भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में आरा सिविल कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है. भरत तिवारी के परिजनों की ओर से अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने कोर्ट के सामने जांच और आरोपित पुलिसकर्मियों की भूमिका से जुड़े 11 अहम बिंदु रखे. कोर्ट ने इन बिंदुओं पर पुलिस से अब तक की कार्रवाई और जांच की स्थिति की जानकारी मांगी है.
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बुधवार को आरा सिविल कोर्ट में सुनवाई
हालांकि, सुनवाई के बाद वकील की ओर से 11 लोगों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने का दावा किया गया, जबकि कोर्ट की ओर से स्पष्ट किया गया कि इन 11 लोगों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी नहीं किया गया है. ऐसे में कोर्ट की वास्तविक कार्रवाई और वकील के दावे के बीच अंतर सामने आया है. दरअसल भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बुधवार को आरा सिविल कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट में भरत तिवारी के परिवार की ओर से अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने अपना पक्ष रखा.
कोर्ट की ओर से स्पष्टीकरण
अधिवक्ता ने जांच की दिशा, अब तक हुई कार्रवाई, प्राथमिकी में नामजद आरोपितों के खिलाफ उठाए गए कदम और जांच से जुड़े अन्य पहलुओं को लेकर कुल 11 बिंदु कोर्ट के सामने रखे. वकील का कहना है कि उन्होंने आरोपितों की गिरफ्तारी और मामले की जांच से जुड़ी जानकारी कोर्ट से मांगी थी. सुनवाई के बाद उन्होंने दावा किया कि कोर्ट ने मामले में शामिल 11 लोगों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है और 12 अगस्त को उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया गया है. इस दावे के बाद आरा सिविल कोर्ट के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विरेंद्र प्रसाद की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई. कोर्ट के मुताबिक, 11 लोगों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी नहीं किया गया है.
जांच से जुड़ा अपडेट मांगा गया
कोर्ट ने इतना जरूर स्पष्ट किया कि अधिवक्ता की ओर से 11 बिंदुओं पर पक्ष रखा गया था और उन बिंदुओं पर जांच से जुड़ा अपडेट मांगा गया है. यानी इस मामले में फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि कोर्ट ने जांच की प्रगति और कार्रवाई से जुड़ी जानकारी मांगी है, जबकि गैर-जमानती वारंट जारी होने की बात पर कोर्ट ने स्पष्ट रूप से अलग स्थिति बताई है.
12 अगस्त को मामले पर सुनवाई
वहीं, अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने दावा किया कि 12 अगस्त को मामले में भोजपुर एसपी को भी कोर्ट में उपस्थित रहना होगा और आरोपितों की गिरफ्तारी को लेकर कार्रवाई का जवाब देना होगा. मामले में जिन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए हैं, उनमें तत्कालीन जगदीशपुर एसडीएम संजीत कुमार, तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, दरोगा अंकित आर्यन, हरिश्चंद्र कुमार, एसटीएफ जवान अक्षय कुमार, विकास कुमार, एएसआई रमाशंकर यादव समेत अन्य नाम शामिल हैं.
अबतक इस मामले पर क्या हुआ?
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब तक एक गिरफ्तारी हो चुकी है. भोजपुर पुलिस ने एनकाउंटर में शामिल एसटीएफ जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार किया है. वहीं तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार को निलंबित किया जा चुका है. तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को पहले मद्य निषेध विभाग में डीएसपी के पद पर भेजा गया था और बाद में परिवार की ओर से मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद उन्हें लाइन क्लोज किया गया. तत्कालीन जगदीशपुर एसडीएम संजीत कुमार को भी पद से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध किया जा चुका है.
परिजन उठाते रहे हैं सवाल
भरत तिवारी की मौत के बाद से ही उनके परिजन और समर्थक पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते रहे हैं और मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते रहे हैं. अब कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद जांच की प्रगति को लेकर पुलिस से जानकारी मांगे जाने और अगले चरण की न्यायिक कार्रवाई पर सबकी नजर है. 12 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है. भरत तिवारी पुलिस एनकाउंटर मामले में भरत तिवारी के पक्ष से केस लड़ रहे अधिवक्ता के बयान के बाद कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि इस मामले में फिलहाल कोई नॉन बेलेबल वारंट जारी नहीं किया गया है,बल्कि इस मामले में जो मिसलेनियस फाइल किया गया था. उसके सभी बिंदुओं पर भोजपुर एसपी मिस्टर राज से कांड का अधतन रिपोर्ट मांगा है. फिलहाल गैर जमानती वारंट जैसा कोई बात नहीं है.
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