तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान के बाद जनता का मूड क्या है, इसे लेकर लोकपोल (Lokpoll) का सबसे ताजा और चौंकाने वाला सर्वे सामने आया है. इस सर्वे के अनुसार, राज्य में एक बार फिर मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाले डीएमके (DMK) गठबंधन की सरकार बनती दिख रही है लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा अभिनेता से नेता बने विजय थलापति की पार्टी टीवीके (TVK) के प्रदर्शन की हो रही है.
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डीएमके गठबंधन को पूर्ण बहुमत का अनुमान
तमिलनाडु विधानसभा की कुल 234 सीटों के लिए बहुमत का आंकड़ा 118 है. लोकपोल के सर्वे के मुताबिक:
- DMK + कांग्रेस गठबंधन: 181 से 189 सीटें मिलने का अनुमान है. यानी स्टालिन सरकार आसानी से बहुमत का आंकड़ा पार कर सत्ता में वापसी कर रही है.
- AIADMK + बीजेपी गठबंधन: इस गठबंधन को केवल 38 से 42 सीटें मिलने की उम्मीद जताई गई है, जो बहुमत के आंकड़े से काफी दूर है.
- TVK (विजय थलापति): पहली बार चुनावी मैदान में उतरी विजय की पार्टी को 8 से 10 सीटें मिल सकती हैं.
वोट शेयर में विजय थलापति का बड़ा 'जंप'
सीटों के अलावा वोट शेयर के आंकड़ों ने राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है.
- DMK गठबंधन: 40.1% वोट शेयर.
- AIADMK + बीजेपी: 29% वोट शेयर.
- TVK (विजय थलापति): 23.9% वोट शेयर.
पहली बार चुनाव लड़ रही पार्टी के लिए लगभग 24% वोट शेयर हासिल करना एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. सर्वे के अनुसार, विजय थलापति ने मुख्य विपक्षी दल एआईएडीएमके के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई है.
सीएम की पसंद: स्टालिन नंबर 1, विजय दूसरे स्थान पर
सर्वे में जब जनता से उनके पसंदीदा मुख्यमंत्री के बारे में पूछा गया, तो परिणाम इस प्रकार रहे:
- एम.के. स्टालिन: 41% लोगों की पहली पसंद.
- विजय थलापति: 27.1% लोगों ने उन्हें सीएम के रूप में पसंद किया.
- ई. पलानीस्वामी (AIADMK): 24.1% लोगों की पसंद.
चौंकाने वाली बात यह है कि विजय थलापति लोकप्रियता के मामले में राज्य के कद्दावर नेता और पूर्व सीएम ई. पलानीस्वामी से भी आगे निकल गए हैं. युवाओं और महिलाओं के बीच विजय का क्रेज साफ देखा जा रहा है.
क्या किंगमेकर बनेंगे विजय?
हालांकि सीटों के मामले में डीएमके को किसी के समर्थन की जरूरत पड़ती नहीं दिख रही है, लेकिन विजय थलापति का बढ़ता जनाधार भविष्य की राजनीति के लिए बड़े संकेत दे रहा है. विजय खुद दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं. तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर मतदान के बाद 4 मई को नतीजे घोषित होंगे, तभी साफ होगा कि लोकपोल का यह सर्वे जमीनी हकीकत में कितना बदलता है.
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