फोटो- एमपी टूरिज्म
बुंदेलखंड अंचल में होने वाली शादियों में हर घर से पहला निमंत्रण लोकदेवता हरदौल के नाम जाता है.
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यानी जिसकी शादी है उस दूल्हा या दुल्हन की मां, हरदौल को अपना भाई मानकर भात देने का न्योता देती है.
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बुंदेलखंड के हर गांव में हरदौल के चबूतरे बने हुए हैं, जहां मांगलिक कार्यों से पहले उनकी पूजा-अर्चना की जाती है.
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ऐसा माना जाता है कि हरदौल मरने के बाद भी अपनी भांजी की शादी में भात लेकर दतिया अपनी बहन कुंजावती के घर बने मंडप में पहुंचे थे.
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हरदौल ओरछा के राजा वीर सिंह जू देव के बेटे थे, वीर सिंह ने अपने बड़े बेटे जुझार सिंह को ओरछा की राजगद्दी सौंपी और हरदौल को दीवान बनाया गया.
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जुझार सिंह कई बार मुगलों से युद्ध में उलझते रहते थे, ऐसे में रियासत का सारा काम हरदौल ही देखते थे.
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इसी गैरमौजूदी का फायदा उठाकर प्रजा ने जुझारसिंह की पत्नी और हरदौल के बीच अवैध संबंध की झूठी शिकायत जुझारसिंह से कर दी थी.
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इस पर राजा जुझार सिंह ने रानी चंपावती को अपने हाथों से हरदौल को जहर परोसने का आदेश दिया.
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रानी जब यह न कर सकी, तो हरदौल ने अपनी भाभी का दामन पाक साफ रखने के लिए खुद जहर पी लिया.
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तब से आज तक बुंदेलखंड में लाला हरदौल को लोकदेवता के रूप में पूजा जाता है.
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