहकर खाना बनाया, झाड़ू-पोछा भी किया. आज के दौर में भी कई हाई-क्वालिफाइड लड़कियों को शादी के बाद घर में बंद कर दिया जाता है, जिससे आज का यूथ शादी से डर रहा है. मैंने सोने (ज्योति की प्रतिभा) की कीमत समझी और उसका मनोबल बढ़ाया, जिसका नतीजा था कि वह एसडीएम बनीं. पद छोटा-बड़ा नहीं होता, मैंने कभी अपनी सफाई कर्मी की नौकरी को कमतर नहीं आंका, क्योंकि उसी से मैंने पढ़ाया था."

'ज्योति को आखिरी सांस तक प्यार करूंगा, भूलना मुमकिन नहीं'

सालों बाद भी अपनी पत्नी के प्रति भावनाओं पर आलोक बेहद भावुक दिखे. उन्होंने कहा, "इंसान जिससे सच्चा प्यार करता है, उसे कभी भूल नहीं पाता. हमारे बीच विवाद गहरा हुआ क्योंकि मेरा लगाव बहुत ज्यादा था. आंसू वहीं निकलते हैं जहां प्यार गहरा होता है. मैं आज भी ज्योति से प्यार करता हूं और अपनी आखिरी सांस तक करता रहूंगा. भले ही मैं आज मानसिक रूप से मजबूत हो गया हूं, सामाजिक काम कर रहा हूं, लेकिन जब रात को बेड पर लेटता हूं तो पुरानी बातें, वो साथ बैठकर बातें करना, सब याद आता है."

कोर्ट में मीडिएशन और बेटियों से मुलाकात का सच

दोनों के बीच चल रहे कानूनी विवाद पर आलोक ने बड़ा अपडेट दिया. उन्होंने बताया कि वर्तमान में माननीय जनपद न्यायालय प्रयागराज में उनके बीच 'मीडिएशन' (पारिवारिक समझौता प्रक्रिया) चल रही है. पारिवारिक न्यायालय चाहता है कि दोनों बैठकर बात करें और रिश्ता सुधर जाए. पिछली तारीख पर तबीयत खराब होने की वजह से दोनों में से कोई नहीं जा पाया था, लेकिन अगली तारीख पर वे जाएंगे.

अपनी 11 साल की दो जुड़वां बेटियों का जिक्र करते हुए आलोक का दर्द छलक पड़ा. उन्होंने समाज और कोर्ट-कचहरी लड़ रहे दंपतियों से अपील की, "विवाद पति-पत्नी का है, इसमें बच्चों को मत घसीटिए. मैंने देखा है कि अगर पुरुष बच्चों को रख लेता है तो मां से नहीं मिलने देता, और महिला रख लेती है तो पिता से दूर कर देती है. बच्चों को मां और बाप दोनों का प्यार चाहिए. मैं प्रेमानंद महाराज जी को रोज सुनता हूं, उन्होंने कहा है कि रिश्ते को बार-बार बचाइए, और अगर न बचे तो एक अच्छा मोड़ देकर छोड़ दीजिए. मैं कोर्ट के हर आदेश का सम्मान करूंगा." आलोक ने यह भी माना कि उनके केस में दोनों के बीच बैठकर बात करने का समय नहीं मिल पाया, जो इस बिखराव की बड़ी वजह बना.

80 मिलियन व्यूज और करोड़ों की गाड़ियों का क्या है राज?

सोशल मीडिया पर आलोक मौर्य के काफिले, बड़ी गाड़ियों और महंगे फोन के साथ वायरल हो रहे वीडियो पर जब सवाल किया गया कि 'पैसा कहां से आ रहा है?', तो आलोक ने हंसते हुए इसका पूरा सच बताया. आलोक ने कहा, "यह सब मेरा नहीं है, यह युवाओं का प्यार है. पिछले 28 दिनों में मेरे 'आलोक मौर्य अकेला' चैनल पर 80 मिलियन (8 करोड़) से ज्यादा व्यूज आए हैं. मेरे पास न तो खुद की गाड़ी है और न ही रहने को अपना घर, आज भी किराए के मकान में रहता हूं. आप मेरा अकाउंट चेक करा लीजिए, उसमें आज भी केवल 2-4 हजार रुपये ही मिलेंगे."

