बिहार की बहुचर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर मतगणना से ठीक पहले सियासी पारा चढ़ गया है. जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पटना पुलिस और विशेष रूप से पटना एसएसपी पर चुनाव को प्रभावित करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है. पीके ने सबूतों और पीड़ितों को मीडिया के सामने लाते हुए पुलिसिया कार्रवाई पर कई गंभीर सवाल खड़े किए.
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'एसएसपी का दावा झूठा, घर में सो रहे स्थानीय लोगों को उठाया गया'
प्रशांत किशोर ने पटना एसएसपी कार्यालय द्वारा जारी उस पत्र को मीडिया को दिखाया, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव में धारा 144 का उल्लंघन करने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए केवल बाहरी लोगों को डिटेन/अरेस्ट किया गया था.
प्रशांत किशोर ने इस दावे को पूरी तरह झूठा करार देते हुए कहा कि पुलिस ने 54 से ज्यादा जन सुराज कार्यकर्ताओं और समर्थकों को उठाया है. इनमें से ज्यादातर लोग स्थानीय मतदाता हैं, जिनके घरों में रात के 2 बजे घुसकर पुलिस ने दबिश दी. जब लोग अपने घरों में सो रहे थे, तो वे 144 का उल्लंघन कैसे कर सकते हैं.
पीड़ितों ने बताई अपनी आपबीती
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीके ने खुद पीड़ितों को मीडिया के सामने पेश किया. जिसमें नवल किशोर गुप्ता ने बताया कि बताया कि रात 2 बजे पुलिस उनके घर का दरवाजा पीटकर उन्हें राजीव नगर थाने ले गई और दिनभर घुमाने के बाद चुनाव खत्म होने के 1 घंटा पहले बूथ पर वोट दिलवाकर छोड़ा. वहीं बुजुर्ग महिला निभा भूषण ने बताया कि एक घर में पुलिस जबरन घुसी और लोगों को वोट डालने जाने से डराया-धमकाया. फिर सुजीत चंद्रवंशी ने आरोप लगाया कि एक ही दिन में तीन बार पुलिस उनके घर पहुंची और लगभग 100 पुलिसकर्मियों व सीएपीएफ बलों ने उनके घर का दरवाजा पीटा.
नीतीश की तारीफ करने लगे प्रशांत
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान बीजेपी के लोग आगे-आगे चल रहे थे और वे जिन-जिन लोगों को चिन्हित कर रहे थे, पुलिस सादे कपड़ों में आकर उन्हें उठा रही थी. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के 20 साल के शासन में पुलिस प्रशासन का ऐसा दुरुपयोग कभी देखने को नहीं मिला. पीके ने यह भी खुलासा किया कि चुनाव पर्यवेक्षकों और डीएम ने तो फोन उठाए, लेकिन एसएसपी लगातार 'इन-कम्युनिकेडो' रहे और किसी का फोन नहीं उठाया.
अधिकारियों को प्रशांत की चेतावनी
प्रशांत किशोर ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वे पटना एसएसपी के खिलाफ दिल्ली चुनाव आयोग और उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे. इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय थाना प्रभारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जो पुलिस अधिकारी संविधान के खिलाफ जाकर बीजेपी के एजेंट की तरह काम कर रहे हैं, उनके खिलाफ आखिरी दम तक कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी.
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