चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में नया और बड़ा मोड़ आ गया है. एक तरफ जहां इस मामले को लेकर सियासी गलियारों में जुबानी जंग जारी है, वहीं दूसरी तरफ कानूनी मोर्चे पर पीड़ित परिवार की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने फॉरेंसिक और बैलेस्टिक रिपोर्ट के हवाले से कई ऐसे चौंकाने वाले दावे किए हैं, जिसने पुलिसिया थ्योरी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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अधिवक्ता का दावा है कि उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्य साफ इशारा कर रहे हैं कि यह कोई साधारण मुठभेड़ नहीं, बल्कि एक सुनियोजित वारदात हो सकती है.
5 गोलियां, अलग-अलग हथियार और अलग-अलग दूरी!
अदालत में परिवार का पक्ष रख रहे सीनियर एडवोकेट संजीव कुमार सिंह ने खुलासा करते हुए बताया कि फॉरेंसिक और बैलेस्टिक रिपोर्ट के अध्ययन से यह बात सामने आई है कि भरत तिवारी को कुल 5 गोलियां लगी थीं.
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ये गोलियां किसी एक हथियार से नहीं, बल्कि अलग-अलग हथियारों से दागी गईं थीं. एडवोकेट का दावा है कि रिपोर्ट के अनुसार शुरुआती गोलियां कुछ दूरी से चलाई गई थीं, जबकि बाद की गोलियां बेहद करीब (सटाकर) मारी गई थीं. यह खुलासा पुलिस की एनकाउंटर स्टोरी को कटघरे में खड़ा करता है.
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, CDR और पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनेंगे ढाल
अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने साफ किया कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सच को सामने लाने के लिए कई अहम सबूत मौजूद हैं. उन्होंने कहा घटना से जुड़े डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य.घटना के वक्त और उससे पहले के फोन कॉल्स की डिटेल. बैलेस्टिक और बॉडी की रिपोर्ट.अहम सबूत बनेंगेइन तमाम साक्ष्यों को अदालत के समक्ष रखकर पुलिस के दावों की हवा निकाली जाएगी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए मजबूती से बहस की जाएगी.
एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों पर शिकंजे की तैयारी
कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाते हुए अधिवक्ता ने बताया कि एनकाउंटर की इस संदिग्ध कार्रवाई में शामिल बताए जा रहे पुलिसकर्मियों के खिलाफ अदालत से गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी करवाने के लिए याचिका दाखिल की गई है.अगर अदालत से पुलिसकर्मियों के खिलाफ वारंट जारी होता है, तो आने वाले दिनों में खाकीधारियों की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं और मामले में त्वरित कानूनी कार्रवाई देखने को मिल सकती है.
न्याय की लड़ाई में अगला मोड़ क्या?
फिलहाल भरत तिवारी एनकाउंटर मामला एक ऐसे मुहाने पर खड़ा है जहां एक तरफ परिजनों के गंभीर सवाल हैं, तो दूसरी तरफ मजबूत कानूनी दावे. अब पूरे प्रदेश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में अदालत के कटघरे में कौन-कौन से नए वैज्ञानिक तथ्य सामने आते हैं और इंसाफ की इस जंग में ऊंट किस करवट बैठता है.
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