उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक आईटीबीपी (ITBP) जवान की मां को इंसाफ दिलाने के लिए देश की सुरक्षा में तैनात सुरक्षा बल के जवानों को खुद मैदान में उतरना पड़ गया. कानपुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय में उस वक्त हड़कंप मच गया जब बड़ी संख्या में आईटीबीपी के हथियारबंद जवान वहां पहुंच गए. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जहां एक तरफ यूपी की कानून व्यवस्था और सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस मुद्दे पर सूबे की सियासत भी गरमा गई है. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस घटना को लेकर भाजपा की 'डबल इंजन' सरकार पर तीखा हमला बोला है.
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, महाराजपुर की 32वीं बटालियन में तैनात आईटीबीपी कांस्टेबल विकास सिंह की मां को 13 मई को सांस लेने में दिक्कत होने पर टाटमिल के कृष्णा हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था. आरोप है कि इलाज के दौरान डॉक्टर्स की लापरवाही के कारण उनकी मां के हाथ में गंभीर संक्रमण फैल गया. हालत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां डॉक्टरों को संक्रमण रोकने के लिए 17 मई को उनका हाथ काटना पड़ा.
पीड़ित जवान विकास सिंह अपनी मां को इंसाफ दिलाने के लिए लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहा था. यहां तक कि 20 मई को वह अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर दफ्तर भी पहुंचा था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट से पीड़ित परिवार और आईटीबीपी के अधिकारी संतुष्ट नहीं हुए.
कमिश्नर दफ्तर पहुंचे हथियारबंद जवान, मंचा हड़कंप
कार्रवाई न होने से नाराज होकर शनिवार सुबह आईटीबीपी के कमांडेंट गौरव प्रसाद और लाइजनिंग ऑफिसर अर्पित की अगुवाई में 50 से अधिक वर्दीधारी और हथियारबंद जवान पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए. जवानों के इस तरह पहुंचने से पूरा परिसर छावनी में तब्दील हो गया और सोशल मीडिया पर इसे सुरक्षा के लिहाज से अलग-अलग तरह से देखा जाने लगा.
मामला बढ़ता देख कमांडेंट गौरव प्रसाद ने सफाई देते हुए कहा, "मैं कमिश्नर सर से मिलने के लिए पहले से अपॉइंटमेंट लेकर आया था. मैं अंदर बैठा था और जवान बाहर खड़े थे. मीडिया ने इसे गलत तरीके से पेश किया है. हमारा घेरने का कोई इरादा नहीं था, हमें कमिश्नर सर और जांच पर पूरा भरोसा है."
अखिलेश यादव ने बोला हमला, घेरी सरकार
इस पूरी घटना पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर सरकार को घेरते हुए कहा कि यूपी की भाजपा सरकार और उसकी पुलिस की नाइंसाफी देखकर अब आईटीबीपी को भी इन पर भरोसा नहीं रहा. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "दिल्ली का भरोसा लखनऊ से उठ गया है, तभी आईटीबीपी ने यह घेराबंदी की होगी. यह कैसा डबल इंजन है जो एक दूसरे के खिलाफ बंदूक ताने खड़ा है?".
दरअसल, आईटीबीपी केंद्र सरकार के तहत आती है और यूपी पुलिस राज्य सरकार के अंतर्गत. अखिलेश यादव ने इस बहाने एक बार फिर 'दिल्ली वर्सेस लखनऊ' और बीजेपी के अंदरूनी टकराव का नैरेटिव सेट करने की कोशिश की है.
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