बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर की 'जन सुराज' को टक्कर देने के लिए BJP के इन 4 चेहरों पर टिकी नजरें, नितिन नवीन लगाएंगे मुहर

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में जन सुराज के प्रशांत किशोर के सामने बीजेपी किसे उतारेगी? नील रतन घोष और डॉ. अजय आलोक समेत इन 4 बड़े नामों की चर्चा तेज है.

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बांकीपुर उपचुनाव बीजेपी के लिए बना साख का सवाल ?
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बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहा उपचुनाव बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है. जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर का इस सीट से चुनावी मैदान में उतरना लगभग तय माना जा रहा है, जिसकी आधिकारिक घोषणा 5 जुलाई को होने की उम्मीद है. साल 2025 के विधानसभा चुनाव में एक भी सीट न जीत पाने और लगभग सभी सीटों पर जमानत जब्त होने के बाद, प्रशांत किशोर के लिए यह उपचुनाव एक राजनीतिक संजीवनी बूटी की तरह है. खुद चुनावी मैदान में उतरकर पीके न केवल अपनी पार्टी की साख बचाना चाहते हैं, बल्कि चुनावी रणनीतिकार की छवि से ऊपर उठकर एक स्थापित नेता के रूप में विधानसभा पहुंचना चाहते हैं. 

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हालांकि, प्रशांत किशोर की राह इतनी आसान नहीं होने वाली है, क्योंकि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र पिछले 40-45 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का सबसे मजबूत और सुरक्षित किला रहा है. यह सीट हाल ही में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नितिन नवीन की रही है, जिन्होंने अध्यक्ष बनने के बाद विधायक पद से इस्तीफा दिया है. ऐसे में बीजेपी के इस अभेद्य गढ़ में प्रशांत किशोर को घेरने के लिए पार्टी किस चेहरे पर दांव लगाएगी, इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है. माना जा रहा है कि नितिन नवीन की पसंद ही उम्मीदवार के नाम पर अंतिम मुहर लगाएगी. 

बीजेपी कोटे से रेस में चल रहे ये 4 प्रमुख नाम

1. नील रतन घोष (सबसे आगे)

इस रेस में सबसे पहला और मजबूत नाम नील रतन घोष का है. वह बांकीपुर क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय और बीजेपी के बेहद कर्मठ कार्यकर्ता हैं. नील रतन घोष की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वे निवर्तमान विधायक और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के बेहद करीबी माने जाते हैं. साथ ही, वह कायस्थ समाज से आते हैं, जिसकी बांकीपुर विधानसभा में भारी बहुलता है. पिछले कई दशकों से इस सीट पर कायस्थ उम्मीदवारों का ही दबदबा रहा है, इसलिए उनकी दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है. 

2. डॉ. अजय आलोक

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. अजय आलोक इस लिस्ट में दूसरा बड़ा चेहरा हैं. पेशे से डॉक्टर अजय आलोक टीवी डिबेट्स में अपनी आक्रामक बयानबाजी और पार्टी का पक्ष दमदार तरीके से रखने के लिए जाने जाते हैं. वे भी कायस्थ समाज से आते हैं. हालांकि उनका पिछला चुनावी रिकॉर्ड (2005 में लोजपा और 2010 में बसपा के टिकट पर चैनपुर से हार) उनके पक्ष में नहीं रहा है, लेकिन जेडीयू से होते हुए बीजेपी में आए अजय आलोक इस समय राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का एक चर्चित चेहरा हैं. 

3. आशीष सिन्हा 

तीसरा नाम आशीष सिन्हा का है, जो कुम्हरार से कई बार बीजेपी के विधायक रहे वरिष्ठ कद्दावर नेता अरुण सिन्हा के बेटे हैं. साल 2025 के चुनाव में उम्र के तकाजे के कारण अरुण सिन्हा का टिकट कट गया था, जिसके बाद से वे अपने बेटे के लिए पैरवी कर रहे हैं. बीजेपी के पुराने और वफादार परिवार से ताल्लुक रखने के कारण आशीष सिन्हा का नाम भी रेस में बना हुआ है. 

4. ऋतु जायसवाल 

इस रेस में चौथा और चौंकाने वाला नाम ऋतु जायसवाल का है, जिन्होंने हाल ही में आरजेडी (RJD) का दामन छोड़कर बीजेपी की सदस्यता ली थी. मूल रूप से सीतामढ़ी की रहने वाली ऋतु जायसवाल वैश्य समाज से आती हैं. बांकीपुर में कायस्थों के बाद वैश्य मतदाताओं की भी अच्छी-खासी तादाद है. अगर बीजेपी सामाजिक समीकरणों या महिला उम्मीदवार को प्राथमिकता देने का मन बनाती है, तो ऋतु जायसवाल पर दांव खेला जा सकता है. 

महागठबंधन का रुख और अन्य उम्मीदवार 

चूंकि बांकीपुर एक तरह से शहरी क्षेत्र है, इसलिए पारंपरिक रूप से यहां राष्ट्रीय जनता दल (RJD) या महागठबंधन की पकड़ कमजोर रही है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आरजेडी यहां अपना उम्मीदवार उतारेगी या प्रशांत किशोर को वॉकओवर देकर परोक्ष रूप से मदद करेगी? यदि महागठबंधन यहां प्रत्याशी नहीं उतारता है, तो आरजेडी का वोट बैंक सीधे पीके की तरफ शिफ्ट हो सकता है. दूसरी तरफ, तेज प्रताप यादव की पार्टी 'जनशक्ति जनता दल' ने पटना की जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता वीना मानवी को अपना उम्मीदवार घोषित कर चुनावी मैदान को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की है. 

नितिन नवीन और सम्राट चौधरी की प्रतिष्ठा दांव पर 

बांकीपुर उपचुनाव न केवल प्रशांत किशोर के राजनीतिक भविष्य के लिए अहम है, बल्कि बीजेपी के लिए भी यह प्रतिष्ठा का मुकाबला है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में होने वाला यह पहला बड़ा उपचुनाव है, और खुद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की छोड़ी हुई सीट होने के कारण बीजेपी अपने इस किले को किसी भी कीमत पर गंवाना नहीं चाहेगी. अंतिम रूप से मुकाबला 'बीजेपी बनाम प्रशांत किशोर' के बीच ही केंद्रित रहने की उम्मीद है. 

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