फ्रांस में लेफ्ट फ्रंट निकला आगे, मैक्रों का गठबंधन पिछड़ा, वामपंथ के इस उभार का मतलब समझिए

अभिषेक गुप्ता

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France Election: फ्रांस में बीते दिन संसदीय चुनाव के नतीजों का ऐलान हुआ. नतीजों में वामपंथी दलों के गठबंधन को सबसे ज्यादा सीटें मिली. राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का मध्यमार्गी गठबंधन दूसरे स्थान पर रहा वहीं दक्षिणपंथी गुट तीसरे स्थान पर खिसक गया है. दिलचस्प बात ये है कि, किसी भी गुट को बहुमत नहीं मिल सका है. इससे फ्रांस में एक अनिश्चितता की स्थिति बन गई है. जो आज से पहले कभी नहीं देखी गई है. इससे धुर-दक्षिणपंथी गठबंधन को झटका लगा जो चुनाव जीतने का कयास लगाए हुए थे. नतीजों के घोषित होने के बाद पेरिस और अन्य शहरों में दंगे भड़क उठे. आइए आपको बताते है क्या आए नतीजे. 

आपको बता दें कि, फ्रांस में वामपंथी गुट, जिसे पॉपुलर फ्रंट भी कहा जाता है. इसमें फ्रांस की सोशलिस्ट पार्टी, फ्रांसीसी कम्युनिस्ट पार्टी, एक हरित राजनीतिक दल जिसे इकोलॉजिस्ट कहा जाता है और फ्रांस अनबोएड शामिल हैं. चुनाव के पहले दौर में नेशनल रैली की शानदार जीत के बाद धुर दक्षिणपंथ को रोकने के लिए इन पार्टियों ने साथ मिलकर एक गठबंधन बनाया. 

वामपंथी अलायंस को सबसे ज्यादा सीटें 

फ्रांस के संसदीय चुनावों से इस बार तीन प्रमुख राजनीतिक गुट उभरे हैं. इसके बाद भी कोई भी गुट 577 सीटों वाले नेशनल असेंबली में बहुमत के लिए जरूरी 289 सीटों के आंकड़े को छू नहीं पाया है. इस चुनाव में सबसे बड़े गुट बनकर वामपंथी गठबंधन उभर है जिसे 182 सीटें मिली है. वहीं राष्ट्रपति मैक्रों के गठबंधन को 168 सीटें, जबकि धुर दक्षिणपंथी रैसेमबलेमेंट नेशनल और उसके सहयोगियों को 143 सीटें मिली है.

ये नतीजे दक्षिणपंथी गठबंधन के साथ ही मैक्रों के लिए भी एक झटका थे, जिन्होंने अपने राजनीतिक प्रभुत्व को फिर से स्थापित करने के लिए समय से पहले चुनाव का ऐलान किया था. हालांकि मतदाताओं ने उन्हें और उनके गठबंधन को महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं में विफलता के लिए सबक सीखा दिया. 

वामपंथी गुट की सफलता की वजह रहा टेक्टिकल गठबंधन 

फ्रांस में वामपंथी गुट, जिसे पॉपुलर फ्रंट भी कहा जाता है. इसमें फ्रांस की सोशलिस्ट पार्टी, फ्रांसीसी कम्युनिस्ट पार्टी, एक हरित राजनीतिक दल जिसे इकोलॉजिस्ट कहा जाता है और फ्रांस अनबोएड शामिल हैं. चुनाव के पहले दौर में नेशनल रैली की शानदार जीत के बाद धुर दक्षिणपंथ को रोकने के लिए इन पार्टियों ने साथ मिलकर एक गठबंधन बनाया. 

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वामपंथी नेता ज्यां ने किया बड़ा ऐलान जिससे हो सकता है टकराव 

फ्रांस के चुनाव में भले ही किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला है फिर भी वामपंथी नेता ज्यां ने बड़ा एलान कर दिया है. उन्होंने कहा है कि उनका गठबंधन फलस्तीन को मान्यता देने की दिशा में काम करेगा. वैसे आपको बता दें कि फ्रांस युरोपियन यूनियन का हिस्सा है और हाल ही में यूरोप के चार देशों स्पेन, नॉर्वे, आयरलैंड और स्लोवेनिया ने फलस्तीन को राष्ट्र के तौर पर मान्यता दी थी. अब फ्रांस भी इसी ओर बढ़ता नजर आ रहा है. हालांकि ये तब संभव हो पाएगा जब वामपंथी गुट सरकार बनाने में कामयाब हो पाएगी. 

कुल मिलाकर अगर ऐसा होता है तो ये अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका माना जाएगा. इसके पीछे की वजह ये है कि, इजरायल जिसने फलस्तीन के बड़े हिस्से वेस्ट बैंक और गज पट्टी पर कब्जा जमाए हुए है वो अमेरिका का बेहद करीबी मित्र है. इन सब के साथ ही यूरोप में भी देशों के बीच मतांतर और बढ़ते दिखेंगे. जिससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थिरता में गिरावट होगी. देशों का एक-दूसरे पर पटाक्षेप बढ़ेगा. जो विश्व व्यवस्था के लिए नुकसानदायक होगा. 

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