Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर के बिलौटी गांव में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एक नया और बेहद भावुक कर देने वाला मोड़ सामने आया है. पुलिसिया कार्रवाई के बाद जहां पूरे इलाके में तनाव और मातम का माहौल है, वहीं गांव की महिलाओं और बुजुर्गों ने पुलिस की कहानी से बिल्कुल उलट एक अलग ही दास्तां बयां की है. भरत तिवारी की मौत के बाद गांव की महिलाओं का कहना है कि उसने जो कुछ भी किया, वो गांव वालों के हक और अधिकारों के लिए किया था. ग्रामीणों के मुताबिक, भरत तिवारी इस पूरे इलाके के लिए किसी मसीहा से कम नहीं थे और उनकी मौत ने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है.
ADVERTISEMENT
ग्रामीणों के हक के लिए लड़ी लड़ाई, उसी ने किया था सब
भरत तिवारी के एनकाउंटर के बाद गांव की एक महिला ने बेहद चौंकाने वाली बातें कही हैं. महिला का कहना है कि भरत तिवारी ने गांव वालों के लिए जमीन, बिजली और बांध जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था करवाई थी. इलाके में आज जो भी विकास या सुख-सुविधाएं दिख रही हैं, वो सब भरत तिवारी की वजह से ही संभव हो पाई थीं. महिला ने बेहद भावुक होकर कहा कि वो आखिरकार किसके लिए मरे? उन्होंने जो कुछ भी किया, इसी गांव और यहां के लोगों के भले के लिए किया था, लेकिन बदले में उन्हें पुलिस की गोलियां मिलीं.
बुजुर्ग चश्मदीद ने खोला पुलिसिया कार्रवाई का राज
घटना के वक्त मौके पर मौजूद गांव के बुजुर्ग ने उस दिन का पूरा आंखों देखा हाल बयां किया है. उन्होंने बताया कि उस दिन पुलिस के आने के बाद भरत तिवारी ने फायरिंग शुरू की थी, जिसके बाद पुलिस ने ग्रामीणों को वहां से हटा दिया. इसके बाद जब पुलिस ने उन्हें चारों तरफ से घेरा, तो स्थानीय दरोगा ने भरत तिवारी से सरेंडर करने के लिए कहा और भरोसा दिलाया कि उनकी सभी मांगों को पूरा किया जाएगा. दरोगा की बात मानकर भरत तिवारी ने अपना हथियार नीचे फेंक दिया और खुद को पुलिस के हवाले कर दिया, जिसके बाद पुलिस उन्हें दोनों तरफ से पकड़कर ले जाने लगी.
सरेंडर के बाद निहत्थे भरत तिवारी पर पुलिस ने चलाई गोली
बुजुर्ग चश्मदीद ने पुलिस की थ्योरी पर बेहद गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि जब पुलिस भरत तिवारी को पकड़कर आगे ले जा रही थी, तब ग्रामीण भी उनके पीछे-पीछे दौड़ पड़े. इसी बीच, पुलिस ने निहत्थे हो चुके भरत तिवारी पर अचानक तीन राउंड गोलियां दाग दीं, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई. बुजुर्ग ने साफ किया कि जब पुलिस ने भरत तिवारी को गोली मारी, तब उनके पास कोई हथियार नहीं था क्योंकि वो पहले ही सरेंडर कर चुके थे. इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गांव की महिलाओं को भी बेरहमी से पीटा और उन्हें डंडे मारकर जंगल की तरफ खदेड़ दिया.
गांव वालों के लिए भगवान की तरह थे भरत तिवारी
पूरे गांव में इस समय भरत तिवारी की मौत को लेकर गहरा आक्रोश और दुख है. गांव के बुजुर्गों का कहना है कि भरत तिवारी उनके लिए किसी भगवान से कम नहीं थे, जिन्होंने लोगों के हक की लड़ाई लड़ते हुए अपने प्राण दे दिए. इलाके में सड़क के गड्ढे भरने से लेकर बिजली-बत्ती और पंखे की जो भी व्यवस्था चल रही है, वो सब उन्हीं के प्रयासों का नतीजा था. ग्रामीणों का कहना है कि जब कोई अधिकारी या नेता उनकी सुध लेने नहीं आया, तब भरत तिवारी ने ही आगे बढ़कर उनकी मदद की थी.
यहां देखें वीडियो
'हनुमान जी का लॉकेट बेचकर लाया था...', भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अश्विनी चौबे ने दिया बड़ा बयान!
ADVERTISEMENT


