बिहार की राजनीति में अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच चल रहा विवाद अब लगातार नए बयान और नए सियासी संकेत सामने ला रहा है. जेडीयू के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर खड़े हुए अनंत सिंह ने अब नीतीश कुमार का नाम लेकर अपनी स्थिति को और स्पष्ट करने की कोशिश की है. एक निजी चैनल से बातचीत में अनंत सिंह ने नीतीश कुमार के प्रति अपने व्यक्तिगत सम्मान का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वह नीतीश कुमार के प्रशंसक हैं. हालांकि, इसी के साथ उन्होंने अपने उस अनुभव का भी उल्लेख किया जब वह नीतीश कुमार के शासनकाल में लंबे समय तक जेल में रहे.
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'नीतीश कुमार के दीवाने हैं, लेकिन 11 साल जेल में रहे'
अनंत सिंह का कहना है कि नीतीश कुमार से उनकी व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है. इसके बावजूद उन्होंने यह सवाल जरूर उठाया कि अगर नीतीश कुमार के शासनकाल में उन्हें करीब 11 साल जेल में रहना पड़ा, तो उनके लिए व्यक्तिगत तौर पर क्या किया गया. यानी अनंत सिंह ने एक तरफ नीतीश कुमार के प्रति अपने सम्मान को कायम रखा, तो दूसरी तरफ अपने राजनीतिक और व्यक्तिगत अनुभवों का हवाला देकर यह भी साफ किया कि मौजूदा विवाद को वह अपनी शर्तों पर देख रहे हैं.
नीरज कुमार के खिलाफ क्यों खड़े हैं अनंत सिंह
मौजूदा विवाद की जड़ पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का विधान परिषद चुनाव है. जेडीयू ने इस सीट से नीरज कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है. दूसरी तरफ अनंत सिंह ने जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह के समर्थन का ऐलान किया है. अनंत सिंह नीरज कुमार के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं. अनंत सिंह का दावा है कि नीरज कुमार के साथ उनका विवाद पुराना है. वह इस चुनाव को व्यक्तिगत लड़ाई के तौर पर भी पेश करते रहे हैं. यही वजह है कि उनके रुख को जेडीयू की आधिकारिक लाइन से अलग माना जा रहा है.
'किसी का सुनने नहीं बैठा हूं'
अनंत सिंह से जब यह पूछा गया कि क्या पार्टी नेतृत्व उन्हें मनाने की कोशिश कर रहा है, तो उनका रुख काफी स्पष्ट रहा. उनका कहना है कि अगर नीतीश कुमार व्यक्तिगत तौर पर उन्हें मनाते, तो वह उनकी बात मान सकते थे. लेकिन किसी और की मध्यस्थता से अपना फैसला बदलने के लिए वह तैयार नहीं हैं. इससे पहले जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा था कि अनंत सिंह और नीरज कुमार के विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी ललन सिंह को दी गई है. पार्टी की ओर से दोनों नेताओं के बीच बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने की कोशिश की गई थी.
अनंत सिंह का बड़ा दावा
अनंत सिंह ने यह भी दावा किया कि पार्टी की ओर से उन्हें मनाने के लिए कोई प्रभावी पहल नहीं हुई. उन्होंने ललन सिंह से किसी बातचीत से भी इनकार किया. इसके साथ ही अनंत सिंह ने जेडीयू में अपनी राजनीतिक भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े किए. उनका कहना है कि मुख्यमंत्री बनाने में उनकी भूमिका रही है और वह विधायक हैं, जबकि नीरज कुमार विधान परिषद सदस्य हैं. इसी आधार पर वह दोनों की राजनीतिक भूमिका को लेकर बहस की चुनौती भी देते रहे हैं.
क्या यह जेडीयू से दूरी का संकेत है?
अनंत सिंह के लगातार बयानों ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या वह जेडीयू नेतृत्व से दूरी बना रहे हैं या यह पूरा विवाद सिर्फ नीरज कुमार को लेकर है. फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि अनंत सिंह का जेडीयू से औपचारिक तौर पर मोहभंग हो गया है. लेकिन इतना जरूर है कि वह पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के समर्थन में खड़े नहीं हैं. उलटे वह अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार कर चुके हैं. इस पूरे घटनाक्रम के बीच जेडीयू नेतृत्व की कोशिश विवाद को नियंत्रित करने की रही है. ललन सिंह को मध्यस्थ की भूमिका दिए जाने की जानकारी भी सामने आई थी. बाद के घटनाक्रम में ललन सिंह की मध्यस्थता के बाद अनंत सिंह के सार्वजनिक रुख में कुछ बदलाव की खबरें भी आईं, हालांकि नीरज कुमार को समर्थन देने के सवाल पर उनकी स्थिति अलग रही.
अब असली सवाल क्या?
अनंत सिंह के बयान के बाद बिहार की सियासत में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नीरज कुमार के खिलाफ उनका रुख केवल व्यक्तिगत विवाद तक सीमित रहेगा या इसका असर जेडीयू के अंदर उनके रिश्तों पर भी पड़ेगा. नीतीश कुमार के प्रति सम्मान जताते हुए अनंत सिंह ने अपनी नाराजगी का निशाना फिलहाल नीरज कुमार और विवाद से जुड़े अपने राजनीतिक अनुभवों को बनाया है. ऐसे में यह मामला जेडीयू के लिए केवल दो नेताओं के बीच मतभेद नहीं, बल्कि पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार और एक मौजूदा विधायक के अलग-अलग रुख का मामला भी बन गया है.
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