Bihar Board Matric Result 2026: मुजफ्फरपुर की रहने वाली माही कुमारी की सफलता की कहानी रोंगटे खड़े कर देने वाली है. माही पिछले सात वर्षों से मुजफ्फरपुर के श्मशान घाट पर चलने वाली 'अप्पन पाठशाला' में पढ़ाई कर रही हैं. घर की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि परिवार फुटपाथ पर रहता है, जहां दिन में शोर-शराबे के कारण पढ़ाई करना मुमकिन नहीं था. ऐसे में माही ने श्मशान घाट की शांति और वहां जलती चिताओं के बीच अपनी किताबों की दुनिया बसाई. मैट्रिक परीक्षा में 454 अंक हासिल कर माही ने साबित कर दिया कि मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है.
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माता-पिता करते हैं मजदूरी, बेटी का लक्ष्य IAS
माही के पिता गरीबनाथ सहनी सड़क किनारे फुटपाथ पर सब्जी बेचते हैं, जबकि उनकी मां सुनैना देवी दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का पेट पालती हैं. सात बहनों में सबसे छोटी माही ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी कड़ी मेहनत और अपने गुरु सुमित को दिया है. माही का कहना है कि घर छोटा होने और आर्थिक तंगी के कारण वह अक्सर रात को 12 बजे तक पढ़ाई करती थीं. अब माही का लक्ष्य बड़ा है; वह प्रशासनिक सेवा में जाकर एक IAS अधिकारी बनना चाहती हैं ताकि अपने परिवार और समाज की स्थिति बदल सकें.
अप्पन पाठशाला: जहां शवों के बीच खिल रहे हैं गुलाब
श्मशान घाट पर बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने वाले शिक्षक सुमित बताते हैं कि एक समय था जब ये बच्चे शवों के पास से फल और मिठाइयां चुनकर खाते थे. आज वही बच्चे टॉप कर रहे हैं. सुमित ने इन बच्चों के भविष्य के लिए अपनी पूरी जिंदगी समर्पित कर दी है. उनका कहना है कि श्मशान घाट में पढ़ाई कराना मुश्किल जरूर है, लेकिन यह बच्चों को जीवन का सबसे बड़ा सत्य सिखाता है. यहाँ से पढ़कर निकलने वाली माही और निशा जैसी बच्चियां आज स्लम इलाके के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं.
संघर्ष से सफलता तक का सफर
माही रोजाना 5 से 8 घंटे पढ़ाई करती थीं. फुटपाथ पर दुकान और घर होने की वजह से कई बार चुनौतियां सामने आईं, लेकिन माही ने हार नहीं मानी. उनके शिक्षक सुमित के अनुसार, श्मशान घाट का माहौल पढ़ाई के लिए भले ही अजीब लगे, लेकिन यहाँ बच्चों को यह समझ आता है कि शिक्षा ही उनके जीवन के हालात बदल सकती है. माही की इस उपलब्धि पर पूरे मुजफ्फरपुर में खुशी की लहर है और लोग इस 'श्मशान वाली टॉपर' के जज्बे को सलाम कर रहे हैं.
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