त्योहारों का सीजन शुरू होते ही हर कोई जानना चाहता है कि आने वाला समय उसके लिए कैसा रहेगा. इस बार दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी, लेकिन इससे पहले ही ग्रहों का एक ऐसा दुर्लभ फेरबदल होने जा रहा है, जो कई लोगों के जीवन में खुशियों और धन की बरसात कर सकता है. ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, ग्रहों के राजकुमार 'बुध' और धन-वैभव के दाता 'शुक्र' एक साथ आकर 'लक्ष्मी नारायण राजयोग' का निर्माण कर रहे हैं.
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इस बार यह शुभ संयोग तुला राशि में बनने जा रहा है, जिसकी शुरुआत 26 सितंबर 2026 से हो रही है. दिवाली के ऐन पहले बन रहा यह योग व्यापार, करियर और आर्थिक तरक्की के लिहाज से बेहद खास माना जा रहा है.
क्या होता है लक्ष्मी नारायण राजयोग?
ज्योतिष में बुध ग्रह को बुद्धि, व्यापार, संवाद और विवेक का प्रतीक माना गया है, वहीं शुक्र ग्रह सुख-सुविधाओं, ऐश्वर्य और सौंदर्य का कारक है. जब यह दोनों मित्र ग्रह किसी एक ही राशि में मिलते हैं, तो उसे 'लक्ष्मी नारायण योग' कहा जाता है. इस युति का असर हर इंसान की कुंडली के अलग-अलग भावों (घर) पर पड़ता है- जैसे पहले भाव में होने पर यह आत्मविश्वास बढ़ाता है, दूसरे भाव में धन का आगमन कराता है और दसवें-ग्यारहवें भाव में करियर व आमदनी के नए दरवाजे खोलता है.
वैसे तो इस राजयोग का असर सभी राशियों पर किसी न किसी रूप में देखने को मिलेगा, लेकिन 3 ऐसी राशियां हैं जिनके लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं दिख रहा है:
मिथुन राशि:
मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय करियर में नई ऊंचाइयों को छूने का हो सकता है. आपकी बोलचाल और कम्युनिकेशन स्किल ही आपकी सबसे बड़ी ताकत बनेगी, जिससे आप कार्यक्षेत्र में बड़ा लाभ कमा सकते हैं. इतना ही नहीं, अचानक से अप्रत्याशित धन लाभ के योग भी बनते दिख रहे हैं.
तुला राशि:
चूंकि यह राजयोग तुला राशि में ही बनने जा रहा है, इसलिए सबसे ज्यादा सकारात्मक बदलाव इसी राशि के जातकों के जीवन में देखने को मिलेंगे. अगर आपका पैसा लंबे समय से कहीं अटका हुआ था, तो उसके वापस मिलने की पूरी संभावना है. समाज में मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी, करियर को नई रफ्तार मिलेगी और जो लोग विदेश से जुड़ा कारोबार करते हैं या विदेश यात्रा का सपना देख रहे हैं, उनके काम आसानी से बन सकते हैं.
मकर राशि:
मकर राशि वालों की आर्थिक सेहत में इस दौरान बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है. आय के नए जरिया बनने की उम्मीद है. जो लोग व्यापार या खुद का काम करते हैं, उन्हें कारोबार बढ़ाने के बेहतरीन अवसर मिलेंगे. आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों को इस दौरान बड़ी राहत मिल सकती है.
दिवाली के आसपास क्यों बढ़ जाती है इस योग की अहमियत?
दिवाली का पर्व मुख्य रूप से मां लक्ष्मी की कृपा और समृद्धि से जुड़ा होता है. ऐसे में अगर दिवाली के ठीक आसपास धन और बुद्धि के कारक ग्रह एक साथ आ जाएं, तो इस ज्योतिषीय संयोग का महत्व कई गुना बढ़ जाता है.
एक बात का रखें ध्यान
ज्योतिषशास्त्र यह भी कहता है कि किसी भी ग्रह-योग का शत-प्रतिशत असर व्यक्ति की व्यक्तिगत जन्मकुंडली, उसमें मौजूद ग्रहों की स्थिति और चल रही दशा पर निर्भर करता है. इसलिए इसे एक सामान्य ज्योतिषीय आंकलन के रूप में देखना चाहिए.
(नोट: ज्योतिष में बताए गए ये परिणाम मान्यताओं पर आधारित हैं. इन्हें निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए.)
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