डॉ. मनीष को पेपर लीक सिंडिकेट में प्रश्नपत्रों के लोहे और प्लास्टिक के सीलबंद बक्सों को इस तरह खोलने और बिना कोई सुराग छोड़े वापस सील करने का 'माहिर जादूगर' माना जाता था।
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सीलबंद बक्सा खोलता था, फिर लगा देता था हूबहू सील
EOU की जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं. डॉ. मनीष को प्रश्नपत्रों के गोपनीय ट्रंक और सीलबंद पैकेट से बिना किसी टूट-फूट के पेपर बाहर निकालने की महारत हासिल थी. वह पेपर की कॉपी निकाल लेता था और फिर बक्से को इस तरह पैक कर देता था कि किसी को शक तक न हो.
डॉ. मनीष पहले बिहार में ही सरकारी डॉक्टर के पद पर तैनात था, लेकिन बाद में उसने नौकरी छोड़ दी और पटना में NEET-PG की तैयारी करने लगा. इसी दौरान उसकी मुलाकात पेपर लीक माफिया संजीव मुखिया के बेटे डॉ. शिव और डॉ. शुभम से हुई, जिसके बाद उसने पैसों के लालच में अपराध की काली दुनिया में कदम रख दिया.
30 अभ्यर्थियों से ऐंठे 1.20 करोड़, पटना के होटल में रटवाया पर्चा
जांच अधिकारियों के मुताबिक, 15 मार्च 2024 को आयोजित BPSC TRE-3 परीक्षा से ठीक एक रात पहले (14 मार्च) डॉ. मनीष और उसके गिरोह ने 30 अभ्यर्थियों को पटना के एक बड़े होटल (कोहिनूर होटल) में ठहराया था. वहां लीक हुआ प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया और अभ्यर्थियों से उत्तर रटवाए गए.
इसके एवज में हर अभ्यर्थी से मोटी रकम वसूली गई. डॉ. मनीष ने खुद प्रति छात्र 50,000 रुपये का कमीशन लिया, जबकि पूरे गैंग ने मिलकर इस एक ही सौदे में करीब 1.20 करोड़ रुपये की उगाही की थी.
होटल की रेड से भागा, PMCH-NMCH के डेटा से पकड़ाया
14 मार्च की रात जब पुलिस ने होटल पर छापेमारी की थी, तब डॉ. मनीष चकमा देकर फरार हो गया था. लेकिन EOU लगातार उसके तकनीकी साक्ष्यों को खंगाल रही थी.
जांच एजेंसी जब पीएमसीएच (PMCH) और एनएमसीएच (NMCH) के मेडिकल छात्रों के डेटा की स्क्रूटनी कर रही थी, तब डॉ. मनीष का सुराग मिला. होटल के सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल टावर लोकेशन से उसकी पहचान पक्की हुई, जिसके बाद EOU की टीम ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया.
अब तक 296 गिरफ्तार, स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा केस
BPSC TRE-3 पेपर लीक मामले में अब तक 296 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. बिहार सरकार ने भी इस तरह के संगठित अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पटना, लखीसराय और पूर्णिया में विशेष Fast-Track Courts का गठन कर दिया है.
अब पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट के तहत डॉ. मनीष और उसके साथियों पर फास्ट ट्रैक कोर्ट में रोजाना सुनवाई होगी और 3 महीने के भीतर सख्त सजा दिलाने की तैयारी है.
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