बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान का काम संपन्न हो गया है. मतदान वाले दिन सुबह से ही बांकीपुर में राजनीतिक सरगर्मी बनी रही. वोटिंग के दौरान बीजेपी और जन सुराज पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प और आरोप-प्रत्यारोप का दौर देखने को मिला. दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे पर नियमों की अनदेखी करने और धांधली के गंभीर आरोप लगाए . हालांकि, इन आरोपों के बीच सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात रही बांकीपुर का निराशाजनक वोटिंग प्रतिशत, जो महज 34 से 35 फीसदी के आसपास ही सिमट कर रह गया. फिलहाल फाइनल आंकड़े जारी नहीं किए है लेकिन अब सवाल उठने लगा है कि इस कम वोटिंग से किसे फायदा और किसे नुकसान पहुंचा है? आइए विस्तार से समझते है पूरी बात.
ADVERTISEMENT
कम वोटिंग परसेंटेज का क्या है सियासी गणित?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदान प्रतिशत का अचानक बढ़ना या घटना दोनों ही स्थितियां भ्रम पैदा करती हैं. आमतौर पर जब भारी संख्या में मतदान होता है, तो इसे दो चश्मों से देखा जाता है- पहला यह कि जनता मौजूदा सरकार से असंतुष्ट है और बदलाव चाहती है, और दूसरा यह कि जनता मौजूदा व्यवस्था से बेहद संतुष्ट है और उसे बरकरार रखना चाहती है. लेकिन जब बांकीपुर जैसा बेहद कम मतदान प्रतिशत सामने आता है, तो समीकरण और उलझ जाते हैं. इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि मतदाताओं के भीतर इस चुनाव को लेकर कोई खास उत्साह या खुशी नहीं थी. यह कम वोटिंग रुझान किसी भी दल के पक्ष या विपक्ष में एकतरफा फैसला सुनाने में नाकाम साबित होता है.
बीजेपी की साख दांव पर, क्या PK को मिलेगा संजीवनी का फायदा?
बांकीपुर सीट को भारतीय जनता पार्टी का मजबूत किला माना जाता रहा है. यह सीट बीजेपी के लिए साख और नाक का सवाल बनी हुई है. अगर पार्टी यह सीट गंवाती है तो इसका संदेश सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि देश भर के राजनीतिक हलकों में जाएगा. दूसरी तरफ, प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी जन सुराज ने इस चुनाव में बीजेपी के सामने कड़ी चुनौती पेश की है. 2025 के चुनावों के बाद से राजनीतिक रूप से कम सक्रिय दिख रहे प्रशांत किशोर के लिए बांकीपुर उपचुनाव किसी संजीवनी से कम नहीं माना जा रहा है.
तेजस्वी यादव की भूमिका और वोटों का बंटवारा
इस पूरे उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव की भूमिका बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है. तेजस्वी यादव ने अंतिम दिनों में ताबड़तोड़ रैलियां और दो दिनों का आक्रामक रोड शो किया. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि अगर विपक्ष के वोट बंटते हैं, तो तेजस्वी की इस आक्रामकता का सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता है. अंदरखाने यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि कोई भी स्थापित दल नहीं चाहता कि प्रशांत किशोर जीतकर विधानसभा पहुंचे और एक नया विपक्षी चेहरा बनकर उभरें.
3 अगस्त को आएंगे नतीजे
महीने भर से चला आ रहा आक्रामक चुनाव प्रचार और दावों का दौर अब थम चुका है. मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी राजनीतिक दलों के साथ-साथ जनता की नजरें भी 3 अगस्त को आने वाले नतीजों पर टिकी हुई हैं. देखना दिलचस्प होगा कि बांकीपुर की जनता ने बीजेपी का साथ बरकरार रखा है या फिर प्रशांत किशोर अथवा आरजेडी के पक्ष में बदलाव का जनादेश दिया है.
यहां देखें वीडियो
ADVERTISEMENT


