बिहार में पिछले 10 सालों से लागू पूर्ण शराबबंदी को लेकर अब नई राजनीतिक सुगबुगाहट शुरू हो गई है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे और एनडीए की नई सरकार बनने के बाद से ही शराबबंदी कानून की समीक्षा और इसे चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की चर्चाएं तेज हैं. माना जा रहा है कि सरकार राजस्व के भारी नुकसान और कानून के क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों को देखते हुए इसे धीरे-धीरे खोलने की योजना बना रही है.
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क्यों उठ रही है शराबबंदी हटाने की मांग?
बिहार सरकार पर वर्तमान में भारी आर्थिक बोझ है. जानकारों का मानना है कि शराबबंदी की वजह से राज्य को हर साल करीब 25 से 30 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है. शराबबंदी लागू होने से पहले उत्पाद विभाग का राजस्व कुल बजट का 12 से 15 प्रतिशत हुआ करता था. अब सत्ताधारी दल के कई विधायकों का भी मानना है कि इस कानून की समीक्षा होनी चाहिए कि पिछले 10 वर्षों में इससे वास्तव में क्या हासिल हुआ.
आंकड़ों में शराबबंदी का असर
रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में:
- शराबबंदी कानून के तहत करीब 16 लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया.
- प्रशासन ने लगभग 4.5 करोड़ लीटर शराब नष्ट की.
- इसके बावजूद बिहार में अवैध शराब की आपूर्ति और खपत पूरी तरह बंद नहीं हो पाई है, जिससे कानून की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं.
क्या है सरकार का 'फेज-वाइज' प्लान?
सरकार शराबबंदी को अचानक खत्म करने के बजाय इसे स्टेप-बाय-स्टेप खोलने पर विचार कर रही है. प्रस्तावित योजना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- विदेशी पर्यटकों के लिए छूट: सबसे पहले फाइव स्टार होटलों में केवल विदेशी पासपोर्ट धारकों के लिए शराब की सुविधा शुरू की जा सकती है.
- पर्यटन को बढ़ावा: बिहार में कई नए फाइव स्टार होटल बन रहे हैं. पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए शराब परोसने की अनुमति दी जा सकती है, जैसा कि नेपाल के कसीनो में वहां के मूल निवासियों के लिए पाबंदी और बाहरी लोगों के लिए छूट का नियम है.
- नीतीश कुमार को मनाना चुनौती: शराबबंदी नीतीश कुमार का 'ड्रीम प्रोजेक्ट' रहा है. बीजेपी के नेतृत्व वाली नई सरकार के लिए नीतीश कुमार को इस बदलाव के लिए राजी करना सबसे बड़ी चुनौती होगी.
महिला वोट बैंक और सामाजिक प्रभाव
सरकार इस बात को लेकर भी सतर्क है कि शराबबंदी हटाने से महिलाओं के बीच सरकार की छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. यही कारण है कि इसे अचानक हटाने के बजाय केवल बाहर से आने वाले लोगों और पर्यटकों तक सीमित रखकर शुरुआत करने की योजना है.
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