बिहार की सत्ता की कमान संभालने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की एक तस्वीर और वीडियो ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. सम्राट चौधरी, जो लगातार नीतीश कुमार के सुशासन और मॉडल को आगे बढ़ाने की बात कह रहे हैं, उनके एक हालिया कदम ने यह संकेत दिया है कि बिहार की राजनीतिक हवा अब बदलने लगी है. जनता दरबार के दौरान सम्राट चौधरी ने एक मुस्लिम बुजुर्ग द्वारा दी गई टोपी पहनने से साफ इनकार कर दिया.
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क्या है पूरा मामला?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में देखा जा सकता है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी लोगों से मुलाकात कर रहे हैं और उनकी समस्याएं सुन रहे हैं. इसी दौरान एक बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति उनके पास पहुँचते हैं. उनके हाथ में एक सफेद गमछा और एक जालीदार मुस्लिम टोपी थी. जैसे ही बुजुर्ग ने सम्राट चौधरी को टोपी पहनाने की कोशिश की, उन्होंने तुरंत उनका हाथ पकड़ लिया और टोपी पहनने से मना कर दिया. हालांकि, उन्होंने सम्मानपूर्वक टोपी अपने हाथ में ले ली और बाद में उसे अपने सुरक्षाकर्मी को थमा दिया.
'नीतीश मॉडल' बनाम 'बीजेपी एजेंडा'
यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछले 20 सालों में नीतीश कुमार को अक्सर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों, मजारों और मस्जिदों में टोपी पहने देखा गया है. नीतीश कुमार ने हमेशा 'टोपी भी और तिलक भी' की राजनीति की वकालत की. लेकिन सम्राट चौधरी का यह रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस पुरानी घटना की याद दिलाता है जब उन्होंने भी गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए टोपी पहनने से इनकार किया था.
सियासी हवा बदलने के संकेत
सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी धार्मिक गतिविधियों में भी एक खास पैटर्न दिख रहा है. शपथ ग्रहण से पहले वे हनुमान मंदिर गए, फिर पटना सिटी गुरुद्वारे में मत्था टेका और हाल ही में सोनपुर के हरिहर नाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सम्राट चौधरी का यह व्यवहार साफ करता है कि भले ही सरकार नीतीश कुमार के समर्थन और मॉडल की बात करे, लेकिन बीजेपी अपने कोर एजेंडे और कार्यशैली को बिहार में लागू करने से पीछे नहीं हटेगी.
क्या वाकई चलेगा नीतीश का मॉडल?
वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी दलों ने भी चुटकी लेना शुरू कर दिया है. सवाल यह उठ रहा है कि क्या वाकई बिहार में नीतीश कुमार का समावेशी सुशासन मॉडल जारी रहेगा या सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार एक नई दक्षिणपंथी राजनीतिक दिशा की ओर मुड़ चुका है. सम्राट चौधरी का यह 'मैसेज' बिहार की भावी राजनीति के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है.
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