बिहार में पटना स्नातक एमएलसी चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है. उम्मीदवारों के बीच मुकाबले के साथ अब नेताओं के पुराने राजनीतिक रिश्ते और टकराव भी चुनावी चर्चा का हिस्सा बन गए हैं. इसी बीच जन सुराज नेता पियूष प्रियदर्शी के एक बयान ने पटना स्नातक सीट की सियासत में नया ट्विस्ट जोड़ दिया है.
ADVERTISEMENT
पियूष प्रियदर्शी ने सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट किया है कि वह अनंत सिंह समर्थित जन सुराज उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह का समर्थन नहीं कर रहे हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट के जरिए अपना रुख सामने रखा और कहा कि उनका फैसला राजनीतिक लाभ से नहीं, बल्कि उनके सिद्धांतों और नैतिक प्रतिबद्धताओं से जुड़ा है.
हालांकि, पियूष ने अपनी पोस्ट में जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के समर्थन का सीधे तौर पर ऐलान नहीं किया है. लेकिन उनका अनुज सिंह से दूरी बनाने का फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि डॉ. अनुज सिंह को अनंत सिंह का समर्थन हासिल है और पियूष का अनंत सिंह के साथ पुराना राजनीतिक टकराव रहा है.
अनंत सिंह और पियूष के बीच पुराना राजनीतिक टकराव
पियूष प्रियदर्शी मोकामा विधानसभा चुनाव में जन सुराज के टिकट पर अनंत सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं. दोनों के बीच विधानसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक मुकाबला हुआ था. अब विधान परिषद चुनाव में अनंत सिंह जहां डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में नजर आ रहे हैं, वहीं पियूष ने उसी उम्मीदवार का समर्थन करने से इनकार कर दिया है.
यही वजह है कि पटना स्नातक एमएलसी चुनाव में उम्मीदवारों के साथ-साथ अनंत सिंह और पियूष प्रियदर्शी के राजनीतिक समीकरण की भी चर्चा हो रही है.
पियूष ने अपनी पोस्ट में कहा कि वह अनंत सिंह समर्थित जन सुराज उम्मीदवार का समर्थन नहीं कर रहे हैं. उन्होंने मतदाताओं से भी अपील की कि वे अपने विवेक, राजनीतिक मूल्यों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर सोच-समझकर अपने मत का इस्तेमाल करें.
दुलारचंद यादव मामले का भी किया जिक्र
अपने बयान में पियूष प्रियदर्शी ने दुलारचंद यादव की हत्या का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि विगत विधानसभा चुनाव के दौरान उनके काफिले पर हमला हुआ था और उनके तथा अनंत सिंह के समर्थकों के बीच झड़प हुई थी. पियूष के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम में उनके अभिभावक तुल्य दुलारचंद यादव की हत्या हुई. उन्होंने कहा कि इस मामले में उनकी ओर से अनंत सिंह और उनके सहयोगियों की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं.
पियूष ने यह भी कहा कि इस घटनाक्रम के बाद उनके सैकड़ों कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज हुए और कई लोगों को जेल जाना पड़ा. उन्होंने दावा किया कि इन मामलों को लेकर उनकी कानूनी लड़ाई अभी भी जारी है. यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पियूष की पोस्ट में लगाए गए आरोप उनके अपने दावे हैं. इन आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
'बाहुबल की राजनीति' पर पियूष ने उठाए सवाल
पियूष ने पटना स्नातक एमएलसी चुनाव की प्रकृति को भी अपने बयान का आधार बनाया. उन्होंने कहा कि यह कलम, ज्ञान और शिक्षित युवाओं से जुड़ा चुनाव है. उनका सवाल है कि यदि कोई प्रत्याशी अपराध और बाहुबल की राजनीति के आगे नतमस्तक होकर अपनी वैचारिक प्रतिबद्धताओं से समझौता करता है, तो वह शिक्षित समाज का प्रतिनिधित्व कैसे कर सकता है?
पियूष ने कहा कि उनके लिए राजनीतिक लाभ से ज्यादा महत्वपूर्ण नैतिकता है. इसी वजह से वह ऐसे राजनीतिक समीकरण का हिस्सा नहीं बन सकते, जिसे वह अपनी नैतिक प्रतिबद्धताओं के खिलाफ मानते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि नेतृत्व का काम केवल सत्ता हासिल करना नहीं है, बल्कि समाज को दिशा देना और सार्वजनिक जीवन में एक नैतिक मानक स्थापित करना भी है.
क्या पियूष अब नीरज कुमार के साथ हैं?
