PM मोदी ने जिस लड़ाकू विमान से भरी उड़ान उसे वाजपेयी ने दिया था तेजस नाम! इसकी खासियत जानिए

देवराज गौर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान में भरी उड़ान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान में भरी उड़ान
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PM Modi Undertakes Sortie on Tejas: तेजस लड़ाकू विमान से उड़ान भरते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर चर्चा में है. जिस तेजस से पीएम मोदी ने उड़ान भरी है, उसे तेजस नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का दिया हुआ है. पहले इसे LCA यानी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के नाम से जाना जाता था. प्रधानमंत्री मोदी ने इसमें उड़ान भरने के बाद एक्स पर एक पोस्ट किया है.

पीएम मोदी ने लिखा है,

‘मैं आज तेजस में उड़ान भरते हुए अत्यंत गर्व के साथ कह सकता हूं कि हमारी मेहनत और लगन के कारण हम आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में विश्व में किसी से कम नहीं हैं. भारतीय वायुसेना, DRDO और HAL के साथ ही समस्त भारतवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं.’

देश को क्यों पड़ी तेजस की जरूरत?

तेजस की शुरुआत पुराने मिग-21 फाइटर्स को रिप्लेस करने के लिए की गई थी. 1980 के दशक में भारत सरकार को मिग 21 को हटाने के बाद किसी नए फाइटर जेट बनाने की जरूरत महसूस हुई. सोवियत यूनियन का डेवलप किया गया मिग 21 फाइटर जेट 1970 के दशक से इंडियन एयरफोर्स का मुख्य लड़ाकू विमान रहा था. 1981 में इंट्रोड्यूस हुए लॉन्ग टर्म इक्विपमेंट प्लान में यह महसूस किया गया कि 1990 और 2000 तक आते-आते मिग 21 अपनी सेवा से बाहर होने लगेंगे. जिससे इंडियन एयरफोर्स के पास अपनी जरूरत के मुकाबले 40 फीसदी कम एयरक्राफ्ट बचेंगे.

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इसे ध्यान में रखते हुए 1980 के दशक में लाइट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम लॉन्च किया गया. जिसे LCA भी कहा गया. LCA के लॉन्च करने के दो मुख्य उद्देश्य थे, पहला मिग 21 को रिप्लेस करना और दूसरा रक्षा क्षेत्र में भारत के स्वदेशी मूवमेंट को तेजी देना.

PM Modi undertakes sortie on Tejas fighter jet
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तेजस की उड़ान भरते हुए

किसने बनाया तेजस को?

तेजस भारत में बनाया गया पहला लाइटवेट मल्टीरोल सुपरसोनिट फाइटर एयरक्राफ्ट है. HF-24 मारुत के बाद तेजस दूसरा स्वदेशी फाइटर विमान है. तेजस के डिजाइन को “एयरोनोटिकल डेवलपमेंट एजेंसी” और “एयरक्राफ्ट रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर” (ARDC) ने मिलकर तैयार किया है. तेजस को बनाने वाली कंपनी भारत की ही एचएएल यानी हिंदुस्तान एयरोनोटिकल लिमिटेड है. जिसका मुख्यालय बैंगलोर, कर्नाटक में स्थित है. डॉ. कोटा हरिनारायण तेजस को बनाने वाले डेवलपमेंट प्रोग्राम के डायरेक्टर और चीफ साइंटिस्ट थे.

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तेजस में अमेरिकी इंजनों का होता है इस्तेमाल

वैसे तेजस के बहुत से पार्ट्स विदेशों से भी लिए गए हैं. इनमें अमेरिका, इंग्लैंड और इजराइल जैसे देश शामिल हैं. जैसे अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रोनिक्स के इंजन और इजराइली रडार्स इसमें इस्तेमाल किए गए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक तेजस में 65 फीसदी कंपोनेंट्स स्वदेशी और बाकी विदेशी पार्ट्स का इस्तेमाल किया गया है. भारत सरकार ने हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड को 83 तेजस मार्क-1 फाइटर विमान बनाने के लिए 48,000 करोड़ रुपए का कॉन्ट्रैक्ट किया है.

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2016 में इंडियन एयरफोर्स में किया गया शामिल

जुलाई 2001 में LCA के पहले प्रोटोटाइप ने उड़ान भरी. यानी इसकी पहली एक्सपेरीमेंटल उड़ान भरी गई. इसके बाद भी तेजस को इंडियन एयरफोर्स में शामिल होने के लिए 15 साल का समय लग गया. साल 2013 में तेजस को पहला स्टेट ऑपरेशनल क्लियरेंस मिला. इसके बाद साल 2016 में दो MK-1 तेजस विमानों को इंडियन एयरफोर्स में शामिल किया गया. साल 2020 में तेजस को फाइनल ऑपरेशनल क्लियरेंस मिला.

तेजस की क्या है खासियत

तेजस भारत में बनाया गया पहला लाइट वेट फाइटर प्लेन है. इस लड़ाकू विमान की कुल लंबाई 13.2 मीटर और ऊंचाई 4.4 मीटर है. इसके पंखों की चौड़ाई 8.2 मीटर है. खाली तेजस विमान का वजन 6,560 किलो है. सामान के साथ 9800 किलोग्राम है. तेजस अत्यधिक टेकऑफ वेट 13,500 किलो उठा सकता है. यानी तेजस, सुखोई लड़ाकू विमान के बराबर भार उठा सकता है, जबकि यह उससे काफी हल्का है. तेजस फाइटर विमान की स्पीड साउंड की स्पीड के बराबर है जो 52,000 फीट की ऊंचाई तक 1.6 से 1.8 मैक की स्पीड से उड़ सकता है.

अब तेजस के सभी पार्ट्स स्वदेश में ही बनेंगे

जब भारत ने यह प्रोग्राम लॉन्च किया था तब देश के पास कोई भी संस्था ऐसी नहीं थी, जिसके पास ऐसे फाइटर जेट को बनाने की कुशलता प्राप्त हो. भारत के पास इस प्रोग्राम को जीरो से शुरू करने के अलावा और कोई चारा नहीं था. भारत ने शुरू में इसके सभी पार्ट्स को भारत में ही बनाने की कोशिश की थी, सफलता नहीं मिलने पर विदेशों का रुख करना पड़ा. इसमें इंजन सबसे ज्यादा जरूरी थे. DRDO ने तेजस के लिए कावेरी इंजन बनाए थे जो कि असफल हो गए थे, क्योंकि इनकी वजह से तेजस विमानों में वाइब्रेशन ज्यादा होता था. फिर अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रोनिक्स के इंजनों को लेने का फैसला किया गया.

इसी साल जून में भारत ने तेजस मार्क 2 के लिए भारत में बने इंजनों को इस्तेमाल करने की बात कही है. इसके 2028 तक एयरफोर्स के बेडे़ में शामिल होने की बता कही जा रही है. वहीं तेजस मार्क 1 में इजराइली रडारों का इस्तेमाल किया जा रहा था लेकिन मार्क 2 में भारतीय रडारों का इस्तेमाल किया जाएगा. तेजस विमानों का इस्तेमाल फिलहाल इंडियन एयरफोर्स और नेवी के द्वारा किया जा रहा है.

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