असम विधानसभा की सभी 126 सीटों के लिए 9 अप्रैल को हुई वोटिंग ने राज्य के चुनावी इतिहास के तमाम पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. इस बार असम में 85% से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया है, लेकिन सबसे चौंकाने वाले आंकड़े मुस्लिम बहुल इलाकों से सामने आए हैं, जहां वोटिंग प्रतिशत 94% के पार पहुंच गया है. अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह भारी मतदान मुख्यमंत्री हेमंत विश्व शर्मा की सत्ता में वापसी कराएगा या राज्य में कोई बड़ा राजनीतिक उलटफेर होने वाला है?
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मुस्लिम क्षेत्रों में जबरदस्त उत्साह
असम की सत्ता की चाबी अक्सर राज्य की करीब 38-40% मुस्लिम आबादी के हाथ में मानी जाती है. इस बार के रुझान बताते हैं कि लोअर असम की 66 सीटों पर, जहां मुस्लिम वोट बैंक निर्णायक भूमिका में है, वहां औसत मतदान 86.5% रहा है.
- दलगांव: यहां सबसे अधिक 94.6% वोटिंग रिकॉर्ड हुई, जहां करीब 95% मुस्लिम वोट शेयर है.
- धुबरी: यहां 90.5% मतदान हुआ, जहां करीब 77% मुस्लिम आबादी है.
क्या कहता है वोटिंग का गणित?
पिछली बार 2021 के चुनावों में 82.4% वोटिंग हुई थी, जिसके मुकाबले इस बार मतदान में करीब 3% का इजाफा हुआ है. ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो:
- 2016 और 2021: जब भी वोटिंग प्रतिशत 80% के पार गया है, एनडीए (NDA) ने जीत हासिल की है.
- 2001-2011: इस दौरान कांग्रेस का वर्चस्व रहा और तरुण गोगोई लगातार तीन बार मुख्यमंत्री बने, तब मतदान प्रतिशत 75-77% के आसपास रहता था.
4 मई का इंतजार
इस बार का 3% अतिरिक्त मतदान किसके पक्ष में जाएगा, यह चर्चा का विषय बना हुआ है. लोअर असम की 66 सीटें नतीजों को प्रभावित करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगी. [03:52] क्या जनता ने हेमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व पर फिर से मुहर लगाई है या 'बदलाव' के लिए वोट किया है, इसका आधिकारिक फैसला 4 मई को मतगणना के दिन होगा.
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