पियूष के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या उन्होंने जेडीयू के नीरज कुमार का समर्थन कर दिया है? लेकिन पियूष की पोस्ट को देखें तो उन्होंने नीरज कुमार के समर्थन का कोई सीधा ऐलान नहीं किया है. उन्होंने सिर्फ यह स्पष्ट किया है कि वह अनंत सिंह समर्थित जन सुराज प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह का समर्थन नहीं कर रहे हैं.
इसलिए फिलहाल उनके रुख को नीरज कुमार के समर्थन की औपचारिक घोषणा के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा. हालांकि, डॉ. अनुज सिंह से दूरी बनाने का उनका फैसला चुनावी समीकरणों की चर्चा में नीरज कुमार को जरूर एक अलग संदर्भ देता है.
अनंत सिंह के समर्थन से अनुज सिंह की चर्चा
पटना स्नातक सीट पर जन सुराज ने डॉ. अनुज सिंह को उम्मीदवार बनाया है. इस चुनाव में अनंत सिंह का उनके समर्थन में आना पहले से ही चर्चा का विषय बना हुआ है.
दूसरी ओर, जेडीयू के नीरज कुमार भी इस सीट से मैदान में हैं. ऐसे में पियूष प्रियदर्शी का डॉ. अनुज सिंह से दूरी बनाने का फैसला पुराने राजनीतिक टकराव के साथ जोड़कर देखा जा रहा है. यानी चुनावी मैदान में उम्मीदवार अलग-अलग हैं, लेकिन उनके समर्थन और विरोध के पीछे मौजूद राजनीतिक रिश्ते कहानी को और दिलचस्प बना रहे हैं.
करीब 88 हजार स्नातक मतदाताओं वाली सीट
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में पटना, नालंदा और नवादा जिले शामिल हैं. इस निर्वाचन क्षेत्र में 26 विधानसभा क्षेत्र आते हैं. पटना के 14, नालंदा के 7 और नवादा के 5 विधानसभा क्षेत्र इस सीट का हिस्सा हैं.
करीब 88 हजार स्नातक मतदाताओं वाली इस सीट पर अलग-अलग राजनीतिक दल और उम्मीदवार अपनी रणनीति के साथ मैदान में हैं. ऐसे में किसी प्रमुख नेता के समर्थन या विरोध से जुड़ा बयान चुनावी चर्चा को प्रभावित करने वाला मुद्दा बन सकता है. हालांकि, किसी नेता के रुख का वास्तविक चुनावी असर कितना होगा, यह मतदान और मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा.
पियूष ने कहा- दुलारचंद मामले में समझौता नहीं
पियूष ने अपनी पोस्ट में दुलारचंद यादव के परिवार और अपने समर्थकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. उन्होंने कहा कि वह इस मामले में किसी भी प्रकार का राजनीतिक समझौता नहीं कर सकते.
उन्होंने दावा किया कि दुलारचंद यादव मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई जारी है. पियूष ने कहा कि भविष्य में राजनीति में रहें या न रहें, वे ऐसे लोगों या तत्वों के साथ समझौता नहीं करेंगे, जिनके साथ खड़ा होना उनकी नैतिक प्रतिबद्धताओं के विपरीत हो. उनके मुताबिक, नैतिकता उनके लिए व्यक्तिगत या राजनीतिक लाभ से ज्यादा महत्वपूर्ण है.
पटना स्नातक चुनाव में नया सियासी सवाल
पियूष प्रियदर्शी के इस रुख ने पटना स्नातक एमएलसी चुनाव में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है. एक तरफ अनंत सिंह का समर्थन डॉ. अनुज सिंह के साथ है, तो दूसरी तरफ अनंत के पुराने राजनीतिक विरोधी पियूष प्रियदर्शी ने उसी उम्मीदवार का समर्थन करने से इनकार कर दिया है. हालांकि पियूष ने नीरज कुमार के समर्थन की सीधी घोषणा नहीं की है, लेकिन उनका फैसला चुनावी चर्चा में नीरज कुमार बनाम डॉ. अनुज सिंह के समीकरण को एक नया राजनीतिक एंगल जरूर देता है.
अब देखना यह होगा कि पियूष का यह रुख चुनाव के दौरान किस तरह की राजनीतिक चर्चा को जन्म देता है और क्या इसका असर पटना, नालंदा और नवादा के स्नातक मतदाताओं के बीच दिखाई देता है.
फिलहाल पटना स्नातक एमएलसी चुनाव की कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट यही है कि जन सुराज के नेता पियूष प्रियदर्शी ने अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह का समर्थन करने से इनकार कर दिया है, जबकि अनुज सिंह को अनंत सिंह का समर्थन हासिल है.
ADVERTISEMENT


