कहते हैं कि हौसले अगर बुलंद हों, तो फटे हाल और कच्ची दीवारें भी सफलता का रास्ता नहीं रोक पातीं. बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सूबे की बेटियां अभावों में भी अवसर तलाशना जानती हैं. भोजपुर जिले के गढ़नी प्रखंड से एक ऐसी ही तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे बिहार का दिल जीत लिया है. यहां एक राजमिस्त्री की बेटी नासरीन परवीन ने 486 अंक हासिल कर पूरे राज्य में 5वां स्थान प्राप्त किया है.
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बीमार मां और गरीबी ने बनाया मजबूत
नासरीन की सफलता की चमक के पीछे संघर्ष का गहरा अंधेरा रहा है. उनके पिता मजदूरी और राजमिस्त्री का काम कर जैसे-तैसे परिवार का पेट पालते हैं. घर की माली हालत इतनी खराब है कि कई बार बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बन जाता है. नासरीन की मां अक्सर बीमार रहती हैं, और पिता की कमाई का एक बड़ा हिस्सा उनके इलाज और घर चलाने में ही खत्म हो जाता है. लेकिन नासरीन ने इन मुश्किलों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा बनाया. उन्होंने तय कर लिया था कि उनकी कलम ही उनके परिवार के दिन बदलेगी.
टूटी छत के नीचे 9 घंटे की तपस्या
जहां आज के दौर में छात्र महंगे कोचिंग और डिजिटल गैजेट्स के पीछे भागते हैं, वहीं नासरीन ने अपने गांव के स्कूल और खुद की मेहनत पर भरोसा जताया. वह रोजाना 8 से 9 घंटे तक पढ़ाई करती थीं. उर्दू जैसे विषय के लिए उन्होंने इंटरनेट का सहारा लिया, लेकिन बाकी विषयों की तैयारी उन्होंने अपनी लगन और स्कूल के शिक्षकों के मार्गदर्शन में पूरी की. नासरीन का कहना है कि उन्हें उम्मीद तो दूसरी रैंक की थी, लेकिन 5वां स्थान पाकर भी वह खुश हैं और अब उनका लक्ष्य और भी बड़ा है.
डॉक्टर बनकर गरीबों का मुफ्त इलाज करने का सपना
जब नासरीन से उनके भविष्य के बारे में पूछा गया, तो उनकी बातों ने सबका दिल पसीज दिया. वह नीट (NEET) क्वालीफाई कर डॉक्टर बनना चाहती हैं. इसके पीछे की वजह और भी भावुक करने वाली है. नासरीन कहती हैं, 'मैंने देखा है कि बहुत से गरीब लोग पैसे की कमी और सही इलाज न मिलने के कारण बीमारी में ही दम तोड़ देते हैं. मेरी मां भी बीमार रहती हैं. मैं डॉक्टर बनकर ऐसे गरीबों की सेवा करना चाहती हूं ताकि कोई इलाज के अभाव में न मरे."
पिता बोले- 'खून-पसीना एक कर बेटी को बनाऊंगा डॉक्टर'
बेटी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर पिता की आंखों में खुशी के आंसू हैं. राजमिस्त्री का काम करने वाले नासरीन के पिता का कहना है कि भले ही उन्हें कितनी भी मेहनत क्यों न करनी पड़े, वह अपनी बेटी के डॉक्टर बनने के सपने को टूटने नहीं देंगे. आज उनके दरवाजे पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है, जो यह बताने के लिए काफी है कि भोजपुर की इस बेटी ने सिर्फ परीक्षा नहीं पास की है, बल्कि गरीबी पर जीत हासिल की है.
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