भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब एक नया और बेहद रहस्यमयी मोड़ सामने आ गया है। पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत तिवारी का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो ने पूरे मामले को एक नया रुख दे दिया है, क्योंकि इसमें भरत तिवारी अपनी मौत के बाद को लेकर कुछ बेहद चौंकाने वाले दावे करते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो के सामने आने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसने पुलिस प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच हलचल बढ़ा दी है.
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वीडियो में जताई अंतिम इच्छा और शरीर दान की बात
वायरल वीडियो में भरत तिवारी अपनी अंतिम इच्छा जाहिर करते हुए भावुक नजर आ रहे हैं. वह कहते सुनाई दे रहे हैं कि उनके जाने के बाद उनके शरीर को सबसे पहले देश की आन-बान-शान भारतीय सेना (इंडियन आर्मी) को दान कर दिया जाए.
यदि किसी कारणवश ऐसा संभव नहीं हो पाता है, तो दूसरे स्थान पर प्रशासन को और तीसरे स्थान पर आम जनता, विशेषकर गरीब, असहाय और मजदूर लोगों के हित में उनके शरीर का उपयोग करने के लिए सौंप दिया जाए. भरत ने वीडियो में यह भी कहा कि वह बहुत दिनों से इस कार्य को करना चाहते थे और अपने समाज से किया वादा पूरा करने के लिए अब उन्होंने अपनी यह अंतिम इच्छा लोगों के सामने रख दी है.
भरत तिवारी के मोबाइल फोन को लेकर बड़ा दावा और डर
इस पूरे वीडियो में सबसे ज्यादा चर्चा और रहस्य भरत तिवारी के मोबाइल फोन को लेकर बना हुआ है. वीडियो में भरत तिवारी साफ तौर पर यह हिदायत देते दिख रहे हैं कि उनके दुनिया से जाने के बाद उनका मोबाइल फोन उनके माता-पिता और घरवालों को छोड़कर किसी और बाहरी व्यक्ति के हाथ में नहीं लगना चाहिए.
उनका दावा था कि इस फोन के भीतर ऐसे कई महत्वपूर्ण प्रमाण और जानकारियां मौजूद हैं, जिन्हें कभी भी मिटाया या झुठलाया नहीं जा सकता है. उन्होंने यह भी आशंका जताई थी कि भविष्य में कुछ लोग बहला-फुसलाकर या फिर चोरी छिपे इस मोबाइल फोन को हासिल करने का हर संभव प्रयास करेंगे क्योंकि यह फोन एक बड़े साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखा गया है.
साक्ष्य और इतिहास को सुरक्षित रखने की बात कही
भरत तिवारी ने वीडियो में आगे कहा कि वह अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल हर महत्वपूर्ण जानकारी और सबूत को सुरक्षित रखने के लिए करते थे. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे फेसबुक पर लाइक या कमेंट पाने के लिए ऐसा नहीं कर रहे थे, बल्कि यह फोन उनका साक्ष्य और उनका इतिहास है जिसे चाहकर भी कोई मिटा नहीं सकता. वीडियो के अनुसार, उन्होंने हर तरह का प्रूफ इस मोबाइल में सुरक्षित रखा हुआ था और उनका मानना था कि भविष्य में इस फोन की कीमत और वैल्यू आज के मुकाबले बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी.
तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर उठाए सवाल
इस वायरल वीडियो में भरत तिवारी ने राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर भी सीधे सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री और राज्य के अन्य नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि क्या कभी इन नेताओं के मुख से बिहार वासियों, समाज या राष्ट्र के निर्माण और विकास के लिए खुद को त्याग या बलिदान करने जैसी बातें सुनी गई हैं? भरत का कहना था कि वह किसी भी तरह के दबाव, लालच या धमकी से पीछे हटने वाले नहीं हैं और वे समाज के हित के लिए प्रतिबद्ध हैं.
परिजनों ने की निष्पक्ष जांच की मांग, न्यायिक जांच की घोषणा
भरत तिवारी की मौत के बाद इस पुराने वीडियो के सामने आते ही उनके पैतृक गांव और परिजनों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है. भरत के परिजनों की ओर से अब इस मोबाइल फोन की निष्पक्ष जांच कराने की मांग जोर-शोर से उठाई जा रही है. वहीं दूसरी तरफ, इस पूरे एनकाउंटर मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार की ओर से पहले ही न्यायिक जांच की घोषणा की जा चुकी है.
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि वीडियो में किए गए सभी दावे भरत तिवारी के अपने व्यक्तिगत बयान हैं और मोबाइल में मौजूद साक्ष्यों को लेकर अभी तक कोई भी आधिकारिक या कानूनी पुष्टि सामने नहीं आई है. अब देखना यह होगा कि क्या यह मोबाइल इस पूरे विवाद की कोई नई परत खोलेगा या फिर यह रहस्य बना रहेगा.
यहां देखें वीडियो
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