बिहार में नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और अब बाढ़ का असर कई जिलों में जमीन पर दिखाई देने लगा है. कहीं गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, तो कहीं सोन और पुनपुन नदी ने निचले इलाकों में पानी फैला दिया है. पटना में गंगा का पानी घाटों से निकलकर सड़कों तक पहुंच गया है. पुनपुन नदी के किनारे बसे इलाकों में पानी घरों तक पहुंच रहा है. बेगूसराय में कई गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं, तो बेतिया में कटाव के कारण एक पक्का मकान गंडक नदी में समा गया. यानी सवाल सिर्फ नदी के बढ़ते जलस्तर का नहीं है.सवाल ये है कि बिहार में बाढ़ की स्थिति इस वक्त कितनी गंभीर है, किन जिलों पर सबसे ज्यादा असर है और आने वाले दिनों में खतरा क्यों बढ़ सकता है?
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बिहार की 8 नदियां उफान पर
बिहार में इस वक्त 8 प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बताई जा रही हैं. इनमें गंगा, सोन, पुनपुन, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती और घघरा शामिल हैं. राज्य के करीब 13 जिले बाढ़ की चपेट में हैं .इसका मतलब ये नहीं है कि इन पूरे जिलों में बाढ़ है, बल्कि इन जिलों के कई निचले और नदी किनारे वाले इलाकों में पानी फैल चुका है. सबसे ज्यादा चिंता उन इलाकों को लेकर है, जहां नदियों का पानी बढ़ने के साथ-साथ कटाव भी तेज हो रहा है.
पटना में गंगा का पानी कहां तक पहुंचा?
राजधानी पटना में सबसे बड़ी चिंता गंगा और पुनपुन नदी को लेकर है. गांधी घाट पर गंगा खतरे के निशान से करीब 127 सेंटीमीटर यानी 4 फीट से ज्यादा ऊपर बह रही है. दीघा घाट पर भी गंगा खतरे के निशान से करीब 61 सेंटीमीटर ऊपर है. पटना सिटी में हालात और ज्यादा साफ दिखाई दे रहे हैं. भद्रघाट और महावीर घाट की सर्विस लेन तक गंगा का पानी पहुंच चुका है. कई जगह घुटनों तक पानी है और इसके बाद सर्विस लेन को बंद करना पड़ा है. यानी गंगा का पानी अब सिर्फ नदी के दायरे में नहीं है, बल्कि नदी से बाहर निकलकर निचले इलाकों और सड़कों को प्रभावित कर रहा है.
पुनपुन ने बढ़ाई पटना की चिंता
पटना में सिर्फ गंगा ही नहीं, पुनपुन नदी भी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है. श्रीपालपुर में पुनपुन नदी करीब 2 मीटर यानी लगभग 6.5 फीट ऊपर बताई जा रही है. पुनपुन के बढ़े जलस्तर का सबसे ज्यादा असर नदी के आसपास के निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है. चंदौसी समेत कई गांवों में पानी घुस चुका है. कई जगह सड़कें पानी के तेज बहाव से टूट गई हैं. यानी पटना में बाढ़ का खतरा सिर्फ गंगा किनारे तक सीमित नहीं है. गंगा और पुनपुन, दोनों का बढ़ा हुआ जलस्तर निचले इलाकों के लिए परेशानी बढ़ा रहा है.
सोन में लाखों क्यूसेक पानी, क्यों बढ़ी चिंता?
सोन नदी पर बने इंद्रपुरी बैराज के सभी 69 गेट खोल दिए गए हैं. बैराज से सोन नदी में करीब 5.5 से 6 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की बात सामने आई है. इतनी बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने का सीधा असर सोन के निचले इलाकों पर पड़ता है. पटना के मनेर, दानापुर, बख्तियारपुर और मोकामा के दियारा इलाकों में पानी तेजी से फैल रहा है. दियारा इलाके वैसे भी नदियों के बीच और आसपास बसे निचले क्षेत्र होते हैं. इसलिए जब नदी का जलस्तर बढ़ता है तो यहां पानी सबसे पहले पहुंचता है. फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए सरकारी नावें भी तैनात की गई हैं.
सिर्फ पटना नहीं, पूरे बिहार में असर
अब अगर पटना से बाहर निकलें तो तस्वीर और बड़ी है. बेगूसराय में 20 से ज्यादा गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है और करीब 50 हजार से ज्यादा आबादी प्रभावित बताई जा रही है. बेगूसराय के बलिया इलाके के शिवनगर में गंगा का कटाव भी तेजी से हो रहा है. भागलपुर के नवगछिया में गंगा के कटाव ने 100 साल पुराने दुर्गा मंदिर को भी अपनी चपेट में ले लिया. वहीं राघोपुर-काजीकोरैया इलाके में तटबंध को बचाने के लिए बड़ी संख्या में ट्रैक्टर और स्टीमर लगाए गए हैं. यहां लगातार बालू की बोरियां डालकर कटाव को रोकने की कोशिश की जा रही है.
