बिहार के नए 'सम्राट' की पहली हुंकार! सीएम बनते ही सम्राट चौधरी ने बताया- राज्य में किसका चलेगा मॉडल

सम्राट चौधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री का पद संभालते ही स्पष्ट किया कि राज्य में 'नीतीश और नरेंद्र मोदी मॉडल' ही लागू रहेगा. उन्होंने नीतीश कुमार के प्रति आभार जताते हुए उनके मार्गदर्शन में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया.

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आशीष अभिनव

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बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो गई है. सम्राट चौधरी ने बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है. मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही सम्राट चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है कि बिहार में शासन का स्वरूप कैसा होगा और वे किस रास्ते पर आगे बढ़ेंगे. इस दौरान उन्होंने उन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया जिनमें बिहार में 'योगी मॉडल' या 'सम्राट मॉडल' लागू करने की चर्चा हो रही थी.

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बिहार में चलेगा 'नीतीश-मोदी मॉडल'

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए सम्राट चौधरी ने एक बहुत बड़ा बयान दिया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "बिहार में स्पष्ट तौर पर रहिए, यहाँ नरेंद्र मोदी जी और नीतीश मॉडल ही चलने वाला है." सम्राट चौधरी का यह बयान न केवल राज्य के प्रशासनिक रुख को स्पष्ट करता है, बल्कि सहयोगी दल जदयू (JDU) और नीतीश कुमार के प्रति उनके सम्मान को भी दर्शाता है.

नीतीश कुमार का भरोसा और पावर ट्रांसफर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचाने में नीतीश कुमार का अहम योगदान रहा है. सम्राट चौधरी, जो कभी नीतीश कुमार के सबसे मुखर विरोधियों में गिने जाते थे, समय के साथ उनके बेहद करीबी हो गए. 2014-15 के दौर में सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार की सरकार को मजबूती देने के लिए बड़ी भूमिका निभाई थी. अब जब नीतीश कुमार ने खुद सत्ता का हस्तांतरण किया है, तो सम्राट चौधरी ने उनके मार्गदर्शन में ही आगे बढ़ने का संकल्प लिया है.

लव-कुश समीकरण और 85 विधायकों का समर्थन

सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने के पीछे जदयू के 85 विधायकों का समर्थन और नीतीश कुमार की सहमति सबसे बड़ा कारक है. नीतीश कुमार ने शकुनी चौधरी के बेटे सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाने का जो वादा किया था, वह अब पूरा होता दिख रहा है. सम्राट चौधरी खुद कुशवाहा समाज से आते हैं, ऐसे में वे नीतीश कुमार के पारंपरिक 'लव-कुश' समीकरण को मजबूती से आगे बढ़ाते नजर आएंगे.

क्या नीतीश की योजनाओं को मिलेगा विस्तार?

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नीतीश कुमार ने अपने 20 साल के मुख्यमंत्री काल में जो योजनाएं और कार्यशैली अपनाई थी, सम्राट चौधरी उन्हें किस तरह आगे ले जाते हैं. सम्राट चौधरी के सामने चुनौती नीतीश कुमार के अनुभव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकासवादी नीतियों के बीच सामंजस्य बिठाकर बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की होगी.

 

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