धारावी के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर क्यों मचा मुंबई में घमासान, क्या है इसका अदाणी कनेक्शन?

देवराज गौर

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अदाणी के धारावी रिडेवलेपमेंट को लेकर शिवसेना मुंबई में विरोध कर रही है.
अदाणी के धारावी रिडेवलेपमेंट को लेकर शिवसेना मुंबई में विरोध कर रही है.
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Mumbai News Updates: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना और महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के नेता धारावी पुनर्विकास योजना के खिलाफ मेगा रैली निकाल रहे हैं. मुंबई पुलिस ने धारावी बचाओ आंदोलन को आज होने वाले शिवसेना के मोर्चे को अनुमति दे दी है. धारावी को एशिया का सबसे बड़ी स्लम बस्ती कहा जाता है. मुंबई की धारावी को नए सिरे से बनाने का काम अदाणी ग्रुप को मिला है.

धारावी पुनर्विकास की परियोजना क्या है और आखिर शिवसेना-एमवीए इसका विरोध क्यों कर रहे हैं? आइए इसे समझते हैं.

क्या है धारावी पुनर्विकास परियोजना

धारावी मुंबई में मौजूद एक बड़ी झुग्गी बस्ती है. यह बस्ती 594 एकड़ में फैली है. झुगियों का विस्तार करीब 2.8 वर्ग किलोमीटर एरिया में है. इस साल जुलाई में इसके पुनर्विकास योजना की बोली जीती थी. इस परियोजना से 20 हजार करोड़ रुपये की राजस्व क्षमता का अनुमान है. धारावी मुंबई के मध्य में स्थित है. यह भारत के सबसे अमीर व्यापारिक जिले, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स से बस कुछ ही दूरी पर है.

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यह झुग्गी बस्ती अनौपचारिक तौर पर चमड़ा और मिट्टी के बर्तन उद्योग का घर है, जो एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार देती है. सरकार ने इसे ऊंची इमारतों में विकसित कर सभी बुनियादी जरूरतों को उपलब्ध कराने के साथ-साथ वर्ल्ड क्लास फैसिलिटीज देने की योजना बनाई थी. इसमें 68 हजार लोगों का पुनर्वास शामिल है.

पहली बार कब प्रस्तावित की गई थी धारावी पुनर्विकास परियोजना?

1999 में बीजेपी-शिवसेना सरकार ने सबसे पहले धारावी के पुनर्विकास का प्रस्ताव रखा था. साल 2004 में महाराष्ट्र सरकार ने धारावी को पुनर्विकसित करने का निर्णय लिया. लेकिन विभिन्न कारणों से कभी धरातल पर नहीं उतर सकी. इस योजना के तहत 2001 से पहले से रहने वाले धारावी निवासियों को 300 वर्ग फुट के घर मुफ्त में उपलब्ध कराने थे. वहीं साल 2000 से 2011 के बीच धारावी में बसने वालों को एक कीमत पर घर उपलब्ध कराने थे. 19 सालों से अधर में लटकी इस योजना को अब नए सिरे से शुरू किया जा रहा है.

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बीजेपी-शिवसेना (एकनाथ शिंदे) सरकार पर आरोप लगता है कि उन्होंने नियमों को ताक पर रख अदाणी समूह को यह प्रोजेक्ट सौंपा है. वहीं इस प्रोजेक्ट को लेकर हुई पिछली नीलामी को सरकार ने रद्द कर दिया था. वह प्रोजेक्ट दुबई की कंपनी सेकलिंक को 7200 करोड़ रुपए में मिला था. अदाणी ग्रुप तब नीलामी में पिछड़ गया था. तब अदाणी समूह ने 4500 करोड़ रुपए की बोली लगाई थी. इस बार अदाणी ने 5069 करोड़ रुपए की बोली लगाकर इस प्रोजेक्ट को हासिल किया है.

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उद्धव की शिवसेना क्यों कर रही है इसका विरोध

उद्धव ठाकरे की शिवसेना, महाविकास अघाड़ी के नेताओं के साथ मिलकर धारावी स्लम पुनर्विकास परियोजना और अदाणी पॉवर द्वारा प्रदान की जाने वाली शहर की बिजली दरों में बढ़ोतरी के मुद्दे पर इसका विरोध कर रही है. मार्च के बारे में मीडिया से बात करते हुए शिवसेना (उद्धव गुट) नेता संजय राउत ने कहा कि यह पहल सिर्फ धारावी के लिए नहीं बल्कि मुंबई के लिए है और इसमें मुंबईकर हिस्सा लेंगे. उन्होंने अदाणी समूह को दी जा रही सभी परियोजनाओं पर सरकार की आलोचना की और उद्योगपति गौतम अदाणी को “बीजेपी का दामाद” कहा.

उद्धव ठाकरे
उद्धव ठाकरे – फोटोः एक्स

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने यह आरोप लगाया था कि शिंदे और बीजेपी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने धारावी पुनर्विकास परियोजना का ठेका देकर अदाणी समूह का पक्ष लिया. उद्धव ने 5 दिसंबर को घोषणा की थी कि वह 16 दिसंबर को एक मार्च का नेतृत्व करेंगे.

शिवसेना और उद्धव ठाकरे की मांग है कि राज्य सरकार को धारावी निवासियों को 400 से 500 वर्ग फुट की जगह देनी चाहिए और उनकी आजीविका को ध्यान में रखते हुए उन्हें धारावी में ही स्थानांतरित किया जाना चाहिए. उद्धव ने कहा था कि शिवसेना अदाणी को मुंबई उपहार में देने की अनुमति नहीं देगी. बिजली का ठेका भी अदाणी को दे दिया गया है. अदाणी को सब कुछ कैसे दे दिया गया? यदि आप सभी उद्योगों को गुजरात ले जाएंगे तो आप मुंबई में क्या करेंगे?

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