Bankipur By-Election: बीजेपी के इस मजबूत गढ़ में प्रशांत किशोर बिगाड़ेंगे खेल? जनता का मूड जानकर उड़ जाएगी नींद!

अनिकेत कुमार

• 01:10 PM • 09 Jul 2026

Bankipur Bypoll 2026: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव 2026 में बीजेपी के मजबूत गढ़ में क्या प्रशांत किशोर बड़ा उलटफेर कर पाएंगे? ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए स्थानीय लोगों, दुकानदारों और युवाओं का चुनावी मूड, बीजेपी उम्मीदवार को लेकर क्या राय है, विकास, रोजगार और जलजमाव जैसे मुद्दों पर जनता क्या सोचती है और आखिर किसके पक्ष में बनता दिख रहा है माहौल.

Bankipur By Election
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बिहार की राजधानी पटना की सबसे हाई-प्रोफाइल सीटों में से एक बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. इस उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) समेत तमाम प्रमुख दलों ने अपने उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतार दिए हैं. लेकिन इस बार का मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है, क्योंकि चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर भी इस सीट पर पूरी ताकत के साथ प्रचार करने उतर चुके हैं. पिछले करीब 30 से 35 सालों से भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर क्या प्रशांत किशोर कोई बड़ा उलटफेर कर पाएंगे, इसे जानने के लिए ग्राउंड जीरो से स्थानीय लोगों और दुकानदारों की राय ली गई.

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क्या बीजेपी के किले में सेंध लगा पाएंगे प्रशांत किशोर?

पटना के खेतान मार्केट और दरियापुर गोला इलाके के स्थानीय लोगों और दुकानदारों के बीच चुनावी सरगर्मी साफ देखी जा सकती है. कई स्थानीय मतदाताओं का मानना है कि इस बार बांकीपुर सीट पर मुकाबला बेहद कड़ा और आमने-सामने का होने वाला है. लोगों का कहना है कि दोनों ही तरफ के उम्मीदवार काफी मजबूत हैं और इस बार भाजपा के लिए अपनी इस परंपरागत सीट को बचाना उतना आसान नहीं होगा.

स्थानीय युवाओं और दुकानदारों के एक बड़े वर्ग का मानना है कि प्रशांत किशोर एक बहुत अच्छे और नए उम्मीदवार हैं और इस बार उन्हें एक मौका जरूर मिलना चाहिए. लोगों का कहना है कि इतने सालों से यहां एक ही पार्टी जीतती आ रही है, इसलिए व्यवस्था में बदलाव बेहद जरूरी है ताकि विकास कार्यों में और तेजी आ सके.

बांकीपुर के मतदाताओं के मुख्य मुद्दे और परेशानियां

चुनावों के बीच बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के लोगों की अपनी कई स्थानीय समस्याएं हैं, जो इस बार के चुनाव में मुख्य मुद्दा बनती नजर आ रही हैं. खेतान मार्केट इलाके के दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने बताया कि बरसात के दिनों में जलजमाव (पानी भरने) की समस्या यहां की सबसे बड़ी परेशानी है. इसके अलावा, सड़क किनारे दुकान लगाने वाले गरीब दुकानदारों को 'हल्ला गाड़ी' (प्रशासनिक अतिक्रमण हटाओ दस्ता) के आने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

स्थानीय लोगों की मांग है कि सरकार को इन गरीब दुकानदारों के लिए कोई ठोस व्यवस्था करनी चाहिए. वहीं, इलाके के युवा मतदाताओं का स्पष्ट कहना है कि उनके लिए सबसे बड़े मुद्दे शिक्षा और रोजगार हैं और उन्हें उम्मीद है कि प्रशांत किशोर इन मुद्दों पर कुछ बेहतर काम कर सकते हैं.

प्रशांत किशोर के समर्थन में उठी बदलाव की मांग

मैदान में उतरे प्रशांत किशोर को लेकर स्थानीय लोगों में काफी उम्मीदें दिखाई दे रही हैं. बातचीत के दौरान कुछ लोगों ने खुलकर 'प्रशांत किशोर जिंदाबाद' के नारे भी लगाए. उनका कहना है कि भले ही इस क्षेत्र को बीजेपी का गढ़ कहा जाता हो, लेकिन जनता को अंततः काम और विकास चाहिए. स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर प्रशांत किशोर जीतते हैं, तो लोगों को लगेगा कि क्षेत्र में कुछ नया और बेहतर काम हो रहा है. लोगों का यह भी कहना है कि यदि बांकीपुर की जनता प्रशांत किशोर का साथ देती है, तो वह निश्चित रूप से इस चुनाव में बड़ी जीत दर्ज कर सकते हैं.

'नितिन नवीन के काम के आगे कोई नहीं टिकेगा'

जहां एक तरफ प्रशांत किशोर को लेकर लोगों में उत्साह दिख रहा है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के परंपरागत समर्थक इस बात से पूरी तरह असहमत नजर आते हैं. क्षेत्र के कुछ पुराने दुकानदारों और नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि प्रशांत किशोर चाहे जितनी कोशिश कर लें, वह बीजेपी को इस सीट पर कभी टक्कर नहीं दे पाएंगे.

उनका तर्क है कि बांकीपुर हमेशा से बीजेपी का गढ़ रहा है और आगे भी रहेगा. स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां से पूर्व विधायक नितिन नवीन ने बहुत ही शानदार काम किया है और उनके द्वारा छोड़े गए अधूरे विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए भाजपा ने जिस नए चेहरे (अभिषेक) को मैदान में उतारा है, वह भी बेहद योग्य उम्मीदवार हैं. उनका मानना है कि इस चुनाव का मुख्य एजेंडा सिर्फ और सिर्फ विकास है, जिसके दम पर भाजपा एक बार फिर भारी मतों से जीत हासिल करेगी.

यहां देखें वीडियो

प्रशांत किशोर के लिए 'करो या मरो' का मुकाबला बना बांकीपुर उपचुनाव, क्या बीजेपी के इस अभेद्य किले में लगा पाएंगे सेंध?