बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर सूबे की सियासत गरमा गई है. भरतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने इस एनकाउंटर को पूरी तरह से फर्जी यानी फेक एनकाउंटर करार देते हुए पुलिस प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. अश्विनी चौबे ने बिलोटी गांव का दौरा करने और पीड़ित परिवार व ग्रामीणों से मुलाकात करने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर तीखा हमला बोला और कहा कि जिस पुलिसकर्मी ने भी इस घटना को अंजाम दिया है, वह अपराधी और हिंसक है.
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हनुमान जी का लॉकेट बेचकर लाया था पिस्टल
अश्विनी चौबे ने भावुक और आक्रोशित होते हुए बताया कि भरत तिवारी कोई पेशेवर अपराधी नहीं था. बचपन में उसकी मां ने उसे हनुमान जी का एक सोने का लॉकेट पहनाया था, जिसे बेचकर वह अपने हाथ में एक छोटा सा पिस्टल लेकर आया था. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी क्या परिस्थिति बन गई कि एक बेहद अनुशासित लड़के को, जिस पर कभी एक छोटा सा 107 का मुकदमा भी नहीं हुआ था, उसे पिस्टल उठानी पड़ी? उन्होंने कहा कि इसके पीछे प्रशासनिक भ्रष्टाचार का बड़ा आक्रोश था, जिसके खिलाफ वह लड़का अकेले लड़ रहा था.
एनकाउंटर पूरी तरह से फर्जी, पुलिस ही असली हत्यारी है
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने साफ लफ्जों में कहा कि यह एनकाउंटर नहीं, बल्कि सीधी हत्या है. एनकाउंटर तब कहा जाता है जब अपराधियों के साथ पुलिस की मुठभेड़ हो रही हो, लेकिन भरत तिवारी कोई अपराधी नहीं बल्कि एक सामाजिक कार्यकर्ता था. उन्होंने कहा कि पुलिस के जिस कर्मी ने भी इसे मुठभेड़ की संज्ञा दी है, वह खुद एक अपराधी है.
चौबे ने दावा किया कि उनकी बक्सर एसपी से 19 तारीख को टेलीफोन पर लंबी बातचीत हुई थी, जिसमें एसपी ने माना था कि उनके लोग गए थे और भरत तिवारी से करीब 3 घंटे तक बातचीत हुई थी. ऐसे में अश्विनी चौबे ने सवाल उठाया कि जब वह आराम से बात कर रहा था और उसने कोई पिस्टल नहीं तानी थी, तो पुलिस ने उसे दबोचकर गिरफ्तार क्यों नहीं किया?
सरेंडर करने के बाद घसीटकर मारी गई चार गोलियां
ग्रामीणों और पीड़ित परिवार के बयानों का हवाला देते हुए अश्विनी चौबे ने बताया कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था. उसने कहा था कि यदि उसकी मांगें पूरी की जाती हैं, तो वह हथियार छोड़ देगा और उसने हथियार छोड़ भी दिया था. इसके बाद वहां मौजूद गरीब जनता, उसकी मां और भाभी को पुलिस ने लाठियां चलाकर खदेड़ दिया. बिना महिला पुलिस के ही मां-बहनों के साथ बदसलूकी की गई, उनके बाल (झोटा) पकड़कर खींचे गए और उन्हें दूर हटा दिया गया. इसके बाद ग्रामीणों के सामने ही सरेंडर कर चुके भरत तिवारी को घसीटकर चार गोलियां मारी गईं.
गरीबों और विस्थापितों का मसीहा था भरत तिवारी
अश्विनी चौबे ने बिलौटी गांव के विस्थापितों की दयनीय स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि भरत तिवारी उन अति पिछड़ों, निषाद, मांझी, कमकर, यादव, कुशवाहा और गरीब ब्राह्मण परिवारों की लड़ाई लड़ रहा था, जिन्हें बाढ़ के कारण विस्थापित कर गड्ढों में रहने को मजबूर कर दिया गया है. खुले आकाश के नीचे रह रहे इन 200 से अधिक परिवारों के पास पीने का साफ पानी तक नहीं है.
भरत तिवारी ने अपने दम पर वहां बिजली पहुंचवाई और दो चापाकल लगवाए. चौबे ने खुद वहां के चापाकल का पानी चलवाकर देखा, जो इतना गंदा और कीड़ों से भरा था कि उसे मासूम बच्चे पीने को मजबूर हैं. इसी भ्रष्टाचार के खिलाफ भरत तिवारी ने स्थानीय एसडीएम और एसडीओ से बात करते हुए कहा था कि यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्हें 'भगत सिंह' बनना पड़ेगा.
दोषी पुलिसकर्मियों को तुरंत जेल भेजने की मांग
घटना की जांच पर बात करते हुए अश्विनी चौबे ने कहा कि सरकार ने इस मामले की जांच बैठा दी है, जिसके लिए वह धन्यवाद देते हैं. लेकिन दूध का दूध और पानी का पानी होना बेहद जरूरी है. उन्होंने बताया कि प्राथमिक दृष्टि में दोषी पाए जाने पर जिन चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया है, सिर्फ उतना ही काफी नहीं है. चौबे ने एसपी से मांग की है कि इन दोषी पुलिसकर्मियों को अविलंब गिरफ्तार कर जेल के अंदर डाला जाए, उनके अस्त्र-शस्त्र और हथियार तुरंत जब्त किए जाएं और उन पर हत्या का मुकदमा चलाकर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए.
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Bharat Tiwari Encounter: भरत तिवारी के मोबाइल को लेकर मां ने किया बड़ा खुलासा, जानें क्या बताया
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