आलोक ने आगे बताया, "मेरे शुभम भाई और संतोष भैया जैसे युवा साथियों ने चंदा लगाकर मुझे यह महंगा मोबाइल दिया है ताकि मैं काम कर सकूं. लखनऊ के रुद्रा बिल्डर्स ने मुझसे कहा है कि आप सामाजिक और राजनीतिक रूप से क्षेत्र में उतरिए, हम आपको 10 गाड़ियां देने को तैयार हैं. यह जो गाड़ियां दिखती हैं, वह मेरे शुभम कुशवाहा भाई ने ड्राइवर के साथ दी हैं ताकि मैं शाम को ड्यूटी के बाद क्षेत्र में जाकर युवाओं से मिल सकूं."

सिविल सर्विसेज की तैयारी क्यों छोड़ी? अब राजनीति में एंट्री का प्लान 

बीच में आई उन खबरों पर भी आलोक ने विराम लगाया जिनमें दावा किया जा रहा था कि वह एसडीएम बनने के लिए सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे हैं. आलोक ने कहा, "विवाद के बाद जब मैं बाहर निकलता था तो हर जगह सोशल मीडिया और मीडिया का दबाव था, इसलिए मैंने बाहर निकलना बंद कर दिया था. मैं अपनी ड्यूटी जाता था. पद कोई छोटा नहीं होता, मैं प्रधानमंत्री जी के 'स्वच्छ भारत अभियान' को आगे बढ़ा रहा हूं. लेकिन हां, अगर मुझे कोई अच्छा प्लेटफॉर्म और राजनीतिक ऑफर मिलता है, तो मैं राजनीति में जरूर कदम रखूंगा."

उन्होंने आगे कहा, "आदरणीय प्रधानमंत्री जी भी मन की बात में कहते हैं कि युवाओं को राजनीति में आना चाहिए. पीएम मोदी का जो विजन है- 2027 में 'नया भारत, विकसित भारत', उसे पूरा करने के लिए मैं युवाओं को जोड़ना चाहता हूं. जिस तरह मैं जमीन पर सफाई करता हूं, उसी तरह राजनीति में जो कुछ लोगों ने गंदगी फैला रखी है, वहां जाकर उस गंदी राजनीति को साफ करने का काम करूंगा."

पीएम मोदी से 'पुरुष आयोग' के गठन की मांग 

इंटरव्यू के आखिरी हिस्से में आलोक मौर्य ने देश में 'पुरुष आयोग' (Men's Commission) बनाने की अपनी मांग को पूरी शिद्दत से दोहराया. उन्होंने कहा, "इसके लिए मैंने प्रधानमंत्री जी को पत्र भी लिखा है. आज समाज में पुरुष अपनी बात नहीं कह पाता. महिलाओं के पास मायका है, पुलिस है, महिला आयोग है और दहेज उत्पीड़न जैसी सख्त धाराएं हैं (जो जरूरी भी हैं क्योंकि महिलाओं के साथ भी गलत होता है), लेकिन पुरुषों के पास कोई प्लेटफॉर्म नहीं है. 

इसी वजह से दिल्ली के माननीय जज साहब, प्रतापगढ़ के पीसीएस अधिकारी, बिहार के आईपीएस और प्रयागराज के समाज कल्याण अधिकारी जैसे आला अफसरों ने पारिवारिक प्रताड़ना और बच्चों से न मिलने देने के गम में सुसाइड कर लिया. अगर पुरुष आयोग जैसा एक प्लेटफॉर्म होगा, जहां पुरुष की बात सुनी जाएगी, तो लोग डिप्रेशन में आकर आत्महत्या जैसा गलत कदम नहीं उठाएंगे."

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