बिहार सरकार ने राज्य में शहरीकरण को बढ़ावा देने और नियोजित तरीके से नए शहरों को बसाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के 11 शहरों के पास नए टाउनशिप (Satellite Towns) विकसित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है. इसके साथ ही सरकार ने इन चिन्हित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री और किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर फिलहाल रोक लगा दी है.
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इन नामों से जाने जाएंगे नए टाउनशिप
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में विकसित होने वाले इन टाउनशिप्स के नाम पौराणिक और क्षेत्रीय पहचान के आधार पर रखे गए हैं:
- पटना: पाटलिपुत्र
- सोनपुर: हरिहर नागपुर
- गया जी: मगध
- दरभंगा: मिथिला
- सहरसा: कोसी
- पूर्णिया: पूर्णिया
- मुंगेर: अंग
- मुजफ्फरपुर: तिरहुत
- छपरा: सारण
- भागलपुर: विक्रमशिला
- सीतामढ़ी: सीतापुरम
जमीन और निर्माण पर क्यों लगी रोक?
सरकार का उद्देश्य इन टाउनशिप्स को एक मास्टर प्लान के तहत विकसित करना है. जब तक इन क्षेत्रों का मास्टर प्लान पूरी तरह तैयार और अधिसूचित (Notify) नहीं हो जाता, तब तक वहां अव्यवस्थित निर्माण को रोकने के लिए पाबंदी लगाई गई है.
पटना, सोनपुर, गयाजी, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर: इन क्षेत्रों में 31 मार्च 2027 तक जमीन के हस्तांतरण, क्रय-विक्रय और भवनों के निर्माण पर रोक रहेगी.
मुजफ्फरपुर, छपरा, भागलपुर और सीतामढ़ी: यहाँ मास्टर प्लान विस्तार के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है, इसलिए इन क्षेत्रों में 30 जून 2027 तक रोक लगाई गई है. यदि मास्टर प्लान इन तारीखों से पहले तैयार हो जाता है, तो यह रोक समय से पहले हटा ली जाएगी.
कैसा होगा विकास का मॉडल?
इन नए टाउनशिप्स के 'कोर एरिया' का शुरुआती क्षेत्रफल 800 से 1200 एकड़ के बीच होगा, जो भविष्य में 10 गुना तक फैल सकता है. विकास के लिए 'लैंड पूलिंग' (Land Pooling), 'ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट' और 'नेगोशिएटेड सेटलमेंट' जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा. यह पूरी प्रक्रिया बिहार अर्बन एंड प्लानिंग डेवलपमेंट एक्ट 2012 और 2025 की नई नियमावली के तहत संचालित होगी.
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