भरत तिवारी एनकाउंटर पर बिहार में भारी बवाल, अब प्रशांत किशोर की पार्टी ने सड़कों पर उतरकर की ये बड़ी मांग

भोजपुर में कथित पुलिस एनकाउंटर में भरत तिवारी की मौत के बाद बिहार में सियासी बवाल मच गया है. इसके विरोध में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने पटना में कैंडल मार्च निकालकर आरोपी पुलिस अधिकारियों के निलंबन और उन पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है.

प्रशांत कुमार
प्रशांत कुमार

न्यूज तक डेस्क

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बिहार में एक बार फिर कथित पुलिस एनकाउंटर को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड स्थित बिलोटी गांव के रहने वाले युवक भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद अब आम जनता से लेकर राजनीतिक गलियारों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है. इस मामले में अब पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं. सवाल उठाया जा रहा है कि क्या भरत तिवारी का यह एनकाउंटर असली था, या फिर यह एक सोची-समझी और सुनियोजित हत्या थी.

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परिजनों का आरोप- 'सरेंडर के बाद मारी गई गोली'

दरअसल, भरत तिवारी के परिजनों और विरोधियों का सीधा आरोप है कि भरत ने पुलिस के सामने पूरी तरह सरेंडर (आत्मसमर्पण) कर दिया था. इसके बावजूद उन्हें पुलिस द्वारा गोली मार दी गई. यह आरोप इस पूरे मामले को बेहद संदिग्ध और संवेदनशील बना देता है. आरोप लगाया जा रहा है कि यह एनकाउंटर नहीं बल्कि कानून की आड़ में की गई गुंडागर्दी है.

सड़कों पर उतरी प्रशांत किशोर की पार्टी 'जन सुराज'

इस कथित एनकाउंटर के विरोध में रविवार को राजधानी पटना के कारगिल चौक पर प्रशांत किशोर की पार्टी 'जन सुराज' ने मोर्चा खोल दिया. जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर एक विशाल कैंडल मार्च निकाला और शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं के हाथों में जो बैनर थे, वे सरकार और पुलिस प्रशासन को सीधे कटघरे में खड़ा कर रहे थे. बैनरों पर साफ तौर पर लिखा था:

  • "फर्जी गोली नहीं चलेगी, गोली का नहीं संविधान का राज चलेगा."
  • "सरेंडर के बाद हत्या, लोकतंत्र पर आघात है."
  • "भारत तिवारी को न्याय दिलाओ."

जन सुराज ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से की बड़ी मांग

प्रदर्शन के दौरान जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की. उन्होंने कहा कि जिस तरह से एक सामाजिक कार्यकर्ता का कथित एनकाउंटर किया गया है, वह बेहद शर्मनाक है.

जब उनसे सवाल किया गया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मामले की जांच के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाने की बात कही है, तो मनोज भारती ने इसे 'आई वाश' (दिखावा) करार दिया. उन्होंने मांग करते हुए कहा:

  • तत्काल निलंबन: जांच शुरू होने से पहले इस घटना और कथित हत्या में शामिल सभी पुलिस पदाधिकारियों, संबंधित एसडीओ (SDO) और अधिकारियों को तुरंत निलंबित किया जाए.
  • हत्या का मुकदमा: इन सभी अधिकारियों को पद से हटाने के बाद ही न्यायिक जांच शुरू हो और इन पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए.

क्या यह कानून का राज है?

मनोज भारती ने बिहार पुलिस के ट्रेनिंग सिस्टम पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि पुलिस को ऐसा 'नालायक' प्रशिक्षण दिया गया है कि अगर कोई उन्हें गाली दे तो क्या वे उसे गोली मार देंगे? यह सीधे तौर पर गुंडागर्दी है.

अब यह पूरा मामला सिर्फ एक एनकाउंटर की सच्चाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार में पुलिस की जवाबदेही, कानून के राज और उस आम नागरिक के मौलिक अधिकारों पर एक बड़ा सवालिया निशान बन गया है, जो सरेंडर करने के बाद भी सुरक्षित नहीं रह सका. फिलहाल इस मामले में बिहार पुलिस चौतरफा घिरती नजर आ रही है.

 

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