Bihar Board Topper Interview: बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट 2026 का रिजल्ट जारी हो गया है. इसमें सहरसा जिले के सिहौल के रहने वाले आदर्श ने आर्ट्स स्ट्रीम में 477 अंक हासिल कर पूरे बिहार में तीसरा रैंक हासिल किया है. आदर्श की ये सफलता अपने आप में बेहद खास है. बेहद साधारण परिवार से आने वाले आदर्श के लिए ये मुकाम हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण था. बता दें कि आदर्श के पिता घर का खर्च चलाने के लिए हरियाणा की एक फैक्ट्री में मजदूरी करते हैं. इस बीच अब आर्दश के परिवार से हमारे सहयोगी बिहार तक ने बात की है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि उनके घरवालों ने बेटे की इस उपलब्धि पर क्या कहा.
ADVERTISEMENT
मां हुई भावुक, कहा-मेहनत रंग लाई
इस बीच अब आदर्श की मां ने भावुक होते हुए बताया कि उन्होंने अपने बच्चों के भविष्य के लिए दिन-रात एक कर दिया था. मां कहती हैं, "हमें भरोसा नहीं था कि हमारा बच्चा इस ऊंचाई तक पहुंचेगा, लेकिन उसकी मेहनत रंग लाई. समाज और रिश्तेदारों ने भले ही साथ छोड़ दिया हो, पर मेरे बेटे ने आज समाज में हमारा सिर ऊंचा कर दिया है."
आदर्श के पास खुद का मोबाइल तक नहीं
आज के दौर में जहां छात्र अपना अधिकांश समय इंस्टाग्राम और फेसबुक पर बिताते हैं, आदर्श के पास अपना खुद का मोबाइल तक नहीं है. उनके शिक्षकों ने बताया कि आदर्श ने कभी सोशल मीडिया की तरफ मुड़कर नहीं देखा. वह स्कूल के बाद रोजाना 5 से 6 घंटे सेल्फ स्टडी करते थे. आदर्श का मानना है कि निरंतरता और कड़ी मेहनत ही सफलता की एकमात्र कुंजी है. उन्होंने अपनी पढ़ाई दुर्गा उच्च विद्यालय और श्री प्रशांत कश्यप की कोचिंग से पूरी की.
देखें आदर्श को किस सब्जेक्ट में मिले कितने नंबर
- संस्कृत: 99 अंक
- अंग्रेजी: 94 अंक
- पॉलिटिकल साइंस: 98 अंक
- इतिहास: 94 अंक
- भूगोल: 92अंक
यहां देखें आदर्श की मार्कशीट
संस्कृत में गाड़े झंडे, शिक्षक बनने का है सपना
आदर्श ने संस्कृत विषय में 100 में से 99 अंक प्राप्त कर सबको हैरान कर दिया है. उनके संस्कृत शिक्षक निरंजन ठाकुर ने बताया कि आदर्श न केवल पढ़ने में तेज हैं, बल्कि वह धाराप्रवाह संस्कृत भी बोलते हैं. भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए आदर्श ने कहा, "मैं शिक्षक बनना चाहता हूं क्योंकि शिक्षक ही भविष्य का निर्माता होता है. मेरी रुचि संस्कृत में है और मैं इसी क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहता हूं."
भगवान, परिवार और शिक्षकों को श्रेय
अपनी सफलता का श्रेय भगवान, अपनी मां और शिक्षकों को देते हुए आदर्श ने कहा कि मुश्किलें तो आती रहती हैं, लेकिन उन मुश्किलों से जूझकर ही कुछ बड़ा किया जा सकता है. आदर्श के बड़े भाई ने भी उन्हें पढ़ाई में काफी सहयोग दिया. आज पूरा सहरसा जिला आदर्श की इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है.
यह भी पढ़ें:
ADVERTISEMENT