बेतिया में कटाव ने छीना घर
पश्चिम चंपारण के बेतिया से आई तस्वीरें भी चिंता बढ़ाने वाली हैं. यहां गंडक नदी के तेज कटाव में एक पक्का मकान नदी में समा गया. यानी बाढ़ सिर्फ पानी भरने की समस्या नहीं है. जहां पानी के साथ नदी का कटाव तेज होता है, वहां घर, सड़क, खेत और तटबंध तक खतरे में आ जाते हैं.
बक्सर में सड़क पर नदी का पानी
बक्सर में भी बाढ़ का असर साफ दिखाई दे रहा है. बक्सर-मोहनिया नेशनल हाईवे 319-A पर पानी पहुंच गया है. कर्मनाशा नदी का पानी सिकरौल गांव के रास्ते पर करीब तीन फीट तक चढ़ने की बात सामने आई है. जब सड़क पर नदी का पानी आ जाता है तो इसका असर सिर्फ आवाजाही पर नहीं पड़ता. स्कूल, बाजार, अस्पताल और जरूरी सेवाओं तक पहुंच भी प्रभावित होती है.
मुंगेर में पलायन की नौबत
मुंगेर में गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. यहां कटाव तेज होने के कारण नदी किनारे रहने वाले लोगों के सामने घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाने की स्थिति बन रही है. यानी बिहार के कई इलाकों में अभी सबसे बड़ी चुनौती है- पानी से बचाव के साथ-साथ कटाव से बचाव.
रोहतास में नदी के बीच फंसे लोग
रोहतास में सोन नदी का जलस्तर बढ़ने से नौहट्टा इलाके में नदी के टीलों पर खेती करने वाले करीब 100 लोग फंस गए हैं. यह स्थिति इसलिए खतरनाक है क्योंकि नदी का जलस्तर और बढ़ा तो बाहर निकलने का रास्ता और मुश्किल हो सकता है. इसीलिए प्रशासन को ऐसे इलाकों में लगातार निगरानी और रेस्क्यू की जरूरत है.
बिहार में पानी आया कहां से?
अब सबसे बड़ा सवाल..आखिर बिहार में अचानक बाढ़ जैसी स्थिति क्यों बन रही है? इसके पीछे सिर्फ बिहार में हुई बारिश जिम्मेदार नहीं है. बिहार की कई नदियां पड़ोसी राज्यों और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों से भी पानी लेकर आती हैं. इसके अलावा बंगाल की खाड़ी और आसपास बने मौसम सिस्टम के कारण पूर्वी भारत में बारिश का दौर बना हुआ है.दूसरी तरफ सोन जैसी नदियों में बैराज से छोड़ा गया लाखों क्यूसेक पानी भी नीचे के इलाकों में पहुंच रहा है. यानी एक तरफ बारिश, दूसरी तरफ बैराज से छोड़ा गया पानी और तीसरी तरफ पहले से बढ़ा हुआ नदी का जलस्तर. इन तीनों का असर मिलकर बिहार के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा रहा है.
क्या आने वाले दिनों में खतरा बढ़ेगा?
मौसम विभाग के मुताबिक बिहार के कई जिलों में बारिश का दौर अभी जारी रह सकता है. आज भी 12 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. पटना समेत बाकी जिलों में भी बादल छाए रहने और कुछ जगह बारिश होने की संभावना है. अगले दो-तीन दिनों में तापमान में बहुत बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है. यानी बारिश के बावजूद उमस बनी रह सकती है.
लेकिन बाढ़ के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि अगर ऊपरी इलाकों में बारिश जारी रहती है और नदियों में पानी बढ़ता है, तो निचले इलाकों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है.
तो बिहार में बाढ़ की तस्वीर को अगर एक लाइन में समझें तो नदियां उफान पर हैं, कई जगह पानी गांव और सड़कों तक पहुंच चुका है और सबसे बड़ी चिंता अब बढ़ते जलस्तर के साथ-साथ नदी का कटाव है. पटना में गंगा और पुनपुन ने चिंता बढ़ाई है. सोन में लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने से दियारा इलाकों पर दबाव बढ़ा है. बेगूसराय, भागलपुर, मुंगेर, बेतिया, बक्सर, रोहतास समेत कई जिलों में बाढ़ और कटाव का असर दिखाई दे रहा है.
हालांकि प्रशासन ने राहत और बचाव की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन आने वाले दिनों में नदियों का जलस्तर कितना बढ़ता है और बारिश का दौर कितना लंबा चलता है, यही तय करेगा कि बिहार में बाढ़ की स्थिति आगे कितनी गंभीर होती है.
फिलहाल सबसे जरूरी है कि नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोग प्रशासन की चेतावनी को गंभीरता से लें और पानी बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों की ओर जाने में देरी न करें.
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