17 MAY 2024
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मध्य प्रदेश के छह नए स्थलों को यूनेस्को विश्व धरोहर की अस्थाई सूची में (World Heritage Sites) जगह मिली है.
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इससे पहले MP के 3 स्थल पहले से ही यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं. इनमें खजुराहो स्मारक समूह (1986), सांची के बौद्ध स्मारक (1989) तथा भीमबेटका के रॉक शेल्टर (2003) शामिल हैं.
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खजुराहो- चंदेल राजवंश निर्मित खजुराहो भारत की एक सांस्कृतिक विरासत है. मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में हिंदू और जैन मंदिरों का एक समूह है.
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सांची स्तूप- सांची बौद्ध धर्म के दर्शनीय स्थलों में से एक है, भारत की सबसे पुरानी पत्थर की संरचनाओं का केंद्र है. इससे 1989 में यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूची में जगह मिली थी.
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भीमबेटका- भीमबेटका में 600 से अधिक चट्टानी शैल आश्रय और गुफाएं हैं. इन गुफाओं की दीवारें 30,000 साल पुराने चित्रों से सुशोभित हैं.
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ग्वालियर किला- यह एक पहाड़ी के ऊपर स्थित है, जो आसपास के शहर का खूबसूरत दृश्य प्रदान करता है. किले में विशेषकर तीन अलौकिक मंदिर है- चतुर्भुज मंदिर, सास बहू मंदिर और गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ दिया गया.
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भोजेश्वर महादेव मंदिर: यह भगवान शिव को समर्पित है और इसमें एक ही पत्थर से बना विशाल लिंग है, जो एक अलौकिक अनुनभूति प्रदान करता है.
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चंबल घाटी की रॉक कला - यह विश्व के सबसे बड़े रॉक कला स्थलों की मेज़बानी करता है, जो विभिन्न ऐतिहासिक काल और सभ्यताओं के दृश्यों को प्रदर्शित करते हैं।
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बुरहानपुर का खूनी भंडारा- यह एक जल प्रबंधन प्रणाली है, जिसमें शहर बुरहानपुर में अब्दुर्रहीम खानखाना द्वारा निर्मित आठ जलकुंड शामिल हैं. यह एक ऐतिहासिक स्थल है.
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मंडला का गोंड स्मारक: -स्मारकों के समूह में मोती महल, रायभगत की कोठी,सूरज मंदिर (विष्णु मंदिर),बेगम महल और दलबादल महल शामिल हैं.
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