बगहा में नदी के दलदल में फंसा ट्रैक्टर, बदहाल रास्तों ने ली गर्भवती महिला की जान

हर्षिता सिंह

• 02:59 PM • 11 Aug 2026

बिहार के बगहा में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती दर्दनाक घटना! प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती महिला को अस्पताल ले जा रहा ट्रैक्टर हरहा नदी के कीचड़ में फंसा, समय पर इलाज न मिलने से महिला की मौत।

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बिहार में विकास के बड़े-बड़े दावों और 'हाई-टेक' स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच बगहा जिले से एक बेहद दर्दनाक और व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाली खबर सामने आई है. प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक गर्भवती महिला को परिजन जब अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में पड़ने वाली हरहा नदी के कीचड़ और दलदल में उनका ट्रैक्टर फंस गया.घंटों तक ट्रैक्टर को निकालने की जद्दोजहद चलती रही, लेकिन सही समय पर अस्पताल और इलाज न मिलने के कारण महिला ने रास्ते में ही तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया.

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जानिए क्या है पूरा मामला?

घटना बगहा के सुदूरवर्ती इलाके की है, जहां आजादी के दशकों बाद भी पक्की सड़क और पुल-पुलिया का निर्माण नहीं हो सका है. परिजनों के अनुसार, महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) शुरू हुई. गांव में एंबुलेंस या कोई चार पहिया वाहन आने का कोई रास्ता नहीं था, जिसके चलते परिजनों ने आनन-फानन में महिला को ट्रैक्टर की ट्रॉली पर लादा ताकि उसे जल्द से जल्द निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया जा सके.

हरहा नदी में फंसा ट्रैक्टर, एंबुलेंस भी नहीं पहुंच सकी

अस्पताल ले जाने के क्रम में रास्ते में पड़ने वाली उफनती और गाद से भरी हरहा नदी को पार करते समय ट्रैक्टर का चक्का नदी के गहरे कीचड़ और बालू में धंस गया. चालकों और स्थानीय लोगों ने ट्रैक्टर को बाहर निकालने की काफी कोशिश की, लेकिन ट्रैक्टर टस से मस नहीं हुआ.

दलदल में फंसी ट्रॉली पर महिला दर्द से कराहती रही. परिजनों ने आपातकालीन एंबुलेंस सेवा को भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन एंबुलेंस चालक ने भी रास्ता न होने और नदी में पानी-कीचड़ का हवाला देकर वहां आने से हाथ खड़े कर दिए.

समय पर इलाज न मिलने से टूटी सांसें

काफी मशक्कत के बाद जब तक महिला को किसी तरह नदी पार कराकर अस्पताल ले जाने का इंतजाम किया जाता, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. अत्यधिक दर्द और इलाज में हुई देरी के कारण गर्भवती महिला और उसकी कोख में पल रहे मासूम ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया. अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.घटना के बाद से मृतका के परिवार में कोहराम मचा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.

शासन और प्रशासन के दावों पर उठे गंभीर सवाल

यह घटना केवल एक हादसा नहीं है, बल्कि बिहार के ग्रामीण इलाकों में बदहाल सड़कों और लचर स्वास्थ्य व्यवस्था की कड़वी सच्चाई को बयां करती है.स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी आक्रोश है. लोगों का कहना है कि हर चुनाव में नदी पर पुल और पक्की सड़क बनाने के वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है.