RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, बीजेपी अध्यक्ष नड्डा के व्यक्तिगत विचार से नहीं है संघ का कोई सरोकार, समझिए इसके मायने

अभिषेक गुप्ता

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BJP-RSS controversy: लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रदर्शन में हुए गिरावट के बाद कई तरह की बयानबाजियां चल रही है. कोई कह रहा रहा पीएम मोदी के 400 पार के नारे से नुकसान हुआ, कोई संविधान बदलने तो कोई बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी को पार्टी के खराब प्रदर्शन की वजह बता रहा है. इन सब के बीच एक बड़ा एंगल बीजेपी से जुड़े वैचारिक संगठन राष्टीय स्वयंसेवक संघ(RSS) को लेकर सामने आया है. हाल के दिनों में इस पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से लेकर संघ प्रमुख तक के की बयान आए है जिनमें इन दोनों संगठनों के बीच चल रहे आपसी घमासान की झलक मिल रही है. बयानबाजियों के बीच बीते दिन संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम में ये तक कहा कि, 'नड्डा के व्यक्तिगत विचार से RSS का कोई सरोकार नहीं है'. आइए आपको बताते हैं आखिए क्या है ये पूरा मामला. 

'बीजेपी को पहले RSS की आवश्यकता पड़ती थी अब BJP सक्षम है'

लोकसभा चुनाव के बीच बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इंडियन एक्स्प्रेस को दिए साक्षात्कार के दौरान ये कहा था कि, 'बीजेपी तेजी से आगे बढ़ रही है. अब वह उस स्थिति में पहुंच गई है कि उसे संघ यानी RSS की जरूरत नहीं है. अब बीजेपी अपने दम पर हर कार्य करने में सक्षम है. उन्होंने कहा था कि वह वैचारिक रूप से कार्य करते हैं और हम राजनीतिक संगठन के रूप में. नड्डा ने अपने इस बयान में संघ को एक वैचारिक संगठन बताते हुए बीजेपी पार्टी में हस्तक्षेप को लेकर उसकी प्रासंगिकता पर परोक्ष रूप से सवाल उठाया था. 

नड्डा के इसी बयान के बाद से ही बीजेपी और RSS के बीच खटास बढ़ती चली गई. दोनों संगठनों के बीच आपसी टकराव तब उभर कर सामने आया जब लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी को बहुमत नहीं मिला और पार्टी 240 सीटों पर ही सिमट गई. हालांकि अपने NDA गठबंधन के साथियों तेलगु देशम पार्टी, जनता दल यूनाइटेड के साथ की अन्य दलों की बदौलत तीसरी बार सरकार बना ली. 

'अहंकारी होने से हुआ नुकसान'

पिछले दिनों RSS के केन्द्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने कहा था कि, जिस पार्टी ने भगवान राम की भक्ति की, जनता ने उसे सबसे बड़ी पार्टी बना दिया, लेकिन धीरे-धीरे उसमें अहंकार आ गया, भगवान ने उसे 241 सीटों पर रोक दिया. इसके बाद उन्होंने INDIA ब्लॉक के संदर्भ में बात करते हुए कहा था कि, जिनकी राम में कोई आस्था नहीं थी, उन्हें 234 सीटों पर रोक दिया. इंद्रेश कुमार ने एक महत्वपूर्ण बात उए कही थी कि, 'लोकतंत्र में राम का विधान देखिए, जिसने राम की भक्ति की उन्हें और ताकत मिलनी चाहिए थी लेकिन उनमें धीरे-धीरे अंहकार आने के कारण भगवान ने उनकी वो ताकत रोक दी.' 

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इंद्रेश कुमार के इस बयान के बाद देश मे जमकर सियासी चर्चा हुई की क्या RSS और बीजेपी के बीच दूरियां बढ़ गई है? दोनों केर बीच आपसी टकराव है? हालांकि बाद में उन्होंने अपने बयान पर सफाई दी कि, उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. 

'नड्डा के बयान से संघ का नहीं है सरोकार'

RSS और बीजेपी के बीच चल रहे इस जुबानी जंग पर बीते दिन सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी. दैनिक जागरण अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुए एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि, 'भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के संघ से जुड़े बयान को उनका व्यक्तिगत विचार माना जाए.' उन्होंने कहा, 'हमारे देश में हर नागरिक को अपने विचार खुलकर रखने की स्वतंत्रता है, उनके बयान से RSS का कोई सरोकार नहीं है.' ऐसे में उनके बयान को पार्टी व संगठन की नीतियों से जोड़कर देखने की आवश्यकता नहीं है. संघ प्रमुख ने नड्डा के बयान से जुड़े सवाल पर ये बातें कहीं.

हालांकि जागरण अखबार में छपे मोहन भागवत के इस बयान पर RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा है कि, यह समाचार पूर्णतः निराधार है. पूजनीय सरसंघचालक जी ने गोरखपुर में कोई सार्वजनिक वक्तव्य नहीं दिया है. वे वर्तमान में संघ के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम हेतु देशव्यापी प्रवास पर हैं.

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