बिहार में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर तनाव और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है. इस घटना के बाद से पूरे गांव में हाहाकार मचा हुआ है और ग्रामीण व परिजन न्याय की गुहार लगा रहे हैं. हालांकि बिहार सरकार ने मामले को बढ़ता देख देर रात कई बड़े आदेश जारी किए हैं, लेकिन भरत तिवारी का परिवार सरकार के इन फैसलों से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है. परिवार ने अब दोषी पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा देने की मांग की है और न्याय न मिलने पर देश की राजधानी दिल्ली में एक बड़ा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है.
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सरकारी कार्रवाई से संतुष्ट नहीं परिवार, फांसी की मांग पर अड़े
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इस मामले की जांच प्रक्रिया में कई बड़े बदलाव किए गए हैं. देर रात जारी सरकारी आदेश के अनुसार, भरत तिवारी के माता-पिता और स्थानीय ग्रामीणों पर दर्ज किए गए मुकदमों को हटाने का फैसला लिया गया है. इसके साथ ही जगदीशपुर के एसडीपीओ (SDPO) को जांच से पूरी तरह अलग कर दिया गया है ताकि निष्पक्ष और त्वरित जांच की जा सके.
इन सब के बावजूद, परिजनों का कहना है कि सरकार द्वारा उठाए गए ये कदम नाकाफी हैं. भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा, "हम सरकार के इन फैसलों से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं. हमारी मां और पूरे गांव की मुख्य मांग यह है कि दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या (धारा 302) का मुकदमा दर्ज किया जाए और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा, यानी या तो उम्रकैद या फिर फांसी की सजा दी जाए. इस सब (लाइन हाजिर या जांच बदलने) से कुछ नहीं होने वाला."
'शहीद' का दर्जा और गांव का नाम बदलने की मांग
चंदन तिवारी ने आगे बताया कि भरत तिवारी एक देशभक्त और राष्ट्रवादी इंसान थे, जिन्हें पूरा देश अब जान चुका है. उन्होंने मांग की है कि भरत तिवारी को 'शहीद' का दर्जा दिया जाए. इसके अलावा, स्थानीय ग्रामीणों की यह भी मांग है कि उनके गांव का नाम बदलकर भरत तिवारी के नाम पर रखा जाए.
गांव में जुटी महापंचायत, दिल्ली कूच की तैयारी
भरत तिवारी एनकाउंटर के खिलाफ और न्याय की मांग को लेकर गांव में एक विशाल 'महापंचायत' का आयोजन किया गया है, जिसमें भारी संख्या में लोग एकजुट हो रहे हैं. चंदन तिवारी ने उम्मीद जताई कि जनता उनके साथ खड़ी है और इस महापंचायत से उनकी आवाज और बुलंद होगी.
वहीं दूसरी ओर, सरकार के रुख को देखते हुए भरत तिवारी के भाई रवश भारद्वाज ने अब इस लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का ऐलान किया है. परिजनों के मुताबिक, अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे इस बार सीधे दिल्ली में एक बड़ा और व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे. अब देखना यह होगा कि इस महापंचायत के बाद प्रशासन का क्या रुख रहता है और परिजनों का अगला कदम क्या होता है.
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