बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की मतगणना के शुरुआती राउंड से शुरू हुए रुझानों से लेकर लगभग अभी तक जन सुराज के संस्थापक और उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने बड़ी बढ़त बना रखी है. वोटों की गिनती के दौरान 15वें से 17वें राउंड तक प्रशांत किशोर करीब 50 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करते दिखे हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लगभग 36 प्रतिशत और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को महज 10 से 11 प्रतिशत वोट ही मिलते नजर आ रहे हैं. 'बिहार तक' से बातचीत करते हुए डेटा एजेंसी रुद्रा रिसर्च के फाउंडिंग डायरेक्टर विशाल लिंगायत ने बताया कि उनका एग्जिट पोल भी ठीक इसी रुझान को दर्शा रहा था और जमीन पर जन सुराज की रणनीति पूरी तरह कारगर साबित हुई है.
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एग्जिट पोल के आंकड़े सटीक साबित, 31 राउंड तक बना रह सकता है रुझान
रुद्रा रिसर्च के डायरेक्टर विशाल लिंगायत के अनुसार, उनकी टीम ने पिछले 15 दिनों तक बांकीपुर में ग्राउंड असेसमेंट किया था. उपचुनाव में आमतौर पर सटीक अनुमान लगाना मुश्किल होता है, लेकिन बांकीपुर में 31 राउंड की कुल काउंटिंग में से आधे से अधिक राउंड होने के बाद जो ट्रेंड दिखा है, आगे भी उसी के बरकरार रहने की संभावना है. बीजेपी के पारंपरिक गढ़ वाले वार्डों में भी जन सुराज ने बड़ी सेंधमारी की है. केवल एक-दो राउंड को छोड़ दें तो लगभग सभी राउंड में प्रशांत किशोर ने बीजेपी और आरजेडी दोनों पर बढ़त बनाए रखी है.
मुद्दों की राजनीति और सीधा अटैक: क्या रही प्रशांत किशोर की रणनीति?
विशाल लिंगायत ने बताया कि प्रशांत किशोर की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि उन्होंने चुनाव को किसी जातिगत दायरे में बांधने के बजाय विशुद्ध रूप से स्थानीय और विकास के मुद्दों पर केंद्रित रखा. अभियान के दौरान उन्होंने ड्रेनेज, बेरोजगारी और स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाया. इसके अलावा, रणनीति के तहत प्रशांत किशोर ने स्थानीय बीजेपी उम्मीदवार नितिन नवीन पर सीधा हमला करने से परहेज किया और अपना पूरा निशाना बिहार सरकार व सम्राट चौधरी पर साधा. जब बीजेपी ने अपना उम्मीदवार बदला और मंडल अध्यक्ष स्तर के कार्यकर्ता को टिकट दिया, तब जन सुराज ने इसे अपनी पहली नैतिक जीत बताते हुए नैरेटिव अपने पक्ष में कर लिया.
जातिगत दीवारें टूटीं: सवर्ण, यादव और मुस्लिम वोटरों का मिला साथ
बिहार की पारंपरिक जातिगत राजनीति से इतर बांकीपुर उपचुनाव में एक अनोखा ट्रेंड देखने को मिला है. रुद्रा रिसर्च के मुताबिक, प्रशांत किशोर स्वयं सवर्ण समाज से आते हैं और उन्हें लगभग 40 प्रतिशत तक सवर्ण (ब्राह्मण, कायस्थ, भूमिहार और राजपूत) वोट मिले हैं. इसके साथ ही, आरजेडी के पारंपरिक वोट बैंक यानी यादव और दलित समुदाय के बड़े हिस्से ने भी जन सुराज का रुख किया. वहीं, लगभग 70 से 75 प्रतिशत मुस्लिम वोटरों ने बीजेपी को हराने में सक्षम विकल्प के रूप में जन सुराज को चुना. तेजस्वी यादव का चुनाव प्रचार में देरी से आना (अंतिम दो दिनों में आना) भी RJD के पिछड़ने का बड़ा कारण बना, जिससे लड़ाई सीधे बीजेपी बनाम जन सुराज हो गई.
छात्र आंदोलन और 18 से 35 वर्ष के युवाओं का जन सुराज की तरफ झुकाव
बांकीपुर क्षेत्र पटना में शिक्षा और छात्रों का एक बड़ा केंद्र माना जाता है. दिल्ली और पटना में हुए छात्र आंदोलनों व प्रोटेस्ट का सीधा असर इस चुनाव पर पड़ा. आंकड़ों के अनुसार, 18 से 35 वर्ष के वर्ग में 50 प्रतिशत से अधिक झुकाव प्रशांत किशोर और जन सुराज की तरफ देखा गया. युवाओं ने पार्टी और जातिगत बंधनों से ऊपर उठकर प्रशांत किशोर के अग्रेसिव कैंपेन और असेंबली में उनकी आवाज बनने की क्षमता पर भरोसा जताया.
बिहार की राजनीति में नए युग की शुरुआत
रुद्रा रिसर्च के डायरेक्टर का मानना है कि बांकीपुर में खुद प्रशांत किशोर का उम्मीदवार होना एक विशेष स्थिति थी, क्योंकि आगे हर सीट पर वे खुद प्रत्याशी नहीं होंगे. हालांकि, इस उपचुनाव के नतीजों और रुझानों ने यह साबित कर दिया है कि प्रशांत किशोर अब बिहार की राजनीति में एक गंभीर और मजबूत राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित हो चुके हैं. जाति-विरहित राजनीति और बेरोजगारी व पलायन जैसे मुद्दों को उठाकर वे बिहार के राजनीतिक पटल पर एक बड़े चेहरे के तौर पर उभरे हैं.
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