Rampur Nagar Assembly Seat Analysis: उत्तर प्रदेश की सियासत में जब भी सबसे चर्चित और वीआईपी सीटों का जिक्र होता है तो रामपुर नगर विधानसभा सीट का नाम सबसे ऊपर आता है. यह वह सीट है जो दशकों तक समाजवादी पार्टी (सपा) का सबसे मजबूत किला और उसके कद्दावर नेता आजम खान का सियासी साम्राज्य रही है. लेकिन, पिछले कुछ समय में यहां की राजनीतिक कहानी पूरी तरह बदल चुकी है. साल 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार रामपुर में खेल पलट जाएगा? क्या सपा अपने इस खोए हुए गढ़ को वापस पा सकेगी या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) यहां दोबारा भगवा लहराएगी?
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क्या है रामपुर नगर सीट का इतिहास?
रामपुर नगर विधानसभा सीट पर लंबे समय तक आजम खान का एकछत्र प्रभाव रहा है. आजम खान यहां से 9 बार विधायक रहे. इसके बाद उनकी पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा भी यहां से विधायक चुनी गईं. साल 2002 से लेकर हाल के वर्षों तक इस सीट पर केवल समाजवादी पार्टी और आजम खान का ही नाम गूंजता रहा. यह सीट सपा के लिए 'अजेय' और बीजेपी के लिए हमेशा से सबसे बड़ी चुनौती बनी रही.
कैसे बदला रामपुर का सियासी समीकरण?
रामपुर की राजनीति में यू-टर्न तब आया जब एक हेट स्पीच (भड़काऊ भाषण) मामले में कोर्ट ने आजम खान को 3 साल की सजा सुनाई. सजा मिलने के बाद उनकी विधायकी रद्द हो गई और यह सीट खाली हो गई. इसके बाद हुए उपचुनाव ने इतिहास रच दिया.
उपचुनाव में बीजेपी के आकाश सक्सेना ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आसिम रजा को हरा दिया [02:12]. आकाश सक्सेना को करीब 81,000 वोट मिले, जबकि सपा के आसिम रजा को 47,000 वोटों पर संतोष करना पड़ा. यह रामपुर के इतिहास में पहली बार था जब कोई गैर-मुस्लिम और गैर-पठान उम्मीदवार इस सीट से चुनाव जीता.
2027 के लिए सपा और बीजेपी के अपने-अपने दावे
चुनाव को लेकर दोनों ही पार्टियों में शह-मात का खेल शुरू हो चुका है:
समाजवादी पार्टी का दावा: सपा नेताओं का कहना है कि उपचुनावों में सत्ता और प्रशासन का भारी दखल होता है, जिसके दम पर बीजेपी जीती. लेकिन जमीन पर जनता का जनादेश आज भी बीजेपी के साथ नहीं है. सपा का मानना है कि इस बार 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला और भाईचारे के दम पर पार्टी रामपुर में बड़े बहुमत से वापसी करेगी.
बीजेपी का पलटवार: वहीं दूसरी तरफ, बीजेपी का जोश हाई है. बीजेपी समर्थकों का तर्क है कि वर्तमान विधायक आकाश सक्सेना के कार्यकाल में रामपुर में सड़कों का चौड़ीकरण, पार्कों का सुंदरीकरण और विकास के ऐतिहासिक काम हुए हैं. विकास के इसी एजेंडे के भरोसे बीजेपी 2027 में भी जीत का परचम लहराने की बात कह रही है.
रामपुर नगर सीट का जातीय और धार्मिक समीकरण
रामपुर नगर एक मुस्लिम बाहुल्य सीट है. यहां की राजनीतिक दिशा तय करने में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है. वीडियो रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ का जातीय समीकरण कुछ इस प्रकार है:
मुस्लिम मतदाता समीकरण:
- पठान: 80,804
- अंसारी: 57,860
- कुरैशी: 17,998
- सैयद: 17,785
- तुर्क: 11,985
- शेख: 6,573
- शिया: 6,186
- हिंदू मतदाता समीकरण:
- लोधी: 29,420
- जाटव: 19,115
- यादव: 12,268
- वैश्य: 10,295
- ब्राह्मण: 9,568
- वाल्मीकि: 7,280
- ठाकुर: 4,888
- कश्यप: 3,551
- सैनी व मौर्य: 3,360 (प्रत्येक)
क्या कहते हैं स्थानीय पत्रकार और एक्सपर्ट्स?
स्थानीय पत्रकारों के मुताबिक, 2027 के चुनाव में कई बड़े फैक्टर्स काम करेंगे:
आजम खान का फैक्टर: आजम खान फिलहाल जेल में बंद हैं. कानूनी अड़चनों के कारण उनका या उनके परिवार का चुनाव लड़ना मुश्किल नजर आ रहा है. हालांकि, स्थानीय जनता में उनके प्रति एक 'सिंपैथी' (सहानुभूति) जरूर है [10:25].
टिकट का चयन और अंदरूनी खींचतान: लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने आजम खान की मर्जी के बिना मौलाना मोहिबुल्ला नदवी को टिकट दिया था और वे जीत भी गए थे. अब देखना यह होगा कि विधानसभा में अखिलेश यादव आजम खान के पसंदीदा चेहरे को उतारते हैं या फिर कोई नया प्रयोग करते हैं. अगर नया प्रयोग होता है, तो क्या सपा में दो-फाड़ की स्थिति बनेगी?
कांग्रेस और बसपा की स्थिति: रामपुर सदर/नगर सीट पर पिछले कई दशकों से कांग्रेस और बसपा का कोई खास वजूद या स्कोप नहीं रहा है. मुकाबला मुख्य रूप से सपा और बीजेपी के बीच ही सिमटा हुआ है.
यहां देखें वीडियो:
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