बिहार के कलाकारों के लिए बड़ी खुशखबरी, अब अपने ही प्रदेश में खुलेगा NSD कैंपस!

ऋचा शर्मा

• 04:14 PM • 03 Sep 2026

बिहार के कलाकारों के लिए बड़ी खुशखबरी है. राज्य में NSD कैंपस खोलने की दिशा में पहल शुरू हो गई है. मुख्यमंत्री की सहमति के बाद केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है. इससे बिहार के कलाकारों को अपने ही प्रदेश में रंगमंच और कला की बेहतर ट्रेनिंग का मौका मिल सकता है.

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बिहार की धरती ने देश को एक से बढ़कर एक कलाकार दिए हैं. रंगमंच हो, संगीत हो, नृत्य हो या लोककला...बिहार की प्रतिभा की पहचान देश ही नहीं, दुनिया तक है. लेकिन राज्य के कलाकारों के सामने लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है. उच्चस्तरीय प्रशिक्षण के लिए उन्हें बिहार से बाहर जाना पड़ता है.अब इसी तस्वीर को बदलने की दिशा में बड़ी पहल हुई है.

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बिहार के कलाकारों को अब अपने ही प्रदेश में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा यानी NSD जैसी प्रतिष्ठित संस्था से जुड़ने का मौका मिल सकता है.राज्य में NSD का कैंपस खोलने को लेकर सरकार की तरफ से पहल शुरू कर दी गई है और इस प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री की सहमति के बाद केंद्र सरकार को पत्र भी भेजा गया है.

कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने बताया कि मंत्री बनने के बाद जब कलाकार उनसे मिले तो उन्होंने बिहार में NSD का कैंपस खोलने की मांग रखी. कलाकारों की इस मांग को मुख्यमंत्री के सामने रखा गया और मुख्यमंत्री की सहमति मिलने के बाद केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया.

यानी अगर केंद्र सरकार की तरफ से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो बिहार के कलाकारों के लिए यह किसी बड़े बदलाव से कम नहीं होगा. क्योंकि NSD सिर्फ एक संस्थान नहीं, बल्कि देश में रंगमंच की उच्चस्तरीय ट्रेनिंग के सबसे बड़े केंद्रों में से एक माना जाता है.बिहार में इसका कैंपस खुलने का मतलब है कि यहां के युवाओं को अभिनय, रंगमंच और उससे जुड़ी विधाओं में बेहतर प्रशिक्षण का अवसर अपने ही राज्य में मिल सकेगा. लेकिन सरकार की तैयारी सिर्फ NSD कैंपस तक सीमित नहीं है.

बिहार सरकार का दावा है कि आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र के जरिए राज्य के सभी 38 जिलों में करीब 3 हजार बच्चों को कला की अलग-अलग विधाओं की ट्रेनिंग दी जा रही है. इन बच्चों को शास्त्रीय गायन, कथक, भरतनाट्यम, तबला, ढोलक और हारमोनियम जैसी विधाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. खास फोकस ग्रामीण इलाकों के उन बच्चों पर है, जिनके अंदर प्रतिभा तो है, लेकिन सही मंच और प्रशिक्षण का अवसर नहीं मिल पाता. यानी सरकार की कोशिश है कि बिहार की कला सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि गांवों से निकलने वाली प्रतिभाओं को भी पहचान मिले. और बिहार की कला की बात हो तो मिथिला पेंटिंग का जिक्र होना लाजिमी है.

मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने मिथिला चित्रकला संस्थान, मधुबनी की उपलब्धि का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक रामचरितमानस पर आधारित 108 मीटर लंबी मिथिला पेंटिंग तैयार की गई है, जिसे वर्ल्ड रिकॉर्ड का दर्जा मिला है.सरकार अब इसी तरह की प्रतिभाओं को लगातार मंच देने की तैयारी में है.

इसके लिए राज्य में करीब 240 सांस्कृतिक कार्यक्रमों का कैलेंडर तैयार किया गया है. अलग-अलग जिलों में इन कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जहां कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं.खास बात यह है कि इन कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए किसी पास या शुल्क की जरूरत नहीं है.

'शुक्र गुलजार' हर महीने के दूसरे शुक्रवार और 'शनिवार' महीने के चौथे शनिवार को आयोजित किया जाता है. मकसद साफ है. कलाकारों को मंच मिले, दर्शकों तक उनकी कला पहुंचे और बिहार की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत हो. वहीं उन कलाकारों को भी सरकार ने नहीं भुलाया है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन कला के नाम कर दिया. मुख्यमंत्री कल्याण कलाकार पेंशन योजना के जरिए ऐसे बुजुर्ग कलाकारों को आर्थिक सहायता देने की बात कही गई है.

कुल मिलाकर सरकार की कोशिश तीन स्तरों पर दिखाई दे रही है. बच्चों को प्रशिक्षण, कलाकारों को मंच और बुजुर्ग कलाकारों को आर्थिक सहारा..और अब अगर बिहार में NSD का कैंपस खुलने का रास्ता साफ होता है, तो यह इस पूरी कोशिश की सबसे बड़ी कड़ी साबित हो सकती है.क्योंकि बिहार के कलाकारों के पास प्रतिभा पहले से है...जरूरत सिर्फ उन्हें सही प्रशिक्षण, सही मंच और सही अवसर देने की है.

अगर बिहार में NSD का कैंपस खुलता है, तो शायद आने वाले दिनों में बिहार के कलाकारों को अपनी प्रतिभा निखारने के लिए दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा...उनके सपनों का मंच उनके अपने बिहार में ही तैयार होगा.