पैरों में ताले, आंखों में दर्द... पटना में बुजुर्ग पिता के पैरों में बेटे ने बांधी जंजीरें, फिर बेटे की ये मजबूरी सुन यात्रियों की भर आईं आंखें

Bihar news: बिहार के दानापुर रेलवे स्टेशन से एक रूह कंपा देने वाला वीडियो सामने आया है. यहां एक बुजुर्ग पिता के पैरों में लोहे की जंजीरें और ताले लटके मिले. जब लोगों ने पूछा कि क्या ये कोई मुजरिम है, तब पता चला कि यह बेड़ियां किसी पुलिस ने नहीं बल्कि उसके सगे बेटों ने पहनाई हैं. 

दानापुर रेलवे स्टेशन पर  जंजीरों में जकड़ा मिला बुजुर्ग
दानापुर रेलवे स्टेशन पर  जंजीरों में जकड़ा मिला बुजुर्ग

मनोज कुमार सिंह

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Danapur railway station viral video: बिहार की राजधानी पटना से सटे दानापुर रेलवे स्टेशन से मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली एक तस्वीर सामने आई है. इस स्टेशन को सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक बुजुर्ग व्यक्ति के पैरों में लोहे की भारी-भरकम जंजीरें (लोहे की बेड़ियां) और ताले लटके हुए हैं. वो कांपते पैरों से स्टेशन पर धीरे-धीरे चल रहा है. शुरुआत में स्टेशन पर मौजूद यात्रियों को लगा कि शायद यह कोई खूंखार अपराधी है, लेकिन जब इस बेबसी के पीछे का असली सच सामने आया तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं. क्या है पूरा मामला चलिए जानते हैं इस खबर में...

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बेटों ने ही पैरों में डाल दी थी बेड़ियां

इस बुजुर्ग व्यक्ति की पहचान बिहार के जमुई जिले के खैरा थाना क्षेत्र के अमारी गांव के रहने वाले जितेंद्र ताती के रूप में हुई है. सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि बुजुर्ग के पैरों में ये जंजीरें किसी पुलिस या अदालत की सजा के बाद नहीं लगाई गई थीं, बल्कि इन्हें उसके अपने ही सगे बेटों ने बांधा था. दानापुर स्टेशन पर जब लोगों ने बुजुर्ग को इस हाल में देखा तो तरह-तरह के सवाल पूछने लगे, जिसके बाद बुजुर्ग ने अपनी दर्दभरी दास्तां सुनाई.

'पहले पैरों में 5 ताले लगाए थे, अब 2 बचे हैं'

बुजुर्ग जितेंद्र ताती ने कैमरे के सामने रोते हुए बताया, "मेरा खुद का लड़का ही पैर में जंजीर लगाया है. सावन का महीना आते ही मेरा दिमागी संतुलन थोड़ा खराब हो जाता है. मैं कुछ भी खुराफात करने लगता हूं. बेटे ने मुझसे कहा था कि दो दिन के लिए जंजीर लगा लीजिए, आप ठीक हो जाएंगे. लेकिन अब सात-आठ महीने बीत चुके हैं. पहले मेरे पैरों में पांच ताले लगाए गए थे, रास्ते में तीन ताले किसी तरह खोलकर आया हूं, अभी भी दो ताले लगे हुए हैं."

बेटे ने रोते हुए बयां की अपनी मजबूरी

इस वायरल वीडियो के बाद जब मीडिया ने बुजुर्ग के बेटे अभिलाष कुमार से बात की तो कहानी का दूसरा और बेहद दर्दनाक पहलू सामने आया. बेटे ने बताया कि ये कोई क्रूरता नहीं बल्कि उनकी भारी मजबूरी और सुरक्षा का मामला है. बेटे ने रोते हुए कहा, "पिताजी की मानसिक स्थिति बिल्कुल ठीक नहीं है. जब इनका दिमाग डिस्टर्ब होता है तो ये गांव में किसी से भी लड़ाई-झगड़ा और गाली-गलौज करने लगते हैं. अगर पैर खुला छोड़ दें तो ये दौड़कर किसी के पास भी चले जाते हैं. किसी अनहोनी से बचाने के लिए हमें इन्हें बांधना पड़ता है."

चंदा इकट्ठा कर अब जा रहे हैं बागेश्वर धाम

बुजुर्ग के परिवार का कहना है कि वे बहुत गरीब हैं और इलाज कराने में असमर्थ हैं. बेटे ने बताया कि पिता की इस हालत को ठीक करने के लिए पूरे गांव ने मिलकर चंदा इकट्ठा किया है. गांव के हर घर से ₹20-20 चंदा लेकर कुल पैसे जुटाए गए हैं ताकि वह अपने पिता को इलाज और दुआ के लिए 'बागेश्वर धाम'  ले जा सके. परिवार को उम्मीद है कि वहां जाने के बाद उनके पिता की मानसिक स्थिति पूरी तरह ठीक हो जाएगी.